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पांच साल के बालक को अगवा कर हत्या करने के आरोपी बी-फार्मा के छात्र को उम्रकैद
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बदायूं। अपनी फीस अदा करने के लिए पड़ोस के ही पांच साल के मासूम को अगवा कर उसकी हत्या करने वाले बी-फार्मा के छात्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। छात्र ने पांच लाख लाख की फिरौती के लिए यह सब कुछ किया था।
यह जघन्य वारदात बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव दौलतपुर में 28 सितंबर 2014 को घटी थी। गांव निवासी कौशलेंद्र सिंह ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उनका पांच साल का बेटा हिमांशु घर के बाहर खेल रहा था, तभी रहस्यमय तरीके से अचानक वह लापता हो गया। काफी तलाशने के बाद भी उसका कहीं पता नहीं चला। चार अक्टूबर को गुमशुदगी दर्ज कराई गई। कई दिनों बाद उनके बड़े भाई और दो अन्य लोगों के घर बच्चे को छुड़ाने के लिए पांच लाख की फिरौती के पत्र आए। तब हिमांशु के पिता कौशलेंद्र सिंह ने गांव के कई लोगों को इकट्ठा कर पत्र के लेख को मिलाया तो वह पड़ोसी सचिन पुत्र चरन सिंह का निकला। इसका पता चलते ही सचिन गांव से भाग निकला। पुलिस ने उसे 18 अक्टूबर को दबतरा स्टेशन से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसकी शिनाख्त पर बच्चे का शव गांव के खेत में बरामद किया गया। बच्चे के कपड़े सचिन के घर से बरामद हुए। स्पेशल जज राजकुमार सिंह ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुनेंद्र कुमार और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सचिन को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हत्यारोपी पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
सचिन को हिमांशु कहता था ‘भैया’.....उसी ने ले ली जान
बदायूं। मासूम हिमांशु के मन में कभी ऐसी बात शायद नहीं आई होगी कि जिसे वह भैया कहकर पुकारता है, वही उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा, लेकिन छात्र सचिन ने कुछ ऐसा ही किया।
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गांव दौलतपुर निवासी चरन सिंह के तीन पुत्रों में सचिन दूसरे नंबर का था। वह मुरादाबाद से बी-फार्मा कर रहा था। घटना से कई साल पहले सचिन के बाबा की हत्या हुई थी। जिसमें सचिन के परिवार वालों को शक था कि उस घटना में कौशलेंद्र के परिजनों का हाथ हो सकता है। सो उसी को लेकर वह अंदरखाना रंजिश भी मानता था। सचिन के बाकी दो भाई और पिता कहीं दूसरे स्थान पर मजदूरी करते थे। वह अकेला ही गांव में रहता था। फीस और अपना खर्चा करने के लिए उसने भैया कहकर पुकारने वाले पांच साल के मासूम हिमांशु को अगवा कर लिया। कहीं वह पकड़ में न आ जाए इसके लिए उनसे हिमांशु की घटना के रोज ही हत्या कर दी। उसने पुलिस पूछताछ में भी इस बात का खुलासा किया था कि फीस अदा करने के लिए ही उसने हिमांशु को अगवा किया था। उसने बताया था कि अगवा करने के बाद हिमांशु को उसने घर में चारपाई से बांधकर मुंह कपड़े से बांध दिया था। घर का दरवाजा बंद करके वह बाहर चला गया था। शाम को जब वह घर लौटा तो देखा कि हिमांशु अचेत है, तब उसने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। कपड़ों को बालू के ढेर में छिपा दिया था, जबकि लाश को पन्नी में लपेटकर कट्टे में ले गया था। बाद में उसे जंगल में झाड़ियों में छिपा दिया और खुद ही पीड़ित परिजनों को धोखा देते हुए 20 दिन तक तलाश करता रहा।
बेटे के हत्यारे को मिलनी चाहिए थी फांसी की सजा-
हिमांशु के पिता कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि उम्रकैद की सजा से वह संतुष्ट नहीं हैं। जिस तरह से मुजरिम ने उनके बेटे की जघन्य तरीके से हत्या की है। उसकी उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। बोले-वह फांसी की सजा दिलाने को हाईकोर्ट तक जाएंगे। तभी पूरे परिवार को राहत मिलेगी।
बेटे को याद करके अक्सर आंखें भर आतीं हैं मां की
अपने पांच साल से मासूम बेटे हिमांशु की नृशंस हत्या से मां गीता आज भी सिहर उठतीं हैं। अक्सर जब भी उनके बेटे के बारे में कोई बात करने लगता है तो उनकी आंखें छलकने लगतीं हैं। गीता भी फांसी की सजा की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि उसे फांसी ही मिलनी चाहिए ताकि समाज में कोई और अपराधी इस तरह की वारदात को अंजाम देने से पहले सोचे।
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यह जघन्य वारदात बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव दौलतपुर में 28 सितंबर 2014 को घटी थी। गांव निवासी कौशलेंद्र सिंह ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उनका पांच साल का बेटा हिमांशु घर के बाहर खेल रहा था, तभी रहस्यमय तरीके से अचानक वह लापता हो गया। काफी तलाशने के बाद भी उसका कहीं पता नहीं चला। चार अक्टूबर को गुमशुदगी दर्ज कराई गई। कई दिनों बाद उनके बड़े भाई और दो अन्य लोगों के घर बच्चे को छुड़ाने के लिए पांच लाख की फिरौती के पत्र आए। तब हिमांशु के पिता कौशलेंद्र सिंह ने गांव के कई लोगों को इकट्ठा कर पत्र के लेख को मिलाया तो वह पड़ोसी सचिन पुत्र चरन सिंह का निकला। इसका पता चलते ही सचिन गांव से भाग निकला। पुलिस ने उसे 18 अक्टूबर को दबतरा स्टेशन से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसकी शिनाख्त पर बच्चे का शव गांव के खेत में बरामद किया गया। बच्चे के कपड़े सचिन के घर से बरामद हुए। स्पेशल जज राजकुमार सिंह ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुनेंद्र कुमार और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सचिन को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हत्यारोपी पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
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सचिन को हिमांशु कहता था ‘भैया’.....उसी ने ले ली जान
बदायूं। मासूम हिमांशु के मन में कभी ऐसी बात शायद नहीं आई होगी कि जिसे वह भैया कहकर पुकारता है, वही उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा, लेकिन छात्र सचिन ने कुछ ऐसा ही किया।
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गांव दौलतपुर निवासी चरन सिंह के तीन पुत्रों में सचिन दूसरे नंबर का था। वह मुरादाबाद से बी-फार्मा कर रहा था। घटना से कई साल पहले सचिन के बाबा की हत्या हुई थी। जिसमें सचिन के परिवार वालों को शक था कि उस घटना में कौशलेंद्र के परिजनों का हाथ हो सकता है। सो उसी को लेकर वह अंदरखाना रंजिश भी मानता था। सचिन के बाकी दो भाई और पिता कहीं दूसरे स्थान पर मजदूरी करते थे। वह अकेला ही गांव में रहता था। फीस और अपना खर्चा करने के लिए उसने भैया कहकर पुकारने वाले पांच साल के मासूम हिमांशु को अगवा कर लिया। कहीं वह पकड़ में न आ जाए इसके लिए उनसे हिमांशु की घटना के रोज ही हत्या कर दी। उसने पुलिस पूछताछ में भी इस बात का खुलासा किया था कि फीस अदा करने के लिए ही उसने हिमांशु को अगवा किया था। उसने बताया था कि अगवा करने के बाद हिमांशु को उसने घर में चारपाई से बांधकर मुंह कपड़े से बांध दिया था। घर का दरवाजा बंद करके वह बाहर चला गया था। शाम को जब वह घर लौटा तो देखा कि हिमांशु अचेत है, तब उसने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। कपड़ों को बालू के ढेर में छिपा दिया था, जबकि लाश को पन्नी में लपेटकर कट्टे में ले गया था। बाद में उसे जंगल में झाड़ियों में छिपा दिया और खुद ही पीड़ित परिजनों को धोखा देते हुए 20 दिन तक तलाश करता रहा।
बेटे के हत्यारे को मिलनी चाहिए थी फांसी की सजा-
हिमांशु के पिता कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि उम्रकैद की सजा से वह संतुष्ट नहीं हैं। जिस तरह से मुजरिम ने उनके बेटे की जघन्य तरीके से हत्या की है। उसकी उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। बोले-वह फांसी की सजा दिलाने को हाईकोर्ट तक जाएंगे। तभी पूरे परिवार को राहत मिलेगी।
बेटे को याद करके अक्सर आंखें भर आतीं हैं मां की
अपने पांच साल से मासूम बेटे हिमांशु की नृशंस हत्या से मां गीता आज भी सिहर उठतीं हैं। अक्सर जब भी उनके बेटे के बारे में कोई बात करने लगता है तो उनकी आंखें छलकने लगतीं हैं। गीता भी फांसी की सजा की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि उसे फांसी ही मिलनी चाहिए ताकि समाज में कोई और अपराधी इस तरह की वारदात को अंजाम देने से पहले सोचे।