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अब बाईपास पुल के किनारे भी धंसे, गड्ढों से हो सकता है हादसा
सार
पर, अनदेखी के कारण सोत नदी के पुल पर खतरा बढ़ गया है।इधर से रोजाना गुजरने वाले राहगीरों के मुताबिक, इस समय सोत नदी के पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं है।-सोत नदी के पुल के बारे में जानकारी मिली है।
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सोत नदी के पुल के नजदीक हुआ गड्ढा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
बदायूं। बाईपास बनने के बाद आवागमन सुगम हुआ है। पर, अनदेखी के कारण सोत नदी के पुल पर खतरा बढ़ गया है। इस बरसात में पुल के दोनों किनारे बेहद खराब हो चुके हैं। अंदर ही अंदर काफी मिट्टी ढहकर खेतों में पहुंच गई है। इससे किनारे खोखले हो गए हैं। इससे पहले बाईपास की सड़क के किनारे गहरे गड्ढे हो गए थे, जिन्हें बाद में भरवाया गया था। अब पुल पर भी वही हालात हो रहे हैं।
बाईपास का जब से निर्माण हुआ है। तब से इसकी सड़क कटने, ढहने की तमाम शिकायतें आ चुकी हैं। हर बार बरसात में बाईपास को बड़ा नुकसान होता है। इसके किनारे कट जाते हैं। उनमें बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं। बाद में पीडब्ल्यूडी को अभियान चलाकर इन्हें भरवाना पड़ता है। अभी कुछ दिन पहले भी गड्ढे भरवाए गए थे। पानी रोकने के लिए मिट्टी भरकर कट्टे रखवाए गए थे लेकिन सोत नदी के पुल पर ध्यान नहीं दिया गया।
इधर से रोजाना गुजरने वाले राहगीरों के मुताबिक, इस समय सोत नदी के पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं है। यहां आने-जाने के दो पुल बने हैं, जहां पर ढलान है। दोनों ओर ढलान की शुरुआत से ही मिट्टी ढहना शुरू हो गई है। किनारों पर बना फुटपाथ पूरा धंस गया है। फुटपाथ की ईंटें भी ढहकर नीचे खेतों में पहुंच गईं हैं।
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सावन में पलटी थी कांवड़ियों की ट्रॉली
सावन के महीने में सोत नदी के पुल पर ही कांवड़ियों की ट्रॉली पलट गई थी। उसमें चार कांवड़िए घायल हो गए थे। गनीमत यह रही थी कि किसी की जान नहीं गई। इसके अलावा बाईपास पर एक डॉक्टर की कार धंस गई थी। इसमें ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन डॉक्टर बाल-बाल बच गए थे।
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सोत नदी के पुल के बारे में जानकारी मिली है। हमने पुल की फोटोग्राफी कराकर सेतु निगम को भेजा है। उन्हें एक चिट्ठी भी लिखी गई है। उनकी एक टीम ने आकर पुल का मुआयना कर लिया है। जल्द ही सेतु निगम की टीम आकर यहां मरम्मत कार्य करेगी।
- मनीष सिंह, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
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बाईपास का जब से निर्माण हुआ है। तब से इसकी सड़क कटने, ढहने की तमाम शिकायतें आ चुकी हैं। हर बार बरसात में बाईपास को बड़ा नुकसान होता है। इसके किनारे कट जाते हैं। उनमें बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं। बाद में पीडब्ल्यूडी को अभियान चलाकर इन्हें भरवाना पड़ता है। अभी कुछ दिन पहले भी गड्ढे भरवाए गए थे। पानी रोकने के लिए मिट्टी भरकर कट्टे रखवाए गए थे लेकिन सोत नदी के पुल पर ध्यान नहीं दिया गया।
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इधर से रोजाना गुजरने वाले राहगीरों के मुताबिक, इस समय सोत नदी के पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं है। यहां आने-जाने के दो पुल बने हैं, जहां पर ढलान है। दोनों ओर ढलान की शुरुआत से ही मिट्टी ढहना शुरू हो गई है। किनारों पर बना फुटपाथ पूरा धंस गया है। फुटपाथ की ईंटें भी ढहकर नीचे खेतों में पहुंच गईं हैं।
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सावन में पलटी थी कांवड़ियों की ट्रॉली
सावन के महीने में सोत नदी के पुल पर ही कांवड़ियों की ट्रॉली पलट गई थी। उसमें चार कांवड़िए घायल हो गए थे। गनीमत यह रही थी कि किसी की जान नहीं गई। इसके अलावा बाईपास पर एक डॉक्टर की कार धंस गई थी। इसमें ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन डॉक्टर बाल-बाल बच गए थे।
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सोत नदी के पुल के बारे में जानकारी मिली है। हमने पुल की फोटोग्राफी कराकर सेतु निगम को भेजा है। उन्हें एक चिट्ठी भी लिखी गई है। उनकी एक टीम ने आकर पुल का मुआयना कर लिया है। जल्द ही सेतु निगम की टीम आकर यहां मरम्मत कार्य करेगी।
- मनीष सिंह, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी