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पहले लालच दिखाया फिर करोड़ों हजम कर लिए
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:16 AM IST
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थाने के बाहर कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। करीब छह साल पहले शहर में जड़ जमा चुकी कल्पतरू विल्डटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी ने पहले लोगों का विश्वास जीता और फिर उन्हें करोड़ों की चपत लगा दी। कंपनी से प्रभावित सैकड़ों लोग अब कंपनी के उस भवन के चक्कर काट रहे हैं जहां ताला जड़ा है। शीर्ष अधिकारियों की लोकेशन नहीं मिल रही तो छुटभैय्ये कन्नी काट रहे हैं।
कल्पतरू ने शहर में खुद को रियल एस्टेट के बड़े समूह के रूप में प्रचारित किया। बताया कि मथुरा से देश भर में संचालित इस समूह का मुख्य कार्य कॉलोनियां डेवलप करना है। रियल एस्टेट के धंधे में रकम लगाने के लिए फाइनेंस आदि के सेक्टर खोले गए हैं। स्थानीय मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय जनता में विश्वास कायम करने के लिए साप्ताहिक और मासिक निवेश कराकर लोगों को साल या 24 माह पूरे होने पर ज्यादा ब्याज के साथ रकम दी गई। इन्हीं में से कुछ लोगों को एजेंट बनाया गया। अपने बीच के लोगों से उन्होंने कंपनी की एफडी व आरडी में ज्यादा से ज्यादा निवेश कराया। कई बार नए ग्राहक कंपनी से जुड़ने में असहज महसूस करते थे तो उन्हीं के मोहल्ले के एजेंट विश्वास से कह देते थे कि कोई गड़बड़ी हो तो उनसे रकम वसूल लेना। उस वक्त अपनी कमाई बढ़ाने के लिए किए गए ऐसे दावे अब एजेंटों के गले की फांस बन गए हैं। माल समेटकर वरिष्ठ अधिकारी निकल गए तो अब यही एजेंट निवेशकों का निशाना बन रहे हैं। बुधवार को भी ऐसे ही हालात थे। अधिकतर निवेशकों का गुस्सा एजेंटों पर ही उतर रहा था।
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एजेंट बोले, हम कसूरवार नहीं
सिविल लाइन पुलिस ने छापामारी की तो बदायूं निवासी कल्पतरू के पूर्व एजेंट राजकुमार शर्मा को पकड़ लिया। पुलिस उसे थाने ले आई। यहां इंस्पेक्टर ने पूछताछ की तो राजकुमार गिड़गिड़ाने लगा कि उसे तो मामूली कमीशन मिलती थी। उसे कमाई के बारे में कुछ नहीं पता। उसका कहना था कि डीएम रोड का दफ्तर कंपनी का निजी भवन है। प्रशासन चाहे तो उसे कब्जे में लेकर नीलाम करा दे और निवेशकों में रकम बांट दे। बताया कि कंपनी चेयरमैन का फोन रिसीव नहीं होता है तो बाकी लोगों ने नंबर बंद कर लिए हैं। थोड़ी देर में राजकुमार की पत्नी थाने पहुंच गईं। उनका कहना था कि उनके पति कोई अकेले ही एजेंट नहीं थे। कई दूसरे भी एजेंट हैं। उनके पति जेल जाएंगे तो वह दूसरों को भी जेल भिजवाए बिना नहीं छोड़ेंगी।
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नए दफ्तर पर छा गया सन्नाटा
निवेशकों ने पुलिस को बताया कि कंपनी के ही लोगों ने पुराना दफ्तर बंद करके गोल्डन क्रेडिट नाम से नई कंपनी बनाकर जवाहरपुरी में दफ्तर खोल लिया है। अब वही लोग उनसे नई कंपनी में निवेश करने को कह रहे हैं। दावा है कि इसमें कल्पतरू से भी जल्दी वक्त में रकम दूनी होगी। वह उन लोगों से अपनी रकम मांग रहे हैं तो उसे देने से मना कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने उझानी कोतवाली में तहरीर दी थी पर वहां भी उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। चूंकि आरोपी काफी प्रभावशाली लोग हैं इसलिए पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने