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हर जगह धमकाया, कहा- मुकदमेबाजी में क्या रखा है, फैसला कर लो
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बदायूं। किसान को तंग करने वाले आरोपियों ने जो किया सो किया, उससे ज्यादा पुलिस ने उसका उत्पीड़न किया। पुलिस चौकी से लेकर सीओ पेशी, एसएसपी कार्यालय तक से उन्हें दुत्कार मिली। यह कहकर धमकाया गया कि मुकदमेबाजी में क्या रखा है। फैसला कर लोगे तो पैसा बचेगा।
किसान के बेटे अमरजीत के अनुसार उसके परिवार का उत्पीड़न करने में एसआई अशोक कुमार और सिपाही मनोज कुमार सबसे आगे रहे। मारपीट के बाद एफआईआर दर्ज कराने के बाद सिपाही ही उसे और उसके भाई ओमप्रवेश को उठाकर पुलिस चौकी ले गया था। सबसे पहले इन्हीं दोनों ने हड़काया। उसे थप्पड़ भी मारे गए थे। पहले उसे धमकाने की पूरी कोशिश की गई। बाद में उससे कहा कि कुछ रुपये ले ले और एफआईआर वापस ले ले। इस मुकदमेबाजी में कुछ नहीं रखा है। इसके बावजूद उन्होंने एसएसपी कार्यालय आकर सीओ सिटी आलोक मिश्रा को तहरीर दी। सीओ ने दोनों पक्षों को बुलाकर बयान दर्ज कराने और कार्रवाई का आश्वासन दिया था। पहले उसके परिवार के बयान दर्ज कराए गए। जब उनके बयान दर्ज किए जा रहे थे, तब सीओ की पेशी में सिपाहियों द्वारा उन्हें धमकाया गया। यहां भी उनसे कहा गया कि मुकदमेबाजी में कुछ नहीं रखा है। इसमें फैसला कर लो। कोर्ट कचहरी के चक्कर में तुम्हारा रुपया ही बर्बाद होगा।
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चौथी बार एसएसपी कार्यालय पहुंचा था परिवार
किसान के बेटे अमरजीत ने बताया कि उसके परिवार वाले बुधवार को चौथी बार एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। उसके पिता ने आग तो बाद में लगाई थी। इससे पहले एसएसपी से मिलकर पुलिस की पूरी कहानी बयां करना चाहते थे लेकिन उन्हें जन शिकायत कक्ष पर ही रोक लिया गया। यहां मौजूद एक इंस्पेक्टर ने कहा कि उसने पहले भी शिकायत की थी। उसी से कार्रवाई होगी। अब उसे दोबारा शिकायत करने की जरूरत नहीं है। इंस्पेक्टर ने उनको एसएसपी से नहीं मिलने दिया। इससे वह कार्यालय से निकल गए। जब उन्हें लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता। पुलिस आरोपियों से मिल गई है, तो उसके पिता बाहर से पेट्रोल डालकर एसएसपी कार्यालय में घुसे और उन्होंने आग लगा ली।
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जिला अस्पताल में भी कर ली आरोपियों ने साठगांठ
आरोपियों की पहुंच केवल पुलिस तक ही नहीं थी। उन्होंने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जाकर भी साठगांठ कर ली थी। ओमप्रवेश के मुताबिक मारपीट में चोट लगने के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया था। आरोपियों ने अपना मेडिकल कराने के लिए अस्पताल में तगड़ी साठगांठ कर ली। उन्होंने रुपये देकर अपनी मेडिकल रिपोर्ट बनवाई। उनकी सामान्य चोटें बनाने के लिए भी आरोपियों ने पैसे दिए थे।
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किसान के बेटे अमरजीत के अनुसार उसके परिवार का उत्पीड़न करने में एसआई अशोक कुमार और सिपाही मनोज कुमार सबसे आगे रहे। मारपीट के बाद एफआईआर दर्ज कराने के बाद सिपाही ही उसे और उसके भाई ओमप्रवेश को उठाकर पुलिस चौकी ले गया था। सबसे पहले इन्हीं दोनों ने हड़काया। उसे थप्पड़ भी मारे गए थे। पहले उसे धमकाने की पूरी कोशिश की गई। बाद में उससे कहा कि कुछ रुपये ले ले और एफआईआर वापस ले ले। इस मुकदमेबाजी में कुछ नहीं रखा है। इसके बावजूद उन्होंने एसएसपी कार्यालय आकर सीओ सिटी आलोक मिश्रा को तहरीर दी। सीओ ने दोनों पक्षों को बुलाकर बयान दर्ज कराने और कार्रवाई का आश्वासन दिया था। पहले उसके परिवार के बयान दर्ज कराए गए। जब उनके बयान दर्ज किए जा रहे थे, तब सीओ की पेशी में सिपाहियों द्वारा उन्हें धमकाया गया। यहां भी उनसे कहा गया कि मुकदमेबाजी में कुछ नहीं रखा है। इसमें फैसला कर लो। कोर्ट कचहरी के चक्कर में तुम्हारा रुपया ही बर्बाद होगा।
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चौथी बार एसएसपी कार्यालय पहुंचा था परिवार
किसान के बेटे अमरजीत ने बताया कि उसके परिवार वाले बुधवार को चौथी बार एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। उसके पिता ने आग तो बाद में लगाई थी। इससे पहले एसएसपी से मिलकर पुलिस की पूरी कहानी बयां करना चाहते थे लेकिन उन्हें जन शिकायत कक्ष पर ही रोक लिया गया। यहां मौजूद एक इंस्पेक्टर ने कहा कि उसने पहले भी शिकायत की थी। उसी से कार्रवाई होगी। अब उसे दोबारा शिकायत करने की जरूरत नहीं है। इंस्पेक्टर ने उनको एसएसपी से नहीं मिलने दिया। इससे वह कार्यालय से निकल गए। जब उन्हें लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता। पुलिस आरोपियों से मिल गई है, तो उसके पिता बाहर से पेट्रोल डालकर एसएसपी कार्यालय में घुसे और उन्होंने आग लगा ली।
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जिला अस्पताल में भी कर ली आरोपियों ने साठगांठ
आरोपियों की पहुंच केवल पुलिस तक ही नहीं थी। उन्होंने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जाकर भी साठगांठ कर ली थी। ओमप्रवेश के मुताबिक मारपीट में चोट लगने के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया था। आरोपियों ने अपना मेडिकल कराने के लिए अस्पताल में तगड़ी साठगांठ कर ली। उन्होंने रुपये देकर अपनी मेडिकल रिपोर्ट बनवाई। उनकी सामान्य चोटें बनाने के लिए भी आरोपियों ने पैसे दिए थे।