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दातागंज इलाके में भी खूब होती रही है पशु तस्करी
Updated Tue, 27 Mar 2018 08:39 PM IST
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दातागंज इलाके में भी खूब
होती रही है पशु तस्करी
अब तो तस्करों को आसानी से कटरी में मिल जाते हैं आवारा जानवर
रामगंगा में पानी नहीं होने की वजह से फरीदपुर इलाके में ले जाते हैं जानवरों को
अमर उजाला ब्यूरो
दातागंज (बदायूं)।
पशु तस्करी के लिए दातागंज इलाका बदनाम रहा है। वजह है कि गंगा-रामगंगा की कटरी पशु तस्करों के लिए मुफीद रही है। अनेक बार पुलिस ने गोवंशीय पशुओं का मांस बरामद किया है। अब रामगंगा के पूरी तरह से सूख जाने की वजह से पशु तस्करों को अपने काम में और भी ज्यादा आसानी हो गई है। वे सूखी पड़ी रामगंगा से ही फरीदपुर (बरेली) को जंगल में घूमने वाले आवारा जानवरों को गाड़ियों में भरकर ले जाते हैं। हालांकि पुलिस का दावा यहीं है कि क्षेत्र में पशु तस्करी पर पूरी तरह रोक लगी है।
बरेली जिले की नवाबगंज पुलिस ने दो पशु तस्करों को पकड़ा है। जिनके पास से पुलिस ने एक केंद्रीय मंत्री के लैटरपैड के साथ ही दातागंज और जहानाबाद (पीलीभीत) थाने की मोहरें बरामद की हैं। पुलिस को उन पशु तस्करों से और भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं हैं। दातागंज क्षेत्र में गंगा और रामगंगा की कटरी है। पशु तस्करों के लिए यह इलाका हमेशा ही फायदे का रहा है। हालांकि कई बार पुलिस ने इस इलाके से पशु तस्करों को गोवंशीय मांस के साथ पकड़ा है। सूबे की सरकार की सख्ती के बाद से पशु तस्करों पर पुलिस की पैनी नजर भी रही है फिर भी यह मामला रुका नहीं है।
अब तो क्षेत्र में बह रही रामगंगा इस समय पूरी तरह से सूखी पड़ी है। सो राजस्थान के अलावा जलालाबाद (शाहजहांपुर) फर्रुखाबाद, उसहैत होते हुए पशु तस्कर इधर से गुजरते रहे हैं। जंगल से होकर पशु तस्कर फरीदपुर (बरेली) को चले जाते हैं।
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कटरी से जुड़े लोगों का कहना है कि अब पशु तस्कर क्षेत्र में घूमने वाले आवारा जानवर जो बूढ़े हो गए हैं या फिर दुधारू नहीं हैं उन्हें पकड़कर ले जाते हैं। पशु तस्करों की गाड़ियां देर शाम को आती हैं और अपना काम करके सीमावर्ती जिलों में चले जाते हैं।
प्रभारी कोतवाल राजेश सिंह का कहना है कि पशु तस्करी पर पूरी तरह रोक लगी है। अगर फिर भी कहीं से शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ऐसे लोगो पर नजर रहती है जो गलत काम करते हैं। पशु तस्करों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। कटरी में पुलिस घूमती रहती है। क्षेत्र की जनता को भी बताया गया है कि वह ऐसे लोगों के बारे में जानकारी पुलिस को दें जो जानवरों को ले जाते हैं।
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होती रही है पशु तस्करी
अब तो तस्करों को आसानी से कटरी में मिल जाते हैं आवारा जानवर
रामगंगा में पानी नहीं होने की वजह से फरीदपुर इलाके में ले जाते हैं जानवरों को
अमर उजाला ब्यूरो
दातागंज (बदायूं)।
पशु तस्करी के लिए दातागंज इलाका बदनाम रहा है। वजह है कि गंगा-रामगंगा की कटरी पशु तस्करों के लिए मुफीद रही है। अनेक बार पुलिस ने गोवंशीय पशुओं का मांस बरामद किया है। अब रामगंगा के पूरी तरह से सूख जाने की वजह से पशु तस्करों को अपने काम में और भी ज्यादा आसानी हो गई है। वे सूखी पड़ी रामगंगा से ही फरीदपुर (बरेली) को जंगल में घूमने वाले आवारा जानवरों को गाड़ियों में भरकर ले जाते हैं। हालांकि पुलिस का दावा यहीं है कि क्षेत्र में पशु तस्करी पर पूरी तरह रोक लगी है।
बरेली जिले की नवाबगंज पुलिस ने दो पशु तस्करों को पकड़ा है। जिनके पास से पुलिस ने एक केंद्रीय मंत्री के लैटरपैड के साथ ही दातागंज और जहानाबाद (पीलीभीत) थाने की मोहरें बरामद की हैं। पुलिस को उन पशु तस्करों से और भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं हैं। दातागंज क्षेत्र में गंगा और रामगंगा की कटरी है। पशु तस्करों के लिए यह इलाका हमेशा ही फायदे का रहा है। हालांकि कई बार पुलिस ने इस इलाके से पशु तस्करों को गोवंशीय मांस के साथ पकड़ा है। सूबे की सरकार की सख्ती के बाद से पशु तस्करों पर पुलिस की पैनी नजर भी रही है फिर भी यह मामला रुका नहीं है।
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अब तो क्षेत्र में बह रही रामगंगा इस समय पूरी तरह से सूखी पड़ी है। सो राजस्थान के अलावा जलालाबाद (शाहजहांपुर) फर्रुखाबाद, उसहैत होते हुए पशु तस्कर इधर से गुजरते रहे हैं। जंगल से होकर पशु तस्कर फरीदपुर (बरेली) को चले जाते हैं।
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कटरी से जुड़े लोगों का कहना है कि अब पशु तस्कर क्षेत्र में घूमने वाले आवारा जानवर जो बूढ़े हो गए हैं या फिर दुधारू नहीं हैं उन्हें पकड़कर ले जाते हैं। पशु तस्करों की गाड़ियां देर शाम को आती हैं और अपना काम करके सीमावर्ती जिलों में चले जाते हैं।
प्रभारी कोतवाल राजेश सिंह का कहना है कि पशु तस्करी पर पूरी तरह रोक लगी है। अगर फिर भी कहीं से शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ऐसे लोगो पर नजर रहती है जो गलत काम करते हैं। पशु तस्करों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। कटरी में पुलिस घूमती रहती है। क्षेत्र की जनता को भी बताया गया है कि वह ऐसे लोगों के बारे में जानकारी पुलिस को दें जो जानवरों को ले जाते हैं।