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वोटर लिस्ट में हेराफेरी : दो बीएलओ समेत सात के खिलाफ रिपोर्ट का आदेश
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उझानी (बदायूं)। ब्लॉक के गांव नगला तैय्यदपुर और तेहरा में पंचायत चुनाव से पहले वोटर लिस्टों में हेराफेरी के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दो बीएलओ समेत सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। दोनों ग्राम पंचायतों की वोटर लिस्टों में नाबालिगों के साथ मृत हो चुके लोगों के नाम शामिल कर लिए गए थे।
तैय्यदपुर की पूर्व प्रधान ऊषा यादव ने चुनाव में हारने के बाद अधिकारियों से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की शिकायत के साथ कोर्ट की शरण ली थी। ऊषा यादव पंचायत चुनाव 2021 तक नगला तैय्यदपुर की प्रधान थीं। प्रधान रहते हुए वह चुनाव भी लड़ी थीं। उनका आरोप है कि पंचायत चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में 90 महिला-पुरुषों के नामों में हेराफेरी की गई। नाबालिग और मृत हो चुके लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट में शामिल कर लिए गए। बीएलओ रनवीर, सुपरवाइजर अनिल कुमार पर ऊषा ने विपक्षी उदयवीर और जयवीर को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था।
उन्होंने इसकी शिकायत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अफसरों से भी की थी। बीएलओ ने जो लिस्ट मुहैया कराई, उसी से हकीकत सामने आ गई। तीन सदस्यीय जांच टीम ने आरोप सही पाए थे। उस वक्त बीएलओ का वेतन रोक दिया गया था।
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दूसरा मामला तेहरा ग्राम पंचायत का है। तेहरा में ऊषा के बेटे पंकज यादव प्रधान थे। यह सीट अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित हो गई लेकिन आरक्षण तय होने से पहले वह पत्नी नीलम को चुनाव लड़ाना चाहते थे। नीलम का लोकसभा और विधानसभा की वोटर लिस्ट में नाम था लेकिन पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट से उनका नाम काट दिया गया। आरोप है कि तेहरा की बीएलओ जरीना सैफी और सुपरवाइजर निखिल जैन ने दावेदार सोमेंद्र सिंह से सांठगांठ कर वोटर लिस्ट में हेराफेरी की। दोनों ही मामलों में अलग-अलग सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सातों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। इंस्पेक्टर हरपाल सिंह बालियान ने बताया कि कोर्ट का आदेश प्राप्त हो चुका है। मामले में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
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तैय्यदपुर की पूर्व प्रधान ऊषा यादव ने चुनाव में हारने के बाद अधिकारियों से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की शिकायत के साथ कोर्ट की शरण ली थी। ऊषा यादव पंचायत चुनाव 2021 तक नगला तैय्यदपुर की प्रधान थीं। प्रधान रहते हुए वह चुनाव भी लड़ी थीं। उनका आरोप है कि पंचायत चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में 90 महिला-पुरुषों के नामों में हेराफेरी की गई। नाबालिग और मृत हो चुके लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट में शामिल कर लिए गए। बीएलओ रनवीर, सुपरवाइजर अनिल कुमार पर ऊषा ने विपक्षी उदयवीर और जयवीर को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था।
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उन्होंने इसकी शिकायत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अफसरों से भी की थी। बीएलओ ने जो लिस्ट मुहैया कराई, उसी से हकीकत सामने आ गई। तीन सदस्यीय जांच टीम ने आरोप सही पाए थे। उस वक्त बीएलओ का वेतन रोक दिया गया था।
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दूसरा मामला तेहरा ग्राम पंचायत का है। तेहरा में ऊषा के बेटे पंकज यादव प्रधान थे। यह सीट अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित हो गई लेकिन आरक्षण तय होने से पहले वह पत्नी नीलम को चुनाव लड़ाना चाहते थे। नीलम का लोकसभा और विधानसभा की वोटर लिस्ट में नाम था लेकिन पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट से उनका नाम काट दिया गया। आरोप है कि तेहरा की बीएलओ जरीना सैफी और सुपरवाइजर निखिल जैन ने दावेदार सोमेंद्र सिंह से सांठगांठ कर वोटर लिस्ट में हेराफेरी की। दोनों ही मामलों में अलग-अलग सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सातों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। इंस्पेक्टर हरपाल सिंह बालियान ने बताया कि कोर्ट का आदेश प्राप्त हो चुका है। मामले में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।