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सिर पर हवन की आग भरी मटकी फटी, चार झुलसे
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बदायूं। वैज्ञानिक युग में भी अंधविश्वास खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव ढेल में ऐसी ही एक परंपरा के चलते चार लोगों की जान पर बन आई। शनिवार आधी रात में ग्राम देवता मंदिर पर मुर्गे की बलि और हवन के बाद उसकी आग को मटकी में रखकर जुलूस निकाला जा रहा था। ऐसे में एक ग्रामीण के सिर पर रखी मटकी फट गई, जिसमें चार लोग झुलस गए। इनमें एक को दिल्ली, दूसरे को जिला अस्पताल और तीसरे को चंदौसी ले जाया गया। चौथे की हालत ठीक है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
ढेल गांव में मान्यता है कि खप्पड़ (हवन की आग वाली राख भरी मटकी) के साथ रात में जुलूस निकालने से उसके धुएं से सभी तरह की बीमारियां और शोक दूर हो जाते हैं। इन दिनों लोग कोरोना से भी सहमे हुए हैं। ऐसे में शनिवार रात दस बजे जुलूस निकाला गया। ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम ढेल के काफी संख्या में लोग ग्राम देवता मंदिर पहुंचे। उसके बाद ओझा ने दो लोगों को जल और सरसों लेकर गांव में बिखेरने भेजा तो पूजा पाठ करने के बाद मुर्गे की बलि दी और हवन किया। रात 12 बजे एक मटकी लाई गई। उसमें हवन की आग के अलावा गोला, गंधक, पोटाश, सामग्री, घी, तेल आदि डाला गया। गांव का राकेश अपने सिर पर मटकी लेकर चला। बाकी लोग उनके पीछे जयकारे लगाते चल रहे थे। गांव के अंदर जाकर मीहलाल ने राकेश से मटकी ले ली। वह कुछ दूर ही चले थे कि तेज धमाके से मटकी (खप्पड़) फट गई। इससे मटकी में भरी हवन की आग और राख चारों ओर फैल गई।
इससे मीहलाल (55), शिशुपाल (35), उदयवीर (45) और अनिल (24) गंभीर रूप से झुलस गए। लोगों ने जैसे-तैसे आग बुझाई। परिवार वाले उदयवीर को अलीगढ़ ले गए, जहां से उन्हें दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल रेफर कर दिया गया। इधर, शिशुपाल और मीहलाल को जिला अस्पताल लाया गया। शिशुपाल को चंदौसी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अनिल का गांव में ही इलाज चल रहा है।
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जरीफनगर थाना क्षेत्र के ढेल गांव की यह घटना शनिवार रात एक बजे की है। जैसे ही सूचना मिली पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। जो लोग झुलसे हैं। उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जांच कराई जा रही है। उसके बाद मामले में कार्रवाई कराई जाएगी। -सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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डीजल डालने से फटी थी मटकी
दहगवां (बदायूं)। जरीफनगर क्षेत्र के ढेल गांव में मटकी फटने का हादसा डीजल डालने से हुआ। बताते हैं कि ग्रामीण मटकी (खप्पड़) लेकर बीच गांव में पहुंचे तो उसमें से धुआं निकलना कम हो गया। ये देखकर एक ग्रामीण डीजल ले आया और उसने उसे मटकी में उड़ेल दिया। इससे मटकी तेज धमाके के साथ फट गई और चार लोग झुलस गए।
ग्रामीणों के मुताबिक मटकी में हवन पूजन के बाद उसकी राख (आग), गोला, सामग्री, घी, तेल के अलावा गंधक पोटाश भी डाला गया था, कोशिश थी कि धुंआ अधिक निकले और हर घर तक पहुंचे, जिससे बीमारियां और शोक हर घर दूर हो जाएं। यही वजह रही कि मटकी जिस घर से होकर गुजारी जा रही थी, उन घरों के लोग उसमें तेल या घी डाल रहे थे। जब मटकी बीच गांव में पहुंची तब तक उससे धुआं निकलना कम हो गया। इस पर एक व्यक्ति अपने वाहन से डीजल निकालकर ले आया और उसने मटकी में उड़ेल दिया। बताते हैं कि इससे मटकी की आग भभक गई और वह फट गई। मीहलाल मटकी सिर पर रखे थे। शिशुपाल, उदयवीर और अनिल उसके आसपास चल रहे थे। ऐसे में यह लोग ज्यादा चपेट में आ गए और झुलस गए। संवाद
