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कछला की गोशाला में 22 गोवंशीय पशुओं की मौत की जांच शुरू
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उझानी (बदायूं)। कछला की गोशाला में 22 गोवंशीय पशुओं की मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आ जाने के बाद भी शासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। लापरवाही किस स्तर पर हुई या फिर मौत की वजह कोई और तो नहीं, इसी हकीकत का पता लगाने के लिए अपर निदेशक (पशुपालन) बरेली डॉ. राजेश मोहन दीक्षित की अगुवाई में छह सदस्यीय टीम मंगलवार को मौके पर पहुंची। टीम के सदस्यों ने गोशाला इंचार्ज समेत गोवंशीय पशुओं की देखरेख करने वाले अस्थायी कर्मियों से पूछताछ के दौरान बयान दर्ज किए। साथ ही गोशाला के आसपास के लोगों से भी पशुओं के आहार को लेकर बात की गई।
लखनऊ से मिले जांच के आदेश के बाद कछला पहुंचे अपर निदेशक (पशुपालन) बरेली, राजेश मोहन दीक्षित और उनकी टीम में शामिल विशेषज्ञ सदस्यों ने सबसे पहले कान्हा अस्थायी गोशाला के आसपास रहने वाले लोगों से रविवार शाम से जुड़े पूरे घटनाक्रम को लेकर बात की। लोगों से यह भी पूछा गया है कि गोशाला में गोवंशीय पशुओं को नियमित चारा मुहैया कराया जाता था या नहीं। जांच टीम के सदस्यों ने ईओ सुरेंद्र प्रसाद सिंह से भी जानकारी की। गोशाला इंचार्ज अमरनाथ शर्मा, गोवंशीय पशुओं की देखरेख करने वाले अस्थायी कर्मियों में नेकसू, मूलचंद्र ,बलवंत और लेखराज के बयान दर्ज किए गए। ठेकेदार द्वारा रविवार को किस समय चारा मुहैया कराया गया, बाजरा के हरे चारे की स्थिति कैसी थी और दोपहर में पशुओं को आहार में क्या दिया गया आदि समेत कई बिंदुओं पर उनसे सवाल पूछे गए। अपर निदेशक जांच के आधार पर अपनी रिपोर्ट बुधवार को शासन को भेजेंगे।
बता दें कि रविवार रात में गोशाला में 22 गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई थी। शासन स्तर पर मची अफरा-तफरी के बाद मृत पशुओं का पोस्टमार्टम आईवीआरआई की टीम ने किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोवंशीय पशुओं की मौत पेट में नाइट्रेट प्वॉयजनिंग की वजह से बताई गई थी।
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पशुओं को शिफ्ट किए जाने से सूनी नजर आई कछला की गोशाला
कछला की कान्हा अस्थायी गोशाला दो दिन पहले तक आबाद थी। रविवार शाम को हरे चारे के साथ गोवंशीय पशुओं पर ऐसी आफत टूटी कि डेढ़ घंटे में ही 22 पशुओं की मौत हो गई। बाकी बचे गोवंशीय पशुओं को अगले दिन बिनावर क्षेत्र के गांव रफियाबाद की गोशाला में पहुंचाकर शिफ्ट कर दिया गया। कई महीनों तक आबाद रही गोशाला मंगलवार को सूनी नजर आई। निशान के रूप में मौके पर बल्लियों की बेरिकेडिंग, टिनशेड और गोशाला का नाम लिखा बोर्ड ही बचा है।
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लखनऊ से मिले जांच के आदेश के बाद कछला पहुंचे अपर निदेशक (पशुपालन) बरेली, राजेश मोहन दीक्षित और उनकी टीम में शामिल विशेषज्ञ सदस्यों ने सबसे पहले कान्हा अस्थायी गोशाला के आसपास रहने वाले लोगों से रविवार शाम से जुड़े पूरे घटनाक्रम को लेकर बात की। लोगों से यह भी पूछा गया है कि गोशाला में गोवंशीय पशुओं को नियमित चारा मुहैया कराया जाता था या नहीं। जांच टीम के सदस्यों ने ईओ सुरेंद्र प्रसाद सिंह से भी जानकारी की। गोशाला इंचार्ज अमरनाथ शर्मा, गोवंशीय पशुओं की देखरेख करने वाले अस्थायी कर्मियों में नेकसू, मूलचंद्र ,बलवंत और लेखराज के बयान दर्ज किए गए। ठेकेदार द्वारा रविवार को किस समय चारा मुहैया कराया गया, बाजरा के हरे चारे की स्थिति कैसी थी और दोपहर में पशुओं को आहार में क्या दिया गया आदि समेत कई बिंदुओं पर उनसे सवाल पूछे गए। अपर निदेशक जांच के आधार पर अपनी रिपोर्ट बुधवार को शासन को भेजेंगे।
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बता दें कि रविवार रात में गोशाला में 22 गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई थी। शासन स्तर पर मची अफरा-तफरी के बाद मृत पशुओं का पोस्टमार्टम आईवीआरआई की टीम ने किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोवंशीय पशुओं की मौत पेट में नाइट्रेट प्वॉयजनिंग की वजह से बताई गई थी।
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पशुओं को शिफ्ट किए जाने से सूनी नजर आई कछला की गोशाला
कछला की कान्हा अस्थायी गोशाला दो दिन पहले तक आबाद थी। रविवार शाम को हरे चारे के साथ गोवंशीय पशुओं पर ऐसी आफत टूटी कि डेढ़ घंटे में ही 22 पशुओं की मौत हो गई। बाकी बचे गोवंशीय पशुओं को अगले दिन बिनावर क्षेत्र के गांव रफियाबाद की गोशाला में पहुंचाकर शिफ्ट कर दिया गया। कई महीनों तक आबाद रही गोशाला मंगलवार को सूनी नजर आई। निशान के रूप में मौके पर बल्लियों की बेरिकेडिंग, टिनशेड और गोशाला का नाम लिखा बोर्ड ही बचा है।