से हिचकती है। निवेशकों की शिकायत पर पुलिस नए दफ्तर गई तो वहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छोड़कर बाकी लोग खिसक गए। इंस्पेक्टर देवेश सिंह ने कहा कि नई कंपनी में फर्जीवाड़ा है तो उसे भी बंद कराया जाएगा। लोगों को उनकी रकम वापस दिलाने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कल्पतरू ने शहर में खुद को रियल एस्टेट के बड़े समूह के रूप में प्रचारित किया। बताया कि मथुरा से देश भर में संचालित इस समूह का मुख्य कार्य कॉलोनियां डेवलप करना है। रियल एस्टेट के धंधे में रकम लगाने के लिए फाइनेंस आदि के सेक्टर खोले गए हैं। स्थानीय मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय जनता में विश्वास कायम करने के लिए साप्ताहिक और मासिक निवेश कराकर लोगों को साल या 24 माह पूरे होने पर ज्यादा ब्याज के साथ रकम दी गई। इन्हीं में से कुछ लोगों को एजेंट बनाया गया। अपने बीच के लोगों से उन्होंने कंपनी की एफडी व आरडी में ज्यादा से ज्यादा निवेश कराया। कई बार नए ग्राहक कंपनी से जुड़ने में असहज महसूस करते थे तो उन्हीं के मोहल्ले के एजेंट विश्वास से कह देते थे कि कोई गड़बड़ी हो तो उनसे रकम वसूल लेना। उस वक्त अपनी कमाई बढ़ाने के लिए किए गए ऐसे दावे अब एजेंटों के गले की फांस बन गए हैं। माल समेटकर वरिष्ठ अधिकारी निकल गए तो अब यही एजेंट निवेशकों का निशाना बन रहे हैं। बुधवार को भी ऐसे ही हालात थे। अधिकतर निवेशकों का गुस्सा एजेंटों पर ही उतर रहा था।
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एजेंट बोले, हम कसूरवार नहीं
सिविल लाइन पुलिस ने छापामारी की तो बदायूं निवासी कल्पतरू के पूर्व एजेंट राजकुमार शर्मा को पकड़ लिया। पुलिस उसे थाने ले आई। यहां इंस्पेक्टर ने पूछताछ की तो राजकुमार गिड़गिड़ाने लगा कि उसे तो मामूली कमीशन मिलती थी। उसे कमाई के बारे में कुछ नहीं पता। उसका कहना था कि डीएम रोड का दफ्तर कंपनी का निजी भवन है। प्रशासन चाहे तो उसे कब्जे में लेकर नीलाम करा दे और निवेशकों में रकम बांट दे। बताया कि कंपनी चेयरमैन का फोन रिसीव नहीं होता है तो बाकी लोगों ने नंबर बंद कर लिए हैं। थोड़ी देर में राजकुमार की पत्नी थाने पहुंच गईं। उनका कहना था कि उनके पति कोई अकेले ही एजेंट नहीं थे। कई दूसरे भी एजेंट हैं। उनके पति जेल जाएंगे तो वह दूसरों को भी जेल भिजवाए बिना नहीं छोड़ेंगी।
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नए दफ्तर पर छा गया सन्नाटा
निवेशकों ने पुलिस को बताया कि कंपनी के ही लोगों ने पुराना दफ्तर बंद करके गोल्डन क्रेडिट नाम से नई कंपनी बनाकर जवाहरपुरी में दफ्तर खोल लिया है। अब वही लोग उनसे नई कंपनी में निवेश करने को कह रहे हैं। दावा है कि इसमें कल्पतरू से भी जल्दी वक्त में रकम दूनी होगी। वह उन लोगों से अपनी रकम मांग रहे हैं तो उसे देने से मना कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने उझानी कोतवाली में तहरीर दी थी पर वहां भी उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। चूंकि आरोपी काफी प्रभावशाली लोग हैं इसलिए पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने से हिचकती है। निवेशकों की शिकायत पर पुलिस नए दफ्तर गई तो वहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छोड़कर बाकी लोग खिसक गए। इंस्पेक्टर देवेश सिंह ने कहा कि नई कंपनी में फर्जीवाड़ा है तो उसे भी बंद कराया जाएगा। लोगों को उनकी रकम वापस दिलाने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।