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डेढ़ साल बाद लुधियाना से भाग आया बंधुआ मजदूर
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दातागंज (बदायूं)। कोतवाली क्षेत्र के भटौली का निसार आखिरकार लुधियाना से अपने घर आने में सफल रहा। उसे लुधियाना में बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था। उसके ही कुछ रिश्तेदार उसे बीस हजार रुपये में बंधक रख आए थे।
निसार के मुताबिक ढाई साल पहले उसका दूसरा निकाह बिहार की महिला से हुआ था। करीब डेढ़ साल पहले वह अपने साढ़ू के साथ लुधियाना काम करने गया था। वहीं साढ़ू के कुछ रिश्तेदार लुधियाना पहुंच गए। उसका साढ़ू तो वहां से चला आया लेकिन उसके रिश्तेदार वहीं रह गए। उन्होंने लुधियाना में निसार को एक कंपनी में काम दिलवाया लेकिन उन्होंने उसके साथ धोखा कर दिया। वह कंपनी मालिक से बीस हजार रुपये लेकर वहां से चले आए। उसे वहां बंधुआ मजदूर बना दिया गया। दिन रात उसे नशा देकर काम कराया जाता था। उसे केवल दिन में दस रुपये दिए और कुछ चावल दिए जाते थे। इससे वह अपना पेट भर लेता था। वहां तमाम लोग बंधुआ थे। कंपनी से झारखंड का एक मजदूर भाग गया, जिसका मोबाइल उसको मिल गया। उससे उसने अपनी पत्नी से बात की, उसे पत्र भेजा। पत्नी ने परिवार वालों को पूरी जानकारी दी। चार पांच दिन पहले उसे गेट के बाहर निकालने का मौका मिल गया, और वह किसी तरह घर आने में सफल रहा।
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निसार के मुताबिक ढाई साल पहले उसका दूसरा निकाह बिहार की महिला से हुआ था। करीब डेढ़ साल पहले वह अपने साढ़ू के साथ लुधियाना काम करने गया था। वहीं साढ़ू के कुछ रिश्तेदार लुधियाना पहुंच गए। उसका साढ़ू तो वहां से चला आया लेकिन उसके रिश्तेदार वहीं रह गए। उन्होंने लुधियाना में निसार को एक कंपनी में काम दिलवाया लेकिन उन्होंने उसके साथ धोखा कर दिया। वह कंपनी मालिक से बीस हजार रुपये लेकर वहां से चले आए। उसे वहां बंधुआ मजदूर बना दिया गया। दिन रात उसे नशा देकर काम कराया जाता था। उसे केवल दिन में दस रुपये दिए और कुछ चावल दिए जाते थे। इससे वह अपना पेट भर लेता था। वहां तमाम लोग बंधुआ थे। कंपनी से झारखंड का एक मजदूर भाग गया, जिसका मोबाइल उसको मिल गया। उससे उसने अपनी पत्नी से बात की, उसे पत्र भेजा। पत्नी ने परिवार वालों को पूरी जानकारी दी। चार पांच दिन पहले उसे गेट के बाहर निकालने का मौका मिल गया, और वह किसी तरह घर आने में सफल रहा।
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