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हैंडपंप रीबोर के नाम पर घपला, बिना सत्यापन खपा रहे बजट
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बदायूं। जिले में इंडिया मार्क हैंडपंपों के रीबोर में बड़ घपला किया जा रहा है। बिना तकनीकी जांच और सत्यापन के मनमाने ढंग से ग्राम पंचायतों का बजट हैंडपंपों के रीबोर पर खर्च किया जा रहा है। नगरीय इलाकों को छोड़ दें तो जिले की 1037 ग्राम पंचायतों में 44 हजार से ज्यादा इंडिया मार्क हैंडपंप हैं। हर वर्ष इनके रीबोर पर करोड़ों रुपया खर्च कर दिया जाता है। इस बार भी ऐसा हो रहा है।
जिले में काफी संख्या में ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें प्रधान और सचिव ने उन हैंडपंपों को भी रिबोर करने का निर्णय ले लिया जो सिर्फ मरम्मत के योग्य थे। रीबोर से पहले जल निगम से तकनीकी सलाह भी नहीं ली गई। इतना ही नहीं किसी तरह का सत्यापन भी नहीं कराया जा रहा। एक हैंडपंप को रिबोर करने में करीब 40 हजार का खर्च आता है। एक अनुमान के अनुसार इस वर्ष गर्मियों के सीजन में 900 से ज्यादा हैंडपंप रीबोर कराने के नाम पर बजट खर्च किया जा चुका है। एक हैंडपंप के रीबोर पर औसतन 40 हजार का खर्च आया है। जबकि एक नया हैंडपंप लगाने पर औसतन 50 हजार रुपये का खर्च आता है। ऐसे में घोटाला की आशंकाओं को बल मिल रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि हैंडपंप को रीबोर कराने से पहले जन निगम से कोई तकनीकी सहयोग भी नहीं लिया गया। हैंडपंप रीबोर योग्य है या नहीं इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं ली गई। जन निगम को बिना कोई जानकारी दिए प्रधान और सचिवों ने हैंडपंपों को रीबोर कराने के बिल पास कर दिए। काफी
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जल निगम से लेना होता है रीबोर का प्रमाण पत्र
गांव में लगे इंडिया मार्क हैंडपंपो की मरम्मत और रीबोरिंग की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों की होती है। नियमानुसार हैंडपंप को रीबोर कराने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि उसे रीबोर कराने की जरूरत है या फिर अन्य किसी कारण से पानी नहीं आ रहा। ग्राम पंचायतों की सूचना पर जल निगम की टीम मौका मुआयना करती है और फिर इस बात का प्रमाण पत्र देती है कि हैंडपंप रीबोर के योग्य है या नहीं, लेकिन ब्लॉकों से जल निगम को इस तरह के हैंडपंपों की कोई सूची ही नहीं भेजी जा रही। रीबोर होने के बाद हैंडपंपों का सत्यापन तक नहीं कराया जा रहा है।
खास फर्मों को दिया जाता है रीबोरिंग का काम
इंडिया मार्क हैंडपंपों की रीबोरिंग का काम भी जिले में कुछ खास फर्मों को ही दिया जाता है। यह चुनिंदा फर्में हैं और इनके मालिकान का राजनीति में भी दखल रहता है। जिले के 15 ब्लॉक की 1037 ग्राम पंचायतों में यहीं फर्म हैंडपंपों की रीबोरिंग, मरम्मत के साथ नए हैंडपंप लगाने का काम भी करती हैं। ऐसे में रीबारिंग में खेल की संभावना और बढ़ जाती है।
नियमानुसार हैंडपंप को रीबोर कराने से पहले जल निगम से प्रमाण पत्र लेने की जरूरत है। ग्राम पंचायतों या फिर ब्लॉक स्तर से खराब हैंडपंपों की कोई सूची नहीं दी जाती। अपने ढंग से रीबोर करा दिया जाता है काफी संख्या में ऐसे हैंडपंप भी होते हैं, जिनको सिर्फ मरम्मत के बाद चालू किया जा सकता है, लेकिन बिना तकनीकी जानकारी के ही हैंडपंपों का रीबोर कराया जा रहा है।- रामहेत, एक्सईएन जल निगम
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जिले में काफी संख्या में ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें प्रधान और सचिव ने उन हैंडपंपों को भी रिबोर करने का निर्णय ले लिया जो सिर्फ मरम्मत के योग्य थे। रीबोर से पहले जल निगम से तकनीकी सलाह भी नहीं ली गई। इतना ही नहीं किसी तरह का सत्यापन भी नहीं कराया जा रहा। एक हैंडपंप को रिबोर करने में करीब 40 हजार का खर्च आता है। एक अनुमान के अनुसार इस वर्ष गर्मियों के सीजन में 900 से ज्यादा हैंडपंप रीबोर कराने के नाम पर बजट खर्च किया जा चुका है। एक हैंडपंप के रीबोर पर औसतन 40 हजार का खर्च आया है। जबकि एक नया हैंडपंप लगाने पर औसतन 50 हजार रुपये का खर्च आता है। ऐसे में घोटाला की आशंकाओं को बल मिल रहा है।
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गौर करने वाली बात यह है कि हैंडपंप को रीबोर कराने से पहले जन निगम से कोई तकनीकी सहयोग भी नहीं लिया गया। हैंडपंप रीबोर योग्य है या नहीं इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं ली गई। जन निगम को बिना कोई जानकारी दिए प्रधान और सचिवों ने हैंडपंपों को रीबोर कराने के बिल पास कर दिए। काफी
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जल निगम से लेना होता है रीबोर का प्रमाण पत्र
गांव में लगे इंडिया मार्क हैंडपंपो की मरम्मत और रीबोरिंग की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों की होती है। नियमानुसार हैंडपंप को रीबोर कराने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि उसे रीबोर कराने की जरूरत है या फिर अन्य किसी कारण से पानी नहीं आ रहा। ग्राम पंचायतों की सूचना पर जल निगम की टीम मौका मुआयना करती है और फिर इस बात का प्रमाण पत्र देती है कि हैंडपंप रीबोर के योग्य है या नहीं, लेकिन ब्लॉकों से जल निगम को इस तरह के हैंडपंपों की कोई सूची ही नहीं भेजी जा रही। रीबोर होने के बाद हैंडपंपों का सत्यापन तक नहीं कराया जा रहा है।
खास फर्मों को दिया जाता है रीबोरिंग का काम
इंडिया मार्क हैंडपंपों की रीबोरिंग का काम भी जिले में कुछ खास फर्मों को ही दिया जाता है। यह चुनिंदा फर्में हैं और इनके मालिकान का राजनीति में भी दखल रहता है। जिले के 15 ब्लॉक की 1037 ग्राम पंचायतों में यहीं फर्म हैंडपंपों की रीबोरिंग, मरम्मत के साथ नए हैंडपंप लगाने का काम भी करती हैं। ऐसे में रीबारिंग में खेल की संभावना और बढ़ जाती है।
नियमानुसार हैंडपंप को रीबोर कराने से पहले जल निगम से प्रमाण पत्र लेने की जरूरत है। ग्राम पंचायतों या फिर ब्लॉक स्तर से खराब हैंडपंपों की कोई सूची नहीं दी जाती। अपने ढंग से रीबोर करा दिया जाता है काफी संख्या में ऐसे हैंडपंप भी होते हैं, जिनको सिर्फ मरम्मत के बाद चालू किया जा सकता है, लेकिन बिना तकनीकी जानकारी के ही हैंडपंपों का रीबोर कराया जा रहा है।- रामहेत, एक्सईएन जल निगम