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दातागंज के पशु अस्पताल में दो गायों की मौत पर जमकर हंगामा
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से हो रही तकरार। संवाद
- फोटो : BADAUN
दातागंज (बदायूं)। नगर के पशु अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही से दो बीमार गायों की मौत हो गई। यह बात जब लोगों को पता लगी तो उनमें गुस्सा दौड़ गया। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के काफी कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। ब्लॉक प्रमुख अतेंद्र विक्रम सिंह को भी बुला लिया। ब्लॉक प्रमुख के कॉल करने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन मौके पर पहुंचे तो गुस्साए लोगों ने उनका घेराव कर नारेबाजी की। बाद में उनके कार्रवाई का आश्वासन देने पर लोग शांत हुए।
दातागंज के पशु अस्पताल में डॉ. देवव्रत तोमर, पशु प्रसार अधिकारी विकास यादव के अलावा एक चौकीदार और एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। डॉक्टर कभी कभार ही आते हैं। दो दिन पहले अस्पताल में स्थानीय लोगों ने दो घुमंतु गायों को पहुंचाया था। यह गाय बीमार थीं। आरोप है कि यहां गायों का इलाज नहीं किया गया। इस कारण दोनों की मौत हो गई। गायों के शव अस्पताल में ही छोड़कर स्टाफ के अन्य लोग चले गए। दो दिन बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल के ऊपर चील-कौवे उड़ते देखे तो वे वहां पहुंचे। यहां गायों के शव को चील-कौवे नोंच रहे थे। इससे लोगों को गुस्सा आ गया। वह हंगामा करने लगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन पहुंचे जब पहुंचे तब भी अस्पताल में ताले पड़े थे। चाबी पशु प्रसार अधिकारी विकास यादव के पास थीं। उन्होंने कॉल करके पशुधन प्रसार अधिकारी को बुलाया। इस दौरान काफी देर तक लोग मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को घेर कर नारेबाजी करते रहे। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई।
गुस्साए हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को जब डॉक्टर समेत स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा मिला तब वे शांत हुए।
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आठ दिसंबर तक छुट्टी लेकर गए थे पशु चिकित्साधिकारी
दातागंज पशु अस्पताल में तैनात डॉ. देवव्रत तोमर आठ दिसंबर तक छुट्टी लेकर गए थे। उनको नौ दिसंबर को अस्पताल पहुंचना था। इस दिन स्टाफ के अन्य लोग अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टर के न आने पर वे भी चले गए। इसके बाद दस और 11 दिसंबर को कोई अस्पताल नहीं आया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन ने यहां दूसरे डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती का भरोसा दिया है।
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पशुपालकों ने लगाया वसूली का आरोप
शनिवार को पशु अस्पताल में हंगामा होने पर कई पशुपालक भी पहुंच गए। पशु पालक अनूप कुमार ने बताया कि अस्पताल में अगर स्टाफ होता है तो यहां पशुओं के इलाज को आने पर उनसे वसूली होती है। दवाएं मेडिकल स्टोर से लिखी जाती हैं। एक ही मेडिकल स्टोर पर पशुओं की दवाएं मिलती हैं। कोई भी पशु लेकर आए उसके लिए महंगा इंजेक्शन तो जरूर लिखा जाता है। इसके अलावा तीन सौ रुपये भी लिए जाते हैं।
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दातागंज पशु अस्पताल में गोवंश की मृत्यु की सूचना पर पहुंचा था। लोगों में काफी गुस्सा था। मालूम हुआ है कि यहां के पशु चिकित्साधिकारी कई दिन से अस्पताल नहीं आ रहे। स्टाफ के अन्य लोग भी नदारद रहते हैं। चिकित्साधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जा रहा है। बाकी स्टाफ के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही यहां नए डॉक्टर की तैनाती की जाएगी।
-डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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दातागंज के पशु अस्पताल में डॉ. देवव्रत तोमर, पशु प्रसार अधिकारी विकास यादव के अलावा एक चौकीदार और एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। डॉक्टर कभी कभार ही आते हैं। दो दिन पहले अस्पताल में स्थानीय लोगों ने दो घुमंतु गायों को पहुंचाया था। यह गाय बीमार थीं। आरोप है कि यहां गायों का इलाज नहीं किया गया। इस कारण दोनों की मौत हो गई। गायों के शव अस्पताल में ही छोड़कर स्टाफ के अन्य लोग चले गए। दो दिन बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल के ऊपर चील-कौवे उड़ते देखे तो वे वहां पहुंचे। यहां गायों के शव को चील-कौवे नोंच रहे थे। इससे लोगों को गुस्सा आ गया। वह हंगामा करने लगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन पहुंचे जब पहुंचे तब भी अस्पताल में ताले पड़े थे। चाबी पशु प्रसार अधिकारी विकास यादव के पास थीं। उन्होंने कॉल करके पशुधन प्रसार अधिकारी को बुलाया। इस दौरान काफी देर तक लोग मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को घेर कर नारेबाजी करते रहे। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई।
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गुस्साए हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को जब डॉक्टर समेत स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा मिला तब वे शांत हुए।
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आठ दिसंबर तक छुट्टी लेकर गए थे पशु चिकित्साधिकारी
दातागंज पशु अस्पताल में तैनात डॉ. देवव्रत तोमर आठ दिसंबर तक छुट्टी लेकर गए थे। उनको नौ दिसंबर को अस्पताल पहुंचना था। इस दिन स्टाफ के अन्य लोग अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टर के न आने पर वे भी चले गए। इसके बाद दस और 11 दिसंबर को कोई अस्पताल नहीं आया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन ने यहां दूसरे डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती का भरोसा दिया है।
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पशुपालकों ने लगाया वसूली का आरोप
शनिवार को पशु अस्पताल में हंगामा होने पर कई पशुपालक भी पहुंच गए। पशु पालक अनूप कुमार ने बताया कि अस्पताल में अगर स्टाफ होता है तो यहां पशुओं के इलाज को आने पर उनसे वसूली होती है। दवाएं मेडिकल स्टोर से लिखी जाती हैं। एक ही मेडिकल स्टोर पर पशुओं की दवाएं मिलती हैं। कोई भी पशु लेकर आए उसके लिए महंगा इंजेक्शन तो जरूर लिखा जाता है। इसके अलावा तीन सौ रुपये भी लिए जाते हैं।
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दातागंज पशु अस्पताल में गोवंश की मृत्यु की सूचना पर पहुंचा था। लोगों में काफी गुस्सा था। मालूम हुआ है कि यहां के पशु चिकित्साधिकारी कई दिन से अस्पताल नहीं आ रहे। स्टाफ के अन्य लोग भी नदारद रहते हैं। चिकित्साधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जा रहा है। बाकी स्टाफ के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही यहां नए डॉक्टर की तैनाती की जाएगी।
-डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी