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महिला की मौत के मामले में फंसे एमओआईसी, सीएमओ ने रिपोर्ट भेजी
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बदायूं। सड़क हादसे में घायल महिला की मौत के मामले में बिल्सी एमओआईसी चारों ओर से घिर गए हैं। हालांकि उन्होंने अधिकारियों को फोटो और वीडियो भेजकर ये दावा किया है कि महिला की मौत घटनास्थल पर हो गई थी, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में महिला के पहुंचने पर देरी की गई और वह फोन में लगे रहे, इससे एमओआईसी पर कार्रवाई हो सकती है। सीएमओ ने इसकी रिपोर्ट बनाकर आयोग को भेज दी है।
बीते 14 सितंबर को उघैती थाना क्षेत्र में एक कंटेनर ने बाइक सवार मां-बेटे समेत तीन लोगों को टक्कर मार दी थी। इसकी सूचना पर एसआई सुशील पवार मौके पर पहुंचे थे। वहां कोई वाहन नहीं मिला तो वह अपनी गाड़ी से महिला को बिल्सी स्वास्थ्य केंद्र ले गए। आरोप था कि उस वक्त स्वास्थ्य केंद्र में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। एमओआईसी मोबाइल पर बातें कर रहे थे। दस मिनट इंतजार करने के बाद एमओआईसी आए, तो दरोगा ने उनसे महिला को देख लेने को कहा था, लेकिन एमओआईसी उनसे ही उलझ गए। उनके बीच हुई बहस की वीडियो खूब वायरल हुई। पुलिस ने इसमें एमओआईसी की लापरवाही बताई। ये मामला तूल पकड़ा तो स्वास्थ्य विभाग के अलावा जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया। आयोग ने इस पर जवाब मांगा।
सीएमओ ने इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर आयोग को भेजी है। बताते हैं कि इस रिपोर्ट में एमओआईसी की ही गलती बताई गई है। एक तो वह मोबाइल पर बातें करने में व्यस्त थे। महिला मौके पर मरी थी या स्वास्थ्य केंद्र में, उन्हें कम से कम उसे देखना चाहिए था। इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। दरोगा से उलझना छोड़कर महिला का इलाज किया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। इस मामले में एमओआईसी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
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-इस मामले में सीएमओ ने आयोग को रिपोर्ट बनाकर भेजी है। एमओआइसी की लापरवाही नजर आ रही है। हालांकि उसने दावा किया है कि महिला की मौत मौके पर हो गई थी, लेकिन ज्यादा देर मोबाइल पर बात करना और महिला को न देखना भी लापरवाही है।
कुमार प्रशांत, डीएम
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बीते 14 सितंबर को उघैती थाना क्षेत्र में एक कंटेनर ने बाइक सवार मां-बेटे समेत तीन लोगों को टक्कर मार दी थी। इसकी सूचना पर एसआई सुशील पवार मौके पर पहुंचे थे। वहां कोई वाहन नहीं मिला तो वह अपनी गाड़ी से महिला को बिल्सी स्वास्थ्य केंद्र ले गए। आरोप था कि उस वक्त स्वास्थ्य केंद्र में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। एमओआईसी मोबाइल पर बातें कर रहे थे। दस मिनट इंतजार करने के बाद एमओआईसी आए, तो दरोगा ने उनसे महिला को देख लेने को कहा था, लेकिन एमओआईसी उनसे ही उलझ गए। उनके बीच हुई बहस की वीडियो खूब वायरल हुई। पुलिस ने इसमें एमओआईसी की लापरवाही बताई। ये मामला तूल पकड़ा तो स्वास्थ्य विभाग के अलावा जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया। आयोग ने इस पर जवाब मांगा।
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सीएमओ ने इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर आयोग को भेजी है। बताते हैं कि इस रिपोर्ट में एमओआईसी की ही गलती बताई गई है। एक तो वह मोबाइल पर बातें करने में व्यस्त थे। महिला मौके पर मरी थी या स्वास्थ्य केंद्र में, उन्हें कम से कम उसे देखना चाहिए था। इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। दरोगा से उलझना छोड़कर महिला का इलाज किया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। इस मामले में एमओआईसी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
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-इस मामले में सीएमओ ने आयोग को रिपोर्ट बनाकर भेजी है। एमओआइसी की लापरवाही नजर आ रही है। हालांकि उसने दावा किया है कि महिला की मौत मौके पर हो गई थी, लेकिन ज्यादा देर मोबाइल पर बात करना और महिला को न देखना भी लापरवाही है।
कुमार प्रशांत, डीएम