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दो बार आई ऋण माफी योजना, पर हेम सिंह को नहीं मिल सका लाभ
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बिल्सी (बदायूं)। फंदे पर लटककर जान देने वाले हेम सिंह के समय दो बार कर्ज माफी की योजना आई लेकिन किसी में उसे पात्र नहीं समझा गया। सपा सरकार ने छोटे एवं सीमांत किसानों के 50 हजार रुपये तक का कर्जा माफ किया था। शर्त थी किसान का मूलधन कम से कम 10 प्रतिशत जमा किया गया हो, तो वहीं भाजपा सरकार ने किसानों का फसली ऋण माफ किया था। इससे हेम सिंह दोनों बार अछूता रह गया।
थाना क्षेत्र के ग्राम सदरपुर निवासी किसान हेम सिंह पुत्र बिहारी सिंह ने मंगलवार की रात अपने खेत पर पेड़ से फंदे पर लटककर जान दे दी थी। हेम सिंह ने वर्ष 2010 में सहकारी भूमि विकास बैंक से 80 हजार रुपये का कर्ज मुर्गी पालन के लिए लिया था। तब से वह एक भी किस्त जमा नहीं कर पाया था। किसान के सामने एक के बाद एक समस्या आती गईं। वहीं उसका कर्ज बढ़ता गया। वर्ष 2012 में सपा सरकार आई। उसे उम्मीद थी कि कहीं न कहीं सरकार कर्जा माफ जरूर कर देगी लेकिन सरकार की शर्त थी कि छोटे एवं सीमांत किसानों का सिर्फ 50 हजार रुपये का कर्जा माफ किया जाएगा और वह भी तब, जब उसका 10 प्रतिशत मूलधन बैंक में जमा हो इससे उसका कर्जा माफ नहीं हुआ। वर्ष 2017 में योगी सरकार आई, इसमें किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्जा माफ किया गया। इसमें शर्त रही थी कि किसानों ने 21 मार्च 2016 से लेकर 31 मार्च 2017 तक लेन देन न किया हो और सिर्फ फसली ऋण माफ किया जाएगा। इससे भाजपा सरकार में भी हेम सिंह अछूता रह गया। कर्ज माफी की आस लगाए बैठे हेम सिंह को दोनों बार निराशा हाथ लगी। आखिर में वह पूरी तरह टूट गया और फंदे पर लटककर जान दे दी।
सपा सरकार के दौरान मैं यहां नहीं था। जहां तक मुझे पता है कि सपा सरकार की कुछ शर्तें थीं। भाजपा सरकार में फसली ऋण माफ हुआ था, जबकि हेम सिंह ने मुर्गी पालन के लिए कर्जा लिया था। इससे उसका माफ नहीं हो सका होगा।
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-श्याम पासवान, एलडीएम
सपा नेताओं ने दी सांत्वना
गुरुवार को हेम सिंह के घर पहुंचे सपा नेताओं ने परिवार वालों के साथ बैठकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए जाने की मांग की। इस मौके पर सोवरन सिंह, रविंद्र शाक्य, किशोरीलाल शाक्य, प्रेमपाल यादव, इरसाद मलिक, टिंकू शाक्य आदि मौजूद रहे।
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थाना क्षेत्र के ग्राम सदरपुर निवासी किसान हेम सिंह पुत्र बिहारी सिंह ने मंगलवार की रात अपने खेत पर पेड़ से फंदे पर लटककर जान दे दी थी। हेम सिंह ने वर्ष 2010 में सहकारी भूमि विकास बैंक से 80 हजार रुपये का कर्ज मुर्गी पालन के लिए लिया था। तब से वह एक भी किस्त जमा नहीं कर पाया था। किसान के सामने एक के बाद एक समस्या आती गईं। वहीं उसका कर्ज बढ़ता गया। वर्ष 2012 में सपा सरकार आई। उसे उम्मीद थी कि कहीं न कहीं सरकार कर्जा माफ जरूर कर देगी लेकिन सरकार की शर्त थी कि छोटे एवं सीमांत किसानों का सिर्फ 50 हजार रुपये का कर्जा माफ किया जाएगा और वह भी तब, जब उसका 10 प्रतिशत मूलधन बैंक में जमा हो इससे उसका कर्जा माफ नहीं हुआ। वर्ष 2017 में योगी सरकार आई, इसमें किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्जा माफ किया गया। इसमें शर्त रही थी कि किसानों ने 21 मार्च 2016 से लेकर 31 मार्च 2017 तक लेन देन न किया हो और सिर्फ फसली ऋण माफ किया जाएगा। इससे भाजपा सरकार में भी हेम सिंह अछूता रह गया। कर्ज माफी की आस लगाए बैठे हेम सिंह को दोनों बार निराशा हाथ लगी। आखिर में वह पूरी तरह टूट गया और फंदे पर लटककर जान दे दी।
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सपा सरकार के दौरान मैं यहां नहीं था। जहां तक मुझे पता है कि सपा सरकार की कुछ शर्तें थीं। भाजपा सरकार में फसली ऋण माफ हुआ था, जबकि हेम सिंह ने मुर्गी पालन के लिए कर्जा लिया था। इससे उसका माफ नहीं हो सका होगा।
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-श्याम पासवान, एलडीएम
सपा नेताओं ने दी सांत्वना
गुरुवार को हेम सिंह के घर पहुंचे सपा नेताओं ने परिवार वालों के साथ बैठकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए जाने की मांग की। इस मौके पर सोवरन सिंह, रविंद्र शाक्य, किशोरीलाल शाक्य, प्रेमपाल यादव, इरसाद मलिक, टिंकू शाक्य आदि मौजूद रहे।