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उपभोक्ता फोरम में ढाई माह में डेढ़ सौ मामले निपटे
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बदायूं। तीन सालों की अपेक्षा अब उपभोक्ता फोरम में शिकायत निस्तारण में तेजी आई है। इस साल जनवरी से लेकर अब तक करीब डेढ़ सौ मामलों का निस्तारण हो चुका है। हालांकि अब भी 650 मामले लंबित पड़े हैं।
जिले में उपभोक्ता फोरम साल 1991 से है। शुरुआती दौर में उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों की न्यायालय में सुनवाई होती थी लेकिन उसके बाद उपभोक्ता फोरम अलग कर दिया गया। तब से एक रिटायर्ड जज और दो सदस्य सुनवाई करते हैं। यहां उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं है लेकिन पेचीदा मामलों में किसी वकील की आवश्यकता पड़ती है।
31 अक्तूबर 2018 से 20 अक्तूबर 2021 तक फोरम खाली पड़ा रहा। किसी रिटायर्ड जज की नियुक्ति नहीं हुई। इससे उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी। इससे लंबित मामलों की सूची काफी लंबी हो गई। इस समय 650 मामले लंबित हैं। रिटायर्ड जज की तैनाती के बाद 21 अक्तूबर 2021 से शिकायत निस्तारण में तेजी आई।
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अगर चालू वर्ष की बात करें तो इस साल 39 नए मामले सामने आए। वहीं जनवरी से लेकर अब तक करीब डेढ़ सौ मामले निपटाए गए।
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सबसे अधिक बिजली और बीमा क्लेम की शिकायतें
उपभोक्ता फोरम में सबसे अधिक बिजली और इंश्योरेंस से संबंधित मामलों की शिकायतें पहुंच रहीं हैं। किसी का बिल ज्यादा आ रहा है तो किसी का मीटर के अनुसार बिल नहीं मिल रहा। यही वजह है कि बिजली विभाग से ही संबंधित करीब सौ मामले लंबित हैं। जबकि सौ मामले इंश्योरेंस से संबंधित हैं जहां दावों के बाद भुगतान में बीमा कंपनी मुकर गई।
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दो दिन पहले फोरम ने सुनाया था बड़ा फैसला
उपभोक्ता फोरम ने दो दिन पहले बड़ा फैसला सुनाया था। दरअसल भगवान वनस्पति मिल्स लिमिटेड उझानी में बहुरानी नाम से वनस्पति घी का उत्पादन करती थी। कंपनी ने अपने उत्पाद के रिस्क कवर के लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से मरीन बीमा पॉलिसी के तहत बीमा कराया था। अक्सर कंपनी अपने उत्पाद को एक जगह से दूसरी जगह भेजने पर हो सकने वाले नुकसान से बचने के लिए मरीन बीमा पॉलिसी कराती हैं। भगवान वनस्पति मिल्स ने चार जनवरी 1996 को गगन ट्रांसपोर्ट कंपनी से 903 वनस्पति घी के टिन अपने डिपो बनारस भेजे। वनस्पति घी परिवादी के बनारस डिपो पर नहीं पहुंचा। इसके एवज में परिवादी भगवान वनस्पति ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर चार लाख 86 हजार रुपये की धनराशि का दावा किया। इस पर फोरम की पीठ ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को चार लाख 86 हजार रुपये बतौर क्लेम की धनराशि और क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
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उपभोक्ता फोरम में शिकायत निस्तारण में तेजी आई है। हालांकि तीन साल फोरम में पीठ नहीं थी। इससे लंबित मामलों की सूची लंबी हो गई लेकिन अब तेजी से मामलों का निपटारा किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को यहां न्याय मिल रहा है।
- अशोक कुमार वर्मा, अधिवक्ता उपभोक्ता फोरम
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जिले में उपभोक्ता फोरम साल 1991 से है। शुरुआती दौर में उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों की न्यायालय में सुनवाई होती थी लेकिन उसके बाद उपभोक्ता फोरम अलग कर दिया गया। तब से एक रिटायर्ड जज और दो सदस्य सुनवाई करते हैं। यहां उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं है लेकिन पेचीदा मामलों में किसी वकील की आवश्यकता पड़ती है।
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31 अक्तूबर 2018 से 20 अक्तूबर 2021 तक फोरम खाली पड़ा रहा। किसी रिटायर्ड जज की नियुक्ति नहीं हुई। इससे उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी। इससे लंबित मामलों की सूची काफी लंबी हो गई। इस समय 650 मामले लंबित हैं। रिटायर्ड जज की तैनाती के बाद 21 अक्तूबर 2021 से शिकायत निस्तारण में तेजी आई।
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अगर चालू वर्ष की बात करें तो इस साल 39 नए मामले सामने आए। वहीं जनवरी से लेकर अब तक करीब डेढ़ सौ मामले निपटाए गए।
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सबसे अधिक बिजली और बीमा क्लेम की शिकायतें
उपभोक्ता फोरम में सबसे अधिक बिजली और इंश्योरेंस से संबंधित मामलों की शिकायतें पहुंच रहीं हैं। किसी का बिल ज्यादा आ रहा है तो किसी का मीटर के अनुसार बिल नहीं मिल रहा। यही वजह है कि बिजली विभाग से ही संबंधित करीब सौ मामले लंबित हैं। जबकि सौ मामले इंश्योरेंस से संबंधित हैं जहां दावों के बाद भुगतान में बीमा कंपनी मुकर गई।
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दो दिन पहले फोरम ने सुनाया था बड़ा फैसला
उपभोक्ता फोरम ने दो दिन पहले बड़ा फैसला सुनाया था। दरअसल भगवान वनस्पति मिल्स लिमिटेड उझानी में बहुरानी नाम से वनस्पति घी का उत्पादन करती थी। कंपनी ने अपने उत्पाद के रिस्क कवर के लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से मरीन बीमा पॉलिसी के तहत बीमा कराया था। अक्सर कंपनी अपने उत्पाद को एक जगह से दूसरी जगह भेजने पर हो सकने वाले नुकसान से बचने के लिए मरीन बीमा पॉलिसी कराती हैं। भगवान वनस्पति मिल्स ने चार जनवरी 1996 को गगन ट्रांसपोर्ट कंपनी से 903 वनस्पति घी के टिन अपने डिपो बनारस भेजे। वनस्पति घी परिवादी के बनारस डिपो पर नहीं पहुंचा। इसके एवज में परिवादी भगवान वनस्पति ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर चार लाख 86 हजार रुपये की धनराशि का दावा किया। इस पर फोरम की पीठ ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को चार लाख 86 हजार रुपये बतौर क्लेम की धनराशि और क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
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उपभोक्ता फोरम में शिकायत निस्तारण में तेजी आई है। हालांकि तीन साल फोरम में पीठ नहीं थी। इससे लंबित मामलों की सूची लंबी हो गई लेकिन अब तेजी से मामलों का निपटारा किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को यहां न्याय मिल रहा है।
- अशोक कुमार वर्मा, अधिवक्ता उपभोक्ता फोरम