{"_id":"6262fd6e21d14f74057537ba","slug":"crime-badaun-news-bly482411747","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीबीआई ने पुलिस कर्मियों को बयान दर्ज करने के लिए लखनऊ बुलाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीबीआई ने पुलिस कर्मियों को बयान दर्ज करने के लिए लखनऊ बुलाया
विज्ञापन
बदायूं। शहर में चर्चित रहे गुप्ता दंपती हत्याकांड मामले में सीबीआई बृहस्पतिवार रात बदायूं पहुंची। सीबीआई ने उन पुलिसकर्मियों के मोबाइल नंबर जुटाए हैं जो हत्या के दौरान कोतवाली, हलका या चौकी पर तैनात थे। उनमें एक-दो पुलिसकर्मियों को कॉल कर सीबीआई ने बयान दर्ज कराने के लिए लखनऊ बुलाया है।
साल 2015 में शहर के ब्राहमपुर मोहल्ले में रिटायर्ड इंजीनियर ब्रजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता की पेचकस से गोदकर हत्या कर दी गई थी। तीन दिन बाद उनके घर में सड़े-गले शव मिले थे। शुरुआती दौर में कोतवाली पुलिस ने दोहरे हत्याकांड की जांच की थी लेकिन बाद में ये मामला सीबीआई के पास चला गया। उस समय से सीबीआई हर बिंदु पर जांच कर रही थी। करीब 63 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए थे। इसमें एक सैंपल दंपती के घर के सामने रहने वाले उदय प्रकाश वर्मा का निकला था। उदय प्रकाश वर्मा साल 2018 में फंदे से लटककर जान दे चुका था। जब सीबीआई ने उसके परिवारवालों और रिश्तेदारों से पूछताछ की तो मामले का पूरा खुलासा हो गया। सीबीआई ने उदय के भाई योगेश वर्मा को सहयोगी आरोपी मानते हुए गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
अब सीबीआई उस समय तैनात रहे पुलिसकर्मियों की लापरवाही मान रही है। तर्क है कि अगर पुलिस उस दौरान ठीक से विवेचना करती तो शायद आरोपी उसी समय पकड़े गए होते। यही जांच करने के लिए सीबीआई बृहस्पतिवार रात बदायूं पहुंची। सीबीआई ने कोतवाली पुलिस का पिछला रिकॉर्ड मांगा। उस समय कौन-कौन इंस्पेक्टर, दरोगा तैनात रहे थे। सीबीआई ने सबके मोबाइल नंबर जुटाए हैं। सभी को बयान दर्ज करने के लिए लखनऊ बुलाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
साल 2015 में शहर के ब्राहमपुर मोहल्ले में रिटायर्ड इंजीनियर ब्रजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता की पेचकस से गोदकर हत्या कर दी गई थी। तीन दिन बाद उनके घर में सड़े-गले शव मिले थे। शुरुआती दौर में कोतवाली पुलिस ने दोहरे हत्याकांड की जांच की थी लेकिन बाद में ये मामला सीबीआई के पास चला गया। उस समय से सीबीआई हर बिंदु पर जांच कर रही थी। करीब 63 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए थे। इसमें एक सैंपल दंपती के घर के सामने रहने वाले उदय प्रकाश वर्मा का निकला था। उदय प्रकाश वर्मा साल 2018 में फंदे से लटककर जान दे चुका था। जब सीबीआई ने उसके परिवारवालों और रिश्तेदारों से पूछताछ की तो मामले का पूरा खुलासा हो गया। सीबीआई ने उदय के भाई योगेश वर्मा को सहयोगी आरोपी मानते हुए गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
विज्ञापन
अब सीबीआई उस समय तैनात रहे पुलिसकर्मियों की लापरवाही मान रही है। तर्क है कि अगर पुलिस उस दौरान ठीक से विवेचना करती तो शायद आरोपी उसी समय पकड़े गए होते। यही जांच करने के लिए सीबीआई बृहस्पतिवार रात बदायूं पहुंची। सीबीआई ने कोतवाली पुलिस का पिछला रिकॉर्ड मांगा। उस समय कौन-कौन इंस्पेक्टर, दरोगा तैनात रहे थे। सीबीआई ने सबके मोबाइल नंबर जुटाए हैं। सभी को बयान दर्ज करने के लिए लखनऊ बुलाया है।
विज्ञापन