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पुलिस का फंडा रहा कामयाब, पहले नरमी फिर दिखाए सख्त तेवर
Updated Thu, 03 Aug 2017 11:47 PM IST
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उझानी (बदायूं)।
कांवड़ियों और दुकानदारों के बीच मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में हालात पर काबू पाने में पुलिस फोर्स को भले ही दो घंटे लगे, लेकिन पुलिस अफसरों ने जिस तरह से कार्रवाई की, वह फंडा कामयाब रहा। बवाल के दौरान पुलिस कुछ देर तक मूकदर्शक बनी रही। कांवड़ियों और दुकानदारों को भी लगा कि जो भी करो, कुछ नहीं होगा। उत्पातियों की इस धारणा पर ब्रेक उस वक्त लगा जब पुलिस कर्मियों ने सख्ती दिखानी शुरू की। इसके बाद पुलिस का वह मकसद भी पूरा हो गया कि उसे दोनों में से किसी भी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं करनी पड़ी।
बवाल के दौरान दुकानों में आगजनी का खतरा बढ़ने लगा था। कांवड़ियों ने दुकानदारों की पिटाई और तोड़फोड़ में जिन डंडों का इस्तेमाल किया, वह दुकानदारों से ही छीने गए थे। चश्मदीदों का कहना है कि कांवड़ियों और दुकानदारों में मारपीट खत्म भी हो गई थी लेकिन एक दुकानदार के समर्थक कुछ लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से खींचकर कांवड़िये सुमित को पीटा, उसी से मामला भड़का। पुलिस चाहती तो शुरू में ही सख्ती दिखाकर कांवड़ियों को खदेड़ सकती थी। सीओ गमलेश्वर विल्टोरिया और प्रभारी निरीक्षक संजय गोयल के साथ पुलिस फोर्स भी पर्याप्त संख्या में था लेकिन खदेड़े जाने के साइड इफेक्ट के बारे में सोचकर ही पुलिस ने दूसरा रास्ता चुना। इसी के चलते पहले घायलों को अस्पताल पहुंचाकर प्राथमिक उपचार कराया गया फिर सख्ती दिखाते हुए दुकानदारों और कांवड़ियों पर काबू पाया। कांवड़ियों की भीड़ घटनास्थल पर ज्यादा इकट्ठी नहीं हो पाए, इससे पहले ही शिवभक्तों की कई टोलियों को कछला की ओर छतुइया के पास तो बदायूं की तरफ बाईपास पर रोक लिया गया।
------------------------- दो घंटे तक रहा अराजकता का माहौल
उझानी। बवाल के दौरान मंडी मोड़ पर कांवड़ियों और दुकानदारों ने खुद को बढ़-चढ़कर पेश किया। हालांकि ज्यादातर दुकानदार झगड़ा शांत कराना चाहते थे लेकिन कुछेक दुकानदारों ने अपने परिचितों को बुलाकर आग में घी डालने का काम किया। अराजकता का माहौल करीब दो घंटे तक रहा।
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------------------------ लौटते समय दहशत में दिखे असदपुर के शिवभक्त
उझानी। भोले के बाजार में जिन शिवभक्तों का दुुकानदारों से झगड़ा हुआ उनकी टोली कछला से जल भरकर दोपहर में हाईवे से होकर लौटी। घायल सुमित और बदनसिंह समेत कई शिवभक्तों के चेहरे पर दहशत का साया नजर आया। छतुइया रेल क्रॉसिंग के पास बातचीत के दौरान सुमित ने बताया- उनका कोई कसूर नहीं था। वह सामान का 10 रुपया कम दे रहा था, इसी बात पर दुकानदार ने हाथापाई कर दी।
-------------------------
पुलिस फोर्स ने हालात पर बहुत जल्दी ही काबू पा लिया था। झगड़े की वजह ऐसी नहीं थी जो बवाल का रूप लेती लेकिन आपसी गलतफहमी में विवाद बढ़ गया। दोनों में से कोई भी पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहता। इसीलिए कोतवाली में किसी ने तहरीर नहीं दी है।
