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हत्या में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास
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बदायूं। मेड़ के विवाद में हुई हत्या के मामले में जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने एक व्यक्ति को मुजरिम करार देते हुये उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही मुजरिम पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। दोषी के पिता को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
हत्या की वारदात थाना फैजगंज बेहटा के गांव मोहकमपुर में 22 अक्तूबर 2014 को हुई थी। गांव निवासी अजय पाल पुत्र रामदास ने घटना वाले दिन रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह साढ़े आठ बजे के करीब उसको गांव के हेमेश पुत्र श्रीपाल, श्रीपाल पुत्र मंगली सिंह, वीरपाल पुत्र गोवर्धन यादव और विजयवीर उर्फ चौबे पुत्र भूप सिंह ने मेड़ के विवाद की रंजिश को लेकर घेर लिया। उसको गांव वालों ने बमुश्किल बचाया। इसके बाद चारों आरोपी उसके घर में घुस गए और उसके भाई किशन पाल उर्फ भूरे को घेरकर उन पर फायर किए। किशनपाल अपनी जान बचाकर छत की तरफ भागा लेकिन हेमेश ने उसको गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया। अजय पाल ने हेमेश, श्रीपाल, वीरपाल और विजयवीर उर्फ चौबे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद हेमेश, श्रीपाल और वीरपाल के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। वीरपाल की पत्रावली अलग होने के कारण हेमेश और श्रीपाल की पत्रावली पर सुनवाई हुई। जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौड़ और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद हेमेश को किशनपाल की हत्या में दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई, साथ ही उस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला, जबकि श्रीपाल को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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हत्या की वारदात थाना फैजगंज बेहटा के गांव मोहकमपुर में 22 अक्तूबर 2014 को हुई थी। गांव निवासी अजय पाल पुत्र रामदास ने घटना वाले दिन रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह साढ़े आठ बजे के करीब उसको गांव के हेमेश पुत्र श्रीपाल, श्रीपाल पुत्र मंगली सिंह, वीरपाल पुत्र गोवर्धन यादव और विजयवीर उर्फ चौबे पुत्र भूप सिंह ने मेड़ के विवाद की रंजिश को लेकर घेर लिया। उसको गांव वालों ने बमुश्किल बचाया। इसके बाद चारों आरोपी उसके घर में घुस गए और उसके भाई किशन पाल उर्फ भूरे को घेरकर उन पर फायर किए। किशनपाल अपनी जान बचाकर छत की तरफ भागा लेकिन हेमेश ने उसको गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया। अजय पाल ने हेमेश, श्रीपाल, वीरपाल और विजयवीर उर्फ चौबे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद हेमेश, श्रीपाल और वीरपाल के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। वीरपाल की पत्रावली अलग होने के कारण हेमेश और श्रीपाल की पत्रावली पर सुनवाई हुई। जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौड़ और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद हेमेश को किशनपाल की हत्या में दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई, साथ ही उस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला, जबकि श्रीपाल को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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