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प्लास्टिक, थर्माकोल बैन होने से कुम्हारों के चेहरे खिले, इस बार अच्छे कारोबार की उम्मीद

Wed, 16 Oct 2019 06:21 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2019 06:21 PM IST
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Civic Amenities
बदायूं। बीते कुछ वर्षों से बाजार में प्लास्टिक और थर्माकोल ने अपनी जगह बनाई तो कुम्हारों का पुश्तैनी काम थम गया। बाजार में प्लास्टिक के खिलौने, थर्माकोल के गिलास, कटोरी आदि ने काफी हद तक उनका धंधा बंद कर दिया। इतना ही नहीं चाइनीज बाजार ने कप, प्लेट देेकर कुम्हारों के कुल्हड़ की सुगंध छीन ली। दिवाली पर चाइनीज दियों को भी काफी हद तक पसंद किया जाने लगा। अब सरकार ने प्लास्टिक और थर्माकोल पर प्रतिबंध लगाया तो कुुम्हारों को अपने दिन बहुरने की उम्मीद जगी है। उनका मानना है कि थर्माकोल और प्लास्टिक की बनी वस्तुओं का उपयोग बंद होने से कुल्हड़ों और गिलासों की मांग बढ़ जाएगी, वहीं चाइनीज झालरों और दियों का भी मार्केट में विरोध होने से इस बार उनका त्योहार अच्छा हो जाएगा।
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दिवाली और करवाचौथ को लेकर कुंभकारों ने दीप और करवा बनाने का काम शुरू कर दिया है। कुंभकारों का पूरा परिवार दिन रात दीप, करवा आदि बनाने में जुटा है। इस काम से जुड़े वीरपाल प्रजापति ने बताया कि दिवाली और करवाचौथ आते ही पूरे परिवार के लोगों के सहयोग से दीप, दीपक, करवा, दीवट आदि बनाकर तैयार किए जा रहे है। विधिविधान से लोग घर में कम से कम पांच दीप तो जलाते ही हैं। लोग अब मोमबत्ती की जगह इलेक्ट्रानिक बल्बों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं और दीप की जगह इनका ही प्रयोग कर लेते हैं। इससे कुंभकारों के इस पुश्तैनी कार्य पर गहरा असर पड़ा है।
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करवाचौथ पर है करवे का खास महत्व
महिलाओं का मुख्य पर्व करवाचौथ गुरुवार को है। इसमें करवा और दीवट का महत्व है। महिलाएं पूजा पाठ के बाद रात्रि में करवा से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। करवाचौथ आते ही कुम्हारों के करवा बनाने के कार्य में तेजी आ गई है। मोहल्ला पनबाड़ी के सुरेश ने बताया कि वैसे तो सादा करवा 10 से 12 रुपये का बिकता है, लेकिन साज सज्जा के बाद करवा बाजार में 20 रुपये का बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि एक बार में करीब पांच सौ करवा और दीवट तैयार करके अवां में लगाए जाते हैं। अवां में करवा 12 घंटे में पककर तैयार हो जाते हैं। फिर उन पर साजसज्जा का काम किया जाता है और कुछ को सादा छोड़ दिया जाता है। करवाचौथ के अलावा करवा की बिक्री नहीं है। इसलिए सीमित मात्रा में ही करवा बनाए जाते हैं।
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