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ढेल गांव में मान्यता है कि खप्पड़ (हवन की आग वाली राख भरी मटकी) के साथ रात में जुलूस निकालने से उसके धुएं से सभी तरह की बीमारियां और शोक दूर हो जाते हैं। इन दिनों लोग कोरोना से भी सहमे हुए हैं। ऐसे में शनिवार रात दस बजे जुलूस निकाला गया। ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम ढेल के काफी संख्या में लोग ग्राम देवता मंदिर पहुंचे। उसके बाद ओझा ने दो लोगों को जल और सरसों लेकर गांव में बिखेरने भेजा तो पूजा पाठ करने के बाद मुर्गे की बलि दी और हवन किया। रात 12 बजे एक मटकी लाई गई। उसमें हवन की आग के अलावा गोला, गंधक, पोटाश, सामग्री, घी, तेल आदि डाला गया। गांव का राकेश अपने सिर पर मटकी लेकर चला। बाकी लोग उनके पीछे जयकारे लगाते चल रहे थे। गांव के अंदर जाकर मीहलाल ने राकेश से मटकी ले ली। वह कुछ दूर ही चले थे कि तेज धमाके से मटकी (खप्पड़) फट गई। इससे मटकी में भरी हवन की आग और राख चारों ओर फैल गई।
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इससे मीहलाल (55), शिशुपाल (35), उदयवीर (45) और अनिल (24) गंभीर रूप से झुलस गए। लोगों ने जैसे-तैसे आग बुझाई। परिवार वाले उदयवीर को अलीगढ़ ले गए, जहां से उन्हें दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल रेफर कर दिया गया। इधर, शिशुपाल और मीहलाल को जिला अस्पताल लाया गया। शिशुपाल को चंदौसी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अनिल का गांव में ही इलाज चल रहा है।
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जरीफनगर थाना क्षेत्र के ढेल गांव की यह घटना शनिवार रात एक बजे की है। जैसे ही सूचना मिली पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। जो लोग झुलसे हैं। उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जांच कराई जा रही है। उसके बाद मामले में कार्रवाई कराई जाएगी। -सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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डीजल डालने से फटी थी मटकी
दहगवां (बदायूं)। जरीफनगर क्षेत्र के ढेल गांव में मटकी फटने का हादसा डीजल डालने से हुआ। बताते हैं कि ग्रामीण मटकी (खप्पड़) लेकर बीच गांव में पहुंचे तो उसमें से धुआं निकलना कम हो गया। ये देखकर एक ग्रामीण डीजल ले आया और उसने उसे मटकी में उड़ेल दिया। इससे मटकी तेज धमाके के साथ फट गई और चार लोग झुलस गए।
ग्रामीणों के मुताबिक मटकी में हवन पूजन के बाद उसकी राख (आग), गोला, सामग्री, घी, तेल के अलावा गंधक पोटाश भी डाला गया था, कोशिश थी कि धुंआ अधिक निकले और हर घर तक पहुंचे, जिससे बीमारियां और शोक हर घर दूर हो जाएं। यही वजह रही कि मटकी जिस घर से होकर गुजारी जा रही थी, उन घरों के लोग उसमें तेल या घी डाल रहे थे। जब मटकी बीच गांव में पहुंची तब तक उससे धुआं निकलना कम हो गया। इस पर एक व्यक्ति अपने वाहन से डीजल निकालकर ले आया और उसने मटकी में उड़ेल दिया। बताते हैं कि इससे मटकी की आग भभक गई और वह फट गई। मीहलाल मटकी सिर पर रखे थे। शिशुपाल, उदयवीर और अनिल उसके आसपास चल रहे थे। ऐसे में यह लोग ज्यादा चपेट में आ गए और झुलस गए। संवाद