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खुले पड़े मैनहोल...खतरे में जिंदगी
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स्काउट भवन के सामने खुला पड़ा मेनहाल।संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। बरसात के दौरान पानी की निकासी के लिए शहर के कुछ मैनहोल के ढक्कन पालिका कर्मचारियों ने हटा दिए थे ताकि पानी की कायदे से निकासी हो सके। अब बरसात गुजरने के बाद भी इनको बंद करने की किसी को सुध नहीं आई है, ऐसे में अक्सर रात में दोपहिया वाहन चालक इनमें फंस जाते हैं। इससे हादसे का अंदेशा बना रहता है।
शहर में ऊबड़खाबड़ सड़कों की समस्या पुरानी है। शासन प्रशासन के दावों के बाद भी टूटी सड़कें दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं तो नई दिक्कत यहां वहां खुले पड़े मैनहोल पैदा कर रहे हैं। शहर की सड़कों पर जगह-जगह मैनहोल खुले पड़े हैं। रोज सफाईकर्मियों की टीम भी पालिका प्रशासन के अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट देती है। बावजूद इसके पालिका द्वारा इन मैनहोल को बंद कराने की व्यवस्था नहीं की है। कई लोग इन मैनहॉल में गिरकर घायल हो चुके हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है। रात के अंधेरे में राहगीरों को बीच रास्ते में खुले मैनहोल के बारे में जानकारी नहीं होती है, ऐसे में इनमें गिरकर लोग घायल हो जाते हैं।
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हो चुके हैं हादसे
-एक माह पहले कोतवाली इलाके के रामवीर जालंधरी सराय के पास मैनहोल में गिरकर घायल हो गए थे। उनका इलाज एक प्राइवेट अस्पताल में कराया गया। उझानी निवासी सोनू सिंह 20 दिन पहले बरेली से लौट रहे थे। रात के समय हुई बारिश की वजह से सड़क पर जलभराव था। ऐसे में मथुरिया चौक के पास खुला मैनहोल नहीं दिखाई दिया। उनकी बाइक उसमें घुस गई।
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इन जगहों पर खुुले हैं मैनहॉल
-नूरी चौक
-सोथा पुलिस चौकी के पास
-स्काउट भवन के सामने
-मथुरिया चौक
-जलांधरी सराय
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पालिका को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि मैनहोल खुले होने की वजह से कई बार लोग इसमें गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। इससे बड़ा हादसा हो सकता है।
-अमीर
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शहर में मैनहोल खुले होने का मतलब सभी को अच्छी तरह से मालूम है। ज्यादातर नाले चोक हैं और पालिका मैनहोल के जरिये बरसात के पानी व जलभराव को खत्म करने की कोशिश करती है। इनकी वजह से हादसे हो जाते हैं।
- जहीर
-
लगता है कि पालिका प्रशासन को जनहित के काम से कोई भी लेनादेना नहीं है। यही वजह है कि शहर के मैनहोल आज तक बंद नहीं किए गए हैं।
-फरहान
-
बारिश के दिनों में और रात के समय यह मैनहोल जानलेवा साबित होते हैं। इनको बंद कराने के लिए कई बार पालिका प्रशासन से फरियाद की गई। आज तक बंद नहीं हो सके हैं।
- सतीश
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शहर में मैनहोल कहां खुले हैं, इसकी जानकारी नहीं है। इसे दिखवाते हैं, इनको बंद कराया जाएगा। हालांकि पहले भी इनको बंद कराया गया था। दोबारा कैसे खुले, यह भी जांच कराएंगे।
- दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
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शहर में ऊबड़खाबड़ सड़कों की समस्या पुरानी है। शासन प्रशासन के दावों के बाद भी टूटी सड़कें दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं तो नई दिक्कत यहां वहां खुले पड़े मैनहोल पैदा कर रहे हैं। शहर की सड़कों पर जगह-जगह मैनहोल खुले पड़े हैं। रोज सफाईकर्मियों की टीम भी पालिका प्रशासन के अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट देती है। बावजूद इसके पालिका द्वारा इन मैनहोल को बंद कराने की व्यवस्था नहीं की है। कई लोग इन मैनहॉल में गिरकर घायल हो चुके हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है। रात के अंधेरे में राहगीरों को बीच रास्ते में खुले मैनहोल के बारे में जानकारी नहीं होती है, ऐसे में इनमें गिरकर लोग घायल हो जाते हैं।
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हो चुके हैं हादसे
-एक माह पहले कोतवाली इलाके के रामवीर जालंधरी सराय के पास मैनहोल में गिरकर घायल हो गए थे। उनका इलाज एक प्राइवेट अस्पताल में कराया गया। उझानी निवासी सोनू सिंह 20 दिन पहले बरेली से लौट रहे थे। रात के समय हुई बारिश की वजह से सड़क पर जलभराव था। ऐसे में मथुरिया चौक के पास खुला मैनहोल नहीं दिखाई दिया। उनकी बाइक उसमें घुस गई।
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इन जगहों पर खुुले हैं मैनहॉल
-नूरी चौक
-सोथा पुलिस चौकी के पास
-स्काउट भवन के सामने
-मथुरिया चौक
-जलांधरी सराय
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पालिका को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि मैनहोल खुले होने की वजह से कई बार लोग इसमें गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। इससे बड़ा हादसा हो सकता है।
-अमीर
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शहर में मैनहोल खुले होने का मतलब सभी को अच्छी तरह से मालूम है। ज्यादातर नाले चोक हैं और पालिका मैनहोल के जरिये बरसात के पानी व जलभराव को खत्म करने की कोशिश करती है। इनकी वजह से हादसे हो जाते हैं।
- जहीर
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लगता है कि पालिका प्रशासन को जनहित के काम से कोई भी लेनादेना नहीं है। यही वजह है कि शहर के मैनहोल आज तक बंद नहीं किए गए हैं।
-फरहान
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बारिश के दिनों में और रात के समय यह मैनहोल जानलेवा साबित होते हैं। इनको बंद कराने के लिए कई बार पालिका प्रशासन से फरियाद की गई। आज तक बंद नहीं हो सके हैं।
- सतीश
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शहर में मैनहोल कहां खुले हैं, इसकी जानकारी नहीं है। इसे दिखवाते हैं, इनको बंद कराया जाएगा। हालांकि पहले भी इनको बंद कराया गया था। दोबारा कैसे खुले, यह भी जांच कराएंगे।
- दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष