{"_id":"624c98e1b6742306fb7f9ca1","slug":"civic-amenities-badaun-news-bly480490528","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन साल से कई ओवरहेड टैंकों की सफाई, न पानी की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन साल से कई ओवरहेड टैंकों की सफाई, न पानी की जांच
विज्ञापन
वाटर वर्कर्स स्थित ओवरहेड टैंक।संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है, इसके साथ ही संचारी रोगों के नियंत्रण को लेकर ढिंढोरा पीटा जाने लगा है, लेकिन पानी की शुद्धता पर किसी का ध्यान नहीं है। इससे बड़ी बात क्या होगी कि तीन साल से न तो कई ओवरहैड टैंकों की सफाई हुई है और न पानी की जांच।
गर्मी के मौसम में बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अशुद्ध पानी पीने से बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। शहर के घरों में जो पानी की सप्लाई हो रही है उसकी शुद्धता सवालों के घेरे में है। पानी की अशुद्धता के कारण ही जिले में पीलिया (हेपेटाइटिस) और पेट संबंधी बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं।
शहर की बात करें तो नगर में पाइप लाइन से पेयजल सप्लाई के लिए नगर पालिका के पास नौ ओवरहेड टैंक हैं। सबसे ज्यादा 2250 किलोलीटर क्षमता का टैंक वाटर वर्क्स में है। ओवरहेड टैंकों में जब पानी स्टोर किया जाता है तो पानी के साथ तय मात्रा में क्लोरीन भी भेजी जाती है। लेकिन, शहर के कई ओवरहेड टैंकों में बिना क्लोरीन पानी भरा जा रहा है। कई ओवरहेड टैंकों की सफाई भी मार्च 2018 के बाद नहीं हुई है। पीलिया रोगियों की संख्या में इजाफा होने के बाद भी इसकी रोकथाम को स्वास्थ्य विभाग के संचारी रोग विभाग ने अब तक आपूर्ति वाले पानी का क्लोरीन चेक कराना जरूरी नहीं समझा है।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण की वजह से वर्ष 2020, 2021 में फोकस सिर्फ संक्रमितों पर रहा। अब 2022 का मार्च भी खत्म हो चुका है, इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर कोई प्रयास नहीं किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि संचारी रोग अभियान का प्लान तो बना लिया गया। लेकिन, पानी की टंकियों को चेक नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी अब पीलिया रोगियों की बढ़ती संख्या के बीच अपना-अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
-----------
शहर में नगर पालिका के ओवरहेड टैंक
वाटर वर्क्स- 2250 किलो लीटर
वाटर वर्क्स - 900 किलो लीटर
मीराजी चौकी- 2250 किलो लीटर
मीराजी चौकी- 1750 किलो लीटर
संगीता चौक- 1500 किलो लीटर
नाहर खां सराय- 1050 किलो लीटर
दातागंज तिराहा- 2000 किलो लीटर
डीएम आवास- 2000 किलो लीटर
नार्मल स्कूल- 1000 किलो लीटर
-
बढ़ रहे हेपेटाइटिस रोगी, जिला अस्पताल में जल्द खुलेगा क्लीनिक
हेपेटाइटिस या पीलिया लिवर संबंधी गंभीर बीमारी है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में हर माह औसतन 15 लोगों को पीलिया की पुष्टि हो रही है। निजी पैथालॉजी लैबों का आंकड़ा इसमें शामिल नहीं है। इसमें हेपेटाइटिस बी और सी के रोगियों की संख्या ज्यादा है। अब तक जिला अस्पताल में पीलिया या हेपेटाइटिस का इलाज भी नहीं है। हालांकि, स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिले में बढ़ रहे पीलिया रोगियों को देखते हुए शासन जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस रोग विभाग को मंजूरी दे चुका है। जिला अस्पताल की ओपीडी में जल्द हेपेटाइटिस क्लीनिक भी शुरू होने की उम्मीद है।
-
पीने के पानी की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। नगर क्षेत्र में नगर पालिका-नगर पंचायत और देहात क्षेत्र में जल निगम की जिम्मेदारी है। जहां तक मेरी जानकारी में है पानी की समय से जांच नहीं हो रही। इस बारे में संचारी रोग विभाग समेत संबंधितों से बात करके जानकारी जुटाऊंगा।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
-
मुझे याद है कि वर्ष 2020 में बदायूं जिले में तैनाती के बाद मैंने खुद वाटरवर्क्स के ओवरहेड टैंक की सफाई करवाई थी। कर्मचारियों ने शायद सफाई की तारीख अपडेट नहीं की है। खुद इस मामले को दिखवाएंगे और टैंक की सफाई कराएंगे।
- अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
विज्ञापन
गर्मी के मौसम में बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अशुद्ध पानी पीने से बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। शहर के घरों में जो पानी की सप्लाई हो रही है उसकी शुद्धता सवालों के घेरे में है। पानी की अशुद्धता के कारण ही जिले में पीलिया (हेपेटाइटिस) और पेट संबंधी बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं।
विज्ञापन
शहर की बात करें तो नगर में पाइप लाइन से पेयजल सप्लाई के लिए नगर पालिका के पास नौ ओवरहेड टैंक हैं। सबसे ज्यादा 2250 किलोलीटर क्षमता का टैंक वाटर वर्क्स में है। ओवरहेड टैंकों में जब पानी स्टोर किया जाता है तो पानी के साथ तय मात्रा में क्लोरीन भी भेजी जाती है। लेकिन, शहर के कई ओवरहेड टैंकों में बिना क्लोरीन पानी भरा जा रहा है। कई ओवरहेड टैंकों की सफाई भी मार्च 2018 के बाद नहीं हुई है। पीलिया रोगियों की संख्या में इजाफा होने के बाद भी इसकी रोकथाम को स्वास्थ्य विभाग के संचारी रोग विभाग ने अब तक आपूर्ति वाले पानी का क्लोरीन चेक कराना जरूरी नहीं समझा है।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण की वजह से वर्ष 2020, 2021 में फोकस सिर्फ संक्रमितों पर रहा। अब 2022 का मार्च भी खत्म हो चुका है, इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर कोई प्रयास नहीं किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि संचारी रोग अभियान का प्लान तो बना लिया गया। लेकिन, पानी की टंकियों को चेक नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी अब पीलिया रोगियों की बढ़ती संख्या के बीच अपना-अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
-----------
शहर में नगर पालिका के ओवरहेड टैंक
वाटर वर्क्स- 2250 किलो लीटर
वाटर वर्क्स - 900 किलो लीटर
मीराजी चौकी- 2250 किलो लीटर
मीराजी चौकी- 1750 किलो लीटर
संगीता चौक- 1500 किलो लीटर
नाहर खां सराय- 1050 किलो लीटर
दातागंज तिराहा- 2000 किलो लीटर
डीएम आवास- 2000 किलो लीटर
नार्मल स्कूल- 1000 किलो लीटर
-
बढ़ रहे हेपेटाइटिस रोगी, जिला अस्पताल में जल्द खुलेगा क्लीनिक
हेपेटाइटिस या पीलिया लिवर संबंधी गंभीर बीमारी है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में हर माह औसतन 15 लोगों को पीलिया की पुष्टि हो रही है। निजी पैथालॉजी लैबों का आंकड़ा इसमें शामिल नहीं है। इसमें हेपेटाइटिस बी और सी के रोगियों की संख्या ज्यादा है। अब तक जिला अस्पताल में पीलिया या हेपेटाइटिस का इलाज भी नहीं है। हालांकि, स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिले में बढ़ रहे पीलिया रोगियों को देखते हुए शासन जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस रोग विभाग को मंजूरी दे चुका है। जिला अस्पताल की ओपीडी में जल्द हेपेटाइटिस क्लीनिक भी शुरू होने की उम्मीद है।
-
पीने के पानी की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। नगर क्षेत्र में नगर पालिका-नगर पंचायत और देहात क्षेत्र में जल निगम की जिम्मेदारी है। जहां तक मेरी जानकारी में है पानी की समय से जांच नहीं हो रही। इस बारे में संचारी रोग विभाग समेत संबंधितों से बात करके जानकारी जुटाऊंगा।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
-
मुझे याद है कि वर्ष 2020 में बदायूं जिले में तैनाती के बाद मैंने खुद वाटरवर्क्स के ओवरहेड टैंक की सफाई करवाई थी। कर्मचारियों ने शायद सफाई की तारीख अपडेट नहीं की है। खुद इस मामले को दिखवाएंगे और टैंक की सफाई कराएंगे।
- अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट