{"_id":"5d7653da8ebc3e93c02af7a0","slug":"crime-badaun-news-bly3754847168","type":"story","status":"publish","title_hn":"खाताधारकों ने प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया के मैनेजर को दबोचकर पुलिस को सौंपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खाताधारकों ने प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया के मैनेजर को दबोचकर पुलिस को सौंपा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। धोखाधड़ी के आरोप में प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आरडी का समय पूरा होने के बाद भी उनका भुगतान नहीं होने से गुस्साए कई खाताधारक सोमवार को कंपनी के बदरपुर स्थित कार्यालय पर पहुंच गए और उन्होंने कार्यालय के गेट पर डेरा डाल दिया। इसकी भनक लगते ही कंपनी के मैनेजर ने खाताधारक युवकों से फोन पर बात की। इसके बाद वह कार्यालय पर पहुंचा तो वार्ता के दौरान हंगामा हो गया। निजी वाहन को लेकर भागने की कोशिश करते हुए मैनेजर को खाताधारकों ने दबोचकर सिविल लाइंस थाना पुलिस के हवाले कर दिया है।
प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया के मैनेजर की तलाश में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में कंपनी के बदरपुर कार्यालय पर इलाके के कई खाताधारक पहुंच गए। कंपनी के गेट पर ताला लटका मिला तो उन्होंने गेट पर डेरा डाल दिया। इनमें दो खाताधारकों ने सहसवान क्षेत्र निवासी कंपनी के मैनेजर से फोन पर बात की। मैनेजर इसके बाद अपनी निजी कार से कार्यालय पहुंच गया। खाताधारकों और मैनेजर के बीच करीब एक घंटा तक वार्ता हुई। मैनेजर ने उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं दिया तो खाताधारक भुगतान कराने की जिद पर अड़ गए। काफी देर तक हंगामे का माहौल रहा। खाताधारकों का गुस्सा देखकर मैनेजर ने खिसकने का प्रयास किया और अपनी कार में जा बैठा, लेकिन खाताधारकों ने कार को घेर लिया। उन्होंने कार को आगे नहीं बढ़ने दिया। खाताधारकों में गौरव, पप्पू और मदनलाल ने बताया कि उन्होंने मैनेजर को सिविल लाइंस थाना पुलिस के हवाले कर दिया है। सिविल लाइंस में आरोपी मैनेजर से पूछताछ भी की गई है। धोखाधड़ी के शिकार युवकों ने पुलिस के सामने अपना पक्ष रख दिया है। उधर, इसे लेकर कंपनी कार्यालय पर काफी देर तक अफरातफरी का माहौल भी बना रहा।
कंपनी की भूमिका पर ऐसे उठे थे सवाल
बदायूं। चार दिन पहले उझानी क्षेत्र के गांव बसोमा निवासी कई लोगों ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत की थी कि प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया में उन्होंने प्रति महीना एक हजार रुपया के हिसाब से छह साल तक इंवेस्ट किया था। आरडी पूरी होने के बाद उन्हें प्रति खाताधारक 1.14 लाख रुपया मिलना चाहिए था लेकिन कंपनी की ओर से भुगतान शुरू नहीं किया गया है। खाताधारक जब भी कंपनी के कार्यालय पर पहुंचते हैं तो वहां ताला लटका मिलता है। उन्होंने कंपनी के खाताधारकों की संख्या एक हजार से अधिक बताई थी।
विज्ञापन
उझानी पुलिस कर रही है धोखाधड़ी के आरोपों की जांच
बदायूं। खाताधारकों की शिकायत के बाद एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने उझानी कोतवाली पुलिस को जांच का जिम्मा सौंप दिया था। रविवार को उझानी कोतवाली के दरोगा जितेंद्र सक्सेना ने गांव बसोमा पहुंचकर कंपनी से जुड़े एक अभिकर्ता समेत शिकायत करने वाले खाताधारकों से भी बात की थी। जांच हालांकि अभी चल रही है लेकिन सोमवार को कंपनी के मैनेजर को हिरासत में लिए जाने के बाद वे खाताधारक भी खुलकर सामने आ गए हैं जिन्हें अभी तक धोखाधड़ी के बारे में भनक नहीं लग पाई थी।
-
प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया के खिलाफ शिकायत लेकर कुछ लोग आए थे। उन्होंने मामले के बारे में बताया है। अभी उन्होंने तहरीर नहीं दी है। तहरीर लेकर आ रहे हैं। तभी इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
ओपी गौतम, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस
विज्ञापन
प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया के मैनेजर की तलाश में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में कंपनी के बदरपुर कार्यालय पर इलाके के कई खाताधारक पहुंच गए। कंपनी के गेट पर ताला लटका मिला तो उन्होंने गेट पर डेरा डाल दिया। इनमें दो खाताधारकों ने सहसवान क्षेत्र निवासी कंपनी के मैनेजर से फोन पर बात की। मैनेजर इसके बाद अपनी निजी कार से कार्यालय पहुंच गया। खाताधारकों और मैनेजर के बीच करीब एक घंटा तक वार्ता हुई। मैनेजर ने उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं दिया तो खाताधारक भुगतान कराने की जिद पर अड़ गए। काफी देर तक हंगामे का माहौल रहा। खाताधारकों का गुस्सा देखकर मैनेजर ने खिसकने का प्रयास किया और अपनी कार में जा बैठा, लेकिन खाताधारकों ने कार को घेर लिया। उन्होंने कार को आगे नहीं बढ़ने दिया। खाताधारकों में गौरव, पप्पू और मदनलाल ने बताया कि उन्होंने मैनेजर को सिविल लाइंस थाना पुलिस के हवाले कर दिया है। सिविल लाइंस में आरोपी मैनेजर से पूछताछ भी की गई है। धोखाधड़ी के शिकार युवकों ने पुलिस के सामने अपना पक्ष रख दिया है। उधर, इसे लेकर कंपनी कार्यालय पर काफी देर तक अफरातफरी का माहौल भी बना रहा।
विज्ञापन
कंपनी की भूमिका पर ऐसे उठे थे सवाल
बदायूं। चार दिन पहले उझानी क्षेत्र के गांव बसोमा निवासी कई लोगों ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत की थी कि प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया में उन्होंने प्रति महीना एक हजार रुपया के हिसाब से छह साल तक इंवेस्ट किया था। आरडी पूरी होने के बाद उन्हें प्रति खाताधारक 1.14 लाख रुपया मिलना चाहिए था लेकिन कंपनी की ओर से भुगतान शुरू नहीं किया गया है। खाताधारक जब भी कंपनी के कार्यालय पर पहुंचते हैं तो वहां ताला लटका मिलता है। उन्होंने कंपनी के खाताधारकों की संख्या एक हजार से अधिक बताई थी।
विज्ञापन
उझानी पुलिस कर रही है धोखाधड़ी के आरोपों की जांच
बदायूं। खाताधारकों की शिकायत के बाद एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने उझानी कोतवाली पुलिस को जांच का जिम्मा सौंप दिया था। रविवार को उझानी कोतवाली के दरोगा जितेंद्र सक्सेना ने गांव बसोमा पहुंचकर कंपनी से जुड़े एक अभिकर्ता समेत शिकायत करने वाले खाताधारकों से भी बात की थी। जांच हालांकि अभी चल रही है लेकिन सोमवार को कंपनी के मैनेजर को हिरासत में लिए जाने के बाद वे खाताधारक भी खुलकर सामने आ गए हैं जिन्हें अभी तक धोखाधड़ी के बारे में भनक नहीं लग पाई थी।
-
प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया के खिलाफ शिकायत लेकर कुछ लोग आए थे। उन्होंने मामले के बारे में बताया है। अभी उन्होंने तहरीर नहीं दी है। तहरीर लेकर आ रहे हैं। तभी इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
ओपी गौतम, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस