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घुड़दौड़ के लिए प्रसिद्घ था मेला ककोड़ा, तीन वर्ष से है पाबंदी

Sun, 03 Nov 2019 01:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2019 01:47 AM IST
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बदायूं/ कादरचौक। ग्लैंडर फारसी रोग फैलने की वजह से मेला ककोड़ा में घुड़दौड़ पर जिला प्रशासन और जिला पंचायत की ओर से पाबंदी लगा दी गई थी, जिसकी वजह से घुड़दौड़ में प्रतिभाग करने वाले लोगों ने आना छोड़ दिया। साथ ही घुड़दौड़ को देखने के शौकीन लोगों ने भी मेले से मुंह मोड़ लिया। इसी के चलते इस बार भी इस दौड़ के शौकीनों को निराश होना होगा।
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रुहेलखंड में मिनी कुंभ के नाम से पहचान रखने वाला मेला ककोड़ा में कभी हाथी और घुड़दौड़ की प्रतियोगिता होती थी, लेकिन हाथियों की संख्या हल्के-हल्के कम हो गई, जिसकी वजह से मेले में सिर्फ घुड़दौड़ ही रह गई। इसमें बदायूं के अलावा दूरदराज से लोग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए आते थे। जो मेले का एक अहम हिस्सा था, लेकिन करीब तीन साल पहले जिले में ग्लैंडर फारसी नामक बीमारी फैल गई, जिसकी चपेट में कई घोड़े आ गए। चूंकि बीमारी खतरनाक थी, जिसके चलते मेला ककोड़ा में होनी वाली घुड़दौड़ पर पाबंदी लगा दी गई। वहीं जिले में अन्य जनपदों से आने वाले घोड़ों की खरीद फरोख्त पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके चलते पिछले तीन वर्ष से मेेले में घुड़दौड़ पर पाबंदी है, वहीं इस बार भी जिला पंचायत की ओर से घुड़दौड़ को अनुमति नहीं दी गई है।
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लोगों का कहना है कि जिले में ग्लैंडर फारसी की वजह से पूरे जिले में घोड़ों के मेले, नुमाइश में पहुंचने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन देखा गया है कि सिर्फ मेला ककोड़ा में ही घुड़दौड़ प्रतिबंधित रह गई है, जबकि बाद में लगने वाले दहगवां, रमजानपुर, सैदपुर मेलों में जमकर घोड़ों की खरीद फरोख्त होती है, जो पीछे साल भी हुई थी। यह दोहरा व्यवहार समझ से परे है।
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मेला ककोड़ा में दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। उम्मीद है जल्द ही सारी दुकानें लग जाएंगी, लेकिन व्यापारी अभी सामान रखने से परहेज कर रहे हैं, क्योंकि वहां पर उड़ती धूल परेशान कर रही है।

जिले में मौजूद कुछ घोड़ों में ग्लैंडर फारसी बीमारी पायी गई थी, जिसकी वजह से मेला ककोड़ा में घुड़दौड़ प्रतियोगिता पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी गई थी, ऐसे में अब तक इसका प्रतिबंध चल रहा है, क्योंकि यह बीमारी काफी खतरनाक है।
डॉ. एकेे जादौन, सीवीओ
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