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जन्मदिन पर शहीद भगत सिंह का किया भावपूर्ण स्मरण
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बदायूं। युवा संकल्प सेवा समिति के तत्वावधान में मोहल्ला शहबाजपुर कार्यालय पर शहीद भगत सिंह की जयंती पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया, साथ ही उनके चित्र पर मल्यार्पण कर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
संस्था सचिव पुनीत कुमार कश्यप ने कहा कि 27 सितंबर 1907 को अविभाजित पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह बहुत छोटी उम्र से ही आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। उनकी लोकप्रियता से भयभीत ब्रिटिश हुक्मरान ने 23 मार्च 1931 को 23 बरस के भगत को फांसी पर लटका दिया। कोषाध्यक्ष योगेंद्र कुमार सागर ने कहा कि मैं नास्तिक क्यों हूं? भगत सिंह द्वारा लिखा एक लेख है, जो उन्होंने लाहौर सेंट्रल जेल में कैद के दौरान लिखा था और इसका प्रथम प्रकाशन लाहौर से ही छपने वाले अखबार दि पीपुल में 27 सितंबर 1931 को हुआ। यह लेख भगत सिंह के द्वारा लिखित साहित्य के सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली हिस्सों में गिना जाता है और बाद में इसका कई बार प्रकाशन हुआ। इस मौके पर निखिल कुमार गुप्ता, केंद्रभान सिंह, ज्ञान गौरव साहू, विशाल वैश्य, प्रयाग सिंह, धर्मवीर सिंह, देशपाल सिंह आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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संस्था सचिव पुनीत कुमार कश्यप ने कहा कि 27 सितंबर 1907 को अविभाजित पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह बहुत छोटी उम्र से ही आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। उनकी लोकप्रियता से भयभीत ब्रिटिश हुक्मरान ने 23 मार्च 1931 को 23 बरस के भगत को फांसी पर लटका दिया। कोषाध्यक्ष योगेंद्र कुमार सागर ने कहा कि मैं नास्तिक क्यों हूं? भगत सिंह द्वारा लिखा एक लेख है, जो उन्होंने लाहौर सेंट्रल जेल में कैद के दौरान लिखा था और इसका प्रथम प्रकाशन लाहौर से ही छपने वाले अखबार दि पीपुल में 27 सितंबर 1931 को हुआ। यह लेख भगत सिंह के द्वारा लिखित साहित्य के सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली हिस्सों में गिना जाता है और बाद में इसका कई बार प्रकाशन हुआ। इस मौके पर निखिल कुमार गुप्ता, केंद्रभान सिंह, ज्ञान गौरव साहू, विशाल वैश्य, प्रयाग सिंह, धर्मवीर सिंह, देशपाल सिंह आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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