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उझानी मंडी में मिले एक ही नंबर के दो ट्रक, हेल्परों से पूछताछ शुरू
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उझानी (बदायूं)। फाइनेंस कंपनी में बंधक वाहनों से बकाया वसूली में जुटे एक प्राइवेट कंपनी के कर्मी एक ही नंबर के दो ट्रक देख सकते में पड़ गए। दोनों ट्रक मंडी समिति में गल्ला लोड करने के लिए पहुंचे थे। गोलमाल की आशंका के बाद पुलिस को भी मौके पर बुला लिया गया लेकिन पुलिस को देख दोनों ट्रकों के चालक वहां से खिसक गए। पुलिस ने दोनों ट्रक को कब्जे में लेकर उनके हेल्परों से पूछताछ की तो दोनों का एक ही मालिक बताया गया। वह संभल जिले में बबराला का निवासी है।
एक नंबर के दो ट्रकों के पकड़े जाने का मामला रविवार दोपहर का है। कृषि उत्पादन मंडी समिति में हिंदी में लिखी नंबर प्लेट लगा ट्रक यूपी 38 टी- 3362 पहुंचा। प्राइवेट कंपनी से जुड़े रिकवरी कर्मी बकाया को लेकर ट्रक के चालक से बात करने लगे, उसी दौरान दूसरी छोर पर खड़े अंग्रेजी में लिखी नंबर प्लेट लगे ट्रक पर निगाह पड़ी तो उसका नंबर भी यही था। एक नंबर के दो ट्रकों की भनक मंडी कर्मियों को लगी तो किसी ने कोतवाली फोन कर पुलिस को बुला लिया। पुलिस कर्मियों के पहुंचने से पहले ही दोनों ट्रक के चालक अपने हेल्परों को कागज थमा कर वहां से भाग लिए। बाद में पुलिस कर्मियों ने दोनों ट्रक को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने दोनों के हेल्परों से भी बात की। हेल्परों ने दोनों ट्रक एक ही मालिक के बताए हैं। वह संभल जिले में बबराला कसबे का है। इधर, प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर ने बताया कि शुरूआत जांच में सामने आया कि दोनों में से एक ट्रक पर फाइनेंस कंपनी का बकाया है। रिकवरी से बचने के लिए मालिक ने ही इस ट्रक पर अपने ही दूसरे ट्रक का नंबर लिखवा लिया है। पुलिस ने पूरे मामले से एआरटीओ को भी अवगत करा दिया है।
कहीं मंडी शुल्क चोरी तो नहीं कराता है ट्रक मालिक
उझानी। यहां मंडी समिति में दोपहर में एक ही नंबर के जो ट्रक पहुंचे, उनमें से एक ने सुबह में बिल्सी में माल अनलोड किया था तो दूसरा उझानी में अनलोड हुआ। दोनों के लिए उझानी मंडी से ही लोड होना था। यह बात पुलिस हिरासत में मौजूद हेल्परों ने भी बताई है। काफी हद तक यह भी साफ समझिए कि अगर दोनों में अनाज लोड होकर मंडी गेट से बाहर निकलता तो ट्रकों को एक ही नंबर का गेटपास मिलता। अनाज भले कोई होता लेकिन ट्रक नंबर तो एक ही रहते। ऐसा भी हो सकता है कि एक ही नंबर के दोनों ट्रक से लोड होकर अनाज बाहर जाता तो मंडी शुल्क के रूप में फायदा व्यापारी को ही होगा। इसमें ट्रक मालिक के शामिल होने से भी फिलहाल इंकार नहीं किया जा सकता।
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एक नंबर के दो ट्रकों के पकड़े जाने का मामला रविवार दोपहर का है। कृषि उत्पादन मंडी समिति में हिंदी में लिखी नंबर प्लेट लगा ट्रक यूपी 38 टी- 3362 पहुंचा। प्राइवेट कंपनी से जुड़े रिकवरी कर्मी बकाया को लेकर ट्रक के चालक से बात करने लगे, उसी दौरान दूसरी छोर पर खड़े अंग्रेजी में लिखी नंबर प्लेट लगे ट्रक पर निगाह पड़ी तो उसका नंबर भी यही था। एक नंबर के दो ट्रकों की भनक मंडी कर्मियों को लगी तो किसी ने कोतवाली फोन कर पुलिस को बुला लिया। पुलिस कर्मियों के पहुंचने से पहले ही दोनों ट्रक के चालक अपने हेल्परों को कागज थमा कर वहां से भाग लिए। बाद में पुलिस कर्मियों ने दोनों ट्रक को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने दोनों के हेल्परों से भी बात की। हेल्परों ने दोनों ट्रक एक ही मालिक के बताए हैं। वह संभल जिले में बबराला कसबे का है। इधर, प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर ने बताया कि शुरूआत जांच में सामने आया कि दोनों में से एक ट्रक पर फाइनेंस कंपनी का बकाया है। रिकवरी से बचने के लिए मालिक ने ही इस ट्रक पर अपने ही दूसरे ट्रक का नंबर लिखवा लिया है। पुलिस ने पूरे मामले से एआरटीओ को भी अवगत करा दिया है।
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कहीं मंडी शुल्क चोरी तो नहीं कराता है ट्रक मालिक
उझानी। यहां मंडी समिति में दोपहर में एक ही नंबर के जो ट्रक पहुंचे, उनमें से एक ने सुबह में बिल्सी में माल अनलोड किया था तो दूसरा उझानी में अनलोड हुआ। दोनों के लिए उझानी मंडी से ही लोड होना था। यह बात पुलिस हिरासत में मौजूद हेल्परों ने भी बताई है। काफी हद तक यह भी साफ समझिए कि अगर दोनों में अनाज लोड होकर मंडी गेट से बाहर निकलता तो ट्रकों को एक ही नंबर का गेटपास मिलता। अनाज भले कोई होता लेकिन ट्रक नंबर तो एक ही रहते। ऐसा भी हो सकता है कि एक ही नंबर के दोनों ट्रक से लोड होकर अनाज बाहर जाता तो मंडी शुल्क के रूप में फायदा व्यापारी को ही होगा। इसमें ट्रक मालिक के शामिल होने से भी फिलहाल इंकार नहीं किया जा सकता।
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