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कई कारोबार हो गए चौपट, राहत पैकेज से बढ़ीं उम्मीदें

Thu, 14 May 2020 10:22 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 10:22 PM IST
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corona effect
बदायूं। विश्व भर में कोरोना लोगों की जान लेने के साथ कारोबारों को लील रहा है। जिले में छोटा हो या बड़ा व्यापारी या फिर कोई भी वर्ग हो, सभी इससे प्रभावित हुए हैं। किसी न किसी रूप में आर्थिक व्यवस्था को लड़खड़ा दिया है। आर्थिक स्तर पर इतनी गिरावट पहले कभी नहीं आई। इससे उबरने में कितना वक्त लगेगा, ये तो कहा नहीं जा सकता, लेकिन यह तय है कि समय बहुत लंबा होगा। कारोबारी और व्यापारी का कहना है कि कुछ कारोबार तो शायद बिल्कुल ही खत्म हो जाए।
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जिले की बात करें तो यहां पर बड़े कारोबारों के नाम पर कुछ भी नहीं है। उद्योग धंधों के नाम पर जिले में कोई बड़ी यूूनिट भी नहीं है। जिले में पौराणिक स्थल तो कई हैं लेकिन पर्यटन की दृष्टि से कभी जिला आगे नहीं बढ़ सका। यही वजह रही कि होटल कारोबार समेत अन्य कारोबार कभी आगे नहीं बढ़ सके। इनका कारोबार जैसे तैसे चल रहा था लेकिन कोरोना की मार ने यह भी चौपट कर दिया है। आंकड़ों की बात करें तो कुल मिलाकर यह पांच सौ करोड़ के ऊपर ही निकल जाएगा।
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राज्यमंत्री चिंतित, बोले- संकट से निकलने को मिलकर करेंगे प्रयास
प्रदेश सरकार में नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता भी मौजूदा हालातों के बारे में चिंतित हैं लेकिन मिलकर प्रयास करने की बात कहते हैं। कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश की चिंता कर रहे हैं। चाहें वह निम्न वर्ग हो या मध्यम वर्ग या फिर मजदूर, व्यापारी, किसान आदि सबकी चिंता उन्हें है। प्रदेश सरकार भी लगातार इस ओर काम कर रही है। बोले- मौजूदा हालात तो कठिन हैं लेकिन इनसे निकलना भी है। राहत पैकेज मेें वित्तमंत्री ने जो भी घोषणाएं की हैं उनका लाभ राज्य में भी लोगों को दिलाया जाएगा। यदि कोई परेशान है तो उसकी परेशानी दूर की जाएगी। व्यापारी और कारोबारियों को उबरने में समय तो लगेगा लेकिन उसमें भी हमें मिलजुलकर प्रयास करने होंगे।
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भविष्य में सामने होंगी नई चुनौतियां
जिले की आबादी लगभग 35 लाख है। यहां के अधिकांश लोग दिल्ली, हरियाणा आदि राज्यों में काम करते हैं। लगभग 15-20 हजार मजदूर वापस आ चुके हैं। अब शायद ही इनकी वापसी हो पाए। होगी भी तो उसमें काफी वक्त लगेगा। हालांकि सरकार मनरेगा आदि माध्यमों से उन्हें रोजगार देने का प्रयास तो कर रही है, लेकिन यह नाकाफी है। इसके अलावा होटल, सराफा समेत कोई भी कारोबार हो, उससे जुड़े लोग भी प्रभावित हैं। जब तक स्थितियां सही होंगी तब तक न जाने कितने कारोबार बंद हो चुके होंगे। ऐसे में भविष्य में लोगों के सामने नई चुनौतियां होंगी, इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
होटल कारोबार तो पहले भी बदायूं में नहीं था। पर्यटन की दृष्टि से जिले में कुछ भी नहीं है। ऐसे में बाहर के लोगों का यहां आना न के बराबर होता है। यदि रेस्टोरेंट आदि की बात करें तो यह भी आदमी की जरूरत नहीं है। ये भी आदमी बतौर शौक प्रयोग करता है। ऐसे में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार की स्थिति पहले भी अच्छी नहीं थी, आगे तो लगता है यह खत्म ही हो जाएगा। लॉकडाउन खुलेगा भी तो तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। कारोबार दोबारा उठ भी सकेगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। - गिरीश जुनेजा, होटल कारोबारी
लॉकडाउन में लोगों की क्रयशक्ति घट चुकी है, इसलिए अब बाजार खुल भी जाए तो भी बाजार आर्थिक मंदी की बीमारी से ग्रसित रहेगा। बाजार की मंदी से इंडस्ट्री चौपट हो जाती है। इंडस्ट्री चौपट होने से कर्मचारियों और मजदूरों की छंटनी होती है तो बेरोजगारी बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में लोगों और सरकार को संकल्प के साथ स्थानीय खुदरा विक्रेताओं और स्थानीय कुटीर उद्योगों से ही उत्पादित सामान खरीदने का प्रयास करना चाहिए। इस स्वदेशी की भावना से ही अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। - मनोज कृष्ण गुप्ता, व्यापारी
हलवाई, रेडीमेड, रेहड़ी, लघु उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक आदि ऐसे सैकड़ों ट्रेड से जुड़े लोग बंदी से माल खराब और एक्सपायरी होने से भुखमरी के कगार पर खड़े है। वो दिन दूर नही अगर इनको आर्थिक पैकेज के दायरे में नहीं लाया गया तो व्यापारी का बड़ा धड़ा खुदकुशी जैसे कृत्य करने को मजबूर हो जाएगा व इससे देश की अर्थव्यवस्था भी फेल हो जाएगी और अपराध रोक पाना चुनौती हो जाएगी। मेरा मानना है कि आर्थिक पैकेज में ऐसे व्यपारियों को चिह्नित कर सर्वप्रथम शामिल किया जाए। खुदरा व्यापार और कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। - नवनीत गुप्ता, कारोबारी
कोरोना की वजह से कारोबार तो पूरी तरह से ठप हो चुका है। इसमें किसी को दोष नहीं हैं। क्योंकि बीमारी है। इससे बचाव भी बेहद जरूरी था, लेकिन अब प्रशासन ने कुछ व्यापारियों को दुकानें खोलने की छूट दी है। अब जनपद ग्रीन जोन की तरफ बढ़ रहा है। इसको देखते हुए सभी दुकानों को भी खुलवाया जाए, ताकि अन्य लोग भी अपना व्यापार दोबारा शुरू कर सकें। व्यापारी को अपने यहां पर काम करने वाले श्रमिकों को भी धनराशि देनी है। इस काल में तो घरों से ही रुपये देने होंगे। अगर जल्द ही दुकानें खुल जाती है, तो व्यापारी प्रशासन का सहयोग ही करेंगे। - वीरेंद्र धीगड़ा, व्यापारी

कोविड-19 ने जिस तरह कारोबारियों की कमर तोड़ी है उससे जल्दी उबर पाना संभव नहीं है। क्योंकि अगर प्रशासन जल्द ही लॉकडाउन खोल भी देगा तो पास-पास में चलने पर पाबंदी रहेगी। ऐसे में लोग होटल में बहुत कम संख्या में ही आएंगे। इस वजह से होटल कारोबार का बुरा दौर शुरू हो चुका है। इसकी भरपाई करना भविष्य में भी बेहद मुश्किल है। वही बरातघरों का हाल और भी बेहाल है क्योंकि बरात में भीड़ जुटती है और कोविड-19 से बचाव ही भीड़ में न जाना है। ऐसे में समझ में नहीं आ रहा है कि आने वाले समय में क्या होगा। - अशोक गुुप्ता, होटल व बैक्वेट लॉन व्यवसायी
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