- गमलेश्वर विल्टोरिया, सीओ
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कांवड़ियों और दुकानदारों के बीच मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में हालात पर काबू पाने में पुलिस फोर्स को भले ही दो घंटे लगे, लेकिन पुलिस अफसरों ने जिस तरह से कार्रवाई की, वह फंडा कामयाब रहा। बवाल के दौरान पुलिस कुछ देर तक मूकदर्शक बनी रही। कांवड़ियों और दुकानदारों को भी लगा कि जो भी करो, कुछ नहीं होगा। उत्पातियों की इस धारणा पर ब्रेक उस वक्त लगा जब पुलिस कर्मियों ने सख्ती दिखानी शुरू की। इसके बाद पुलिस का वह मकसद भी पूरा हो गया कि उसे दोनों में से किसी भी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं करनी पड़ी।
बवाल के दौरान दुकानों में आगजनी का खतरा बढ़ने लगा था। कांवड़ियों ने दुकानदारों की पिटाई और तोड़फोड़ में जिन डंडों का इस्तेमाल किया, वह दुकानदारों से ही छीने गए थे। चश्मदीदों का कहना है कि कांवड़ियों और दुकानदारों में मारपीट खत्म भी हो गई थी लेकिन एक दुकानदार के समर्थक कुछ लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से खींचकर कांवड़िये सुमित को पीटा, उसी से मामला भड़का। पुलिस चाहती तो शुरू में ही सख्ती दिखाकर कांवड़ियों को खदेड़ सकती थी। सीओ गमलेश्वर विल्टोरिया और प्रभारी निरीक्षक संजय गोयल के साथ पुलिस फोर्स भी पर्याप्त संख्या में था लेकिन खदेड़े जाने के साइड इफेक्ट के बारे में सोचकर ही पुलिस ने दूसरा रास्ता चुना। इसी के चलते पहले घायलों को अस्पताल पहुंचाकर प्राथमिक उपचार कराया गया फिर सख्ती दिखाते हुए दुकानदारों और कांवड़ियों पर काबू पाया। कांवड़ियों की भीड़ घटनास्थल पर ज्यादा इकट्ठी नहीं हो पाए, इससे पहले ही शिवभक्तों की कई टोलियों को कछला की ओर छतुइया के पास तो बदायूं की तरफ बाईपास पर रोक लिया गया।
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------------------------- दो घंटे तक रहा अराजकता का माहौल
उझानी। बवाल के दौरान मंडी मोड़ पर कांवड़ियों और दुकानदारों ने खुद को बढ़-चढ़कर पेश किया। हालांकि ज्यादातर दुकानदार झगड़ा शांत कराना चाहते थे लेकिन कुछेक दुकानदारों ने अपने परिचितों को बुलाकर आग में घी डालने का काम किया। अराजकता का माहौल करीब दो घंटे तक रहा।
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------------------------ लौटते समय दहशत में दिखे असदपुर के शिवभक्त
उझानी। भोले के बाजार में जिन शिवभक्तों का दुुकानदारों से झगड़ा हुआ उनकी टोली कछला से जल भरकर दोपहर में हाईवे से होकर लौटी। घायल सुमित और बदनसिंह समेत कई शिवभक्तों के चेहरे पर दहशत का साया नजर आया। छतुइया रेल क्रॉसिंग के पास बातचीत के दौरान सुमित ने बताया- उनका कोई कसूर नहीं था। वह सामान का 10 रुपया कम दे रहा था, इसी बात पर दुकानदार ने हाथापाई कर दी।
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पुलिस फोर्स ने हालात पर बहुत जल्दी ही काबू पा लिया था। झगड़े की वजह ऐसी नहीं थी जो बवाल का रूप लेती लेकिन आपसी गलतफहमी में विवाद बढ़ गया। दोनों में से कोई भी पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहता। इसीलिए कोतवाली में किसी ने तहरीर नहीं दी है।
- गमलेश्वर विल्टोरिया, सीओ