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Budaun News: उल्टी-दस्त से बच्चे की मौत, परिजन बोले- दूषित पानी से बिगड़ी थी हालत
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नवीन उर्फ लप्पू। फाइल फोटो
- फोटो : संवाद
उझानी। नरऊ गांव में तीन साल के बच्चे की उल्टी- दस्त से मौत हो गई। उसके परिजनों ने मौत की वजह दूषित पानी बताया। ग्रामीणों ने अफसरों के खिलाफ गुस्से का भी इजहार किया।
नरऊ निवासी मनोज कुमार का तीन वर्षीय बेटा नवीन उर्फ लप्पू को बृहस्पतिवार रात करीब 11 बजे उल्टी- दस्त होने लगी। रात में प्राथमिक उपचार कराया। सुबह में हालत में सुधार नहीं हुआ तो निजी चिकित्सक से उपचार कराया। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया। पिता समेत परिवार के लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी पहुंचे, लेकिन शव लेकर गेट से ही लौटना पड़ा।
पिता ने बताया कि नवीन की मौत के लिए दूषित पानी कारण है। तालाब में पालिका के नाले का पानी गिरने से भूगर्भ में जल दूषित हो गया है। हैंडपंपों से मटमैला पानी निकलता है। मटमैला पीने से कई बच्चे और महिलाएं से ग्रसित हो चुकी हैं। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने गुस्से का इजहार किया। शाम तक बच्चे के शव का अंतिम संस्कार नहीं किया।
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क्रमिक अनशन पर बैठे हैं ग्रामीण, नहीं हुई सुनवाई
नरऊ के तालाब से पहले ही पालिका के नाले का पानी रोके जाने की मांग को लेकर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह ग्रामीणों के साथ क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। 13 दिन पहले शुरू क्रमिक अनशन के दौरान हर दिन ग्रामीणों के साथ महिलाएं भी शामिल होती हैं, लेकिन अभी तक अफसरों ने सुनवाई नहीं की है। ग्रामीण शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गांव के पिंटू, मुन्नालाल और हरीबाबू के चार पशु दो दिन में मर गए हैं।-- -- --
तालाब के पानी से हर साल तबाह होती हैं फसलें
- नरऊ के तालाब को लेकर इलाके के किसानों को दिक्कत ढाई दशक से है। तालाब का रकबा करीब 45 बीघा है, लेकिन आसपास के करीब एक सौ बीघा खेतों में तालाब का पानी भरता है। कभी बोआई का मौका मिल जाता है तो फसलें डूब जाने से कटाई नहीं हो पाती।
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नरऊ निवासी मनोज कुमार का तीन वर्षीय बेटा नवीन उर्फ लप्पू को बृहस्पतिवार रात करीब 11 बजे उल्टी- दस्त होने लगी। रात में प्राथमिक उपचार कराया। सुबह में हालत में सुधार नहीं हुआ तो निजी चिकित्सक से उपचार कराया। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया। पिता समेत परिवार के लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी पहुंचे, लेकिन शव लेकर गेट से ही लौटना पड़ा।
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पिता ने बताया कि नवीन की मौत के लिए दूषित पानी कारण है। तालाब में पालिका के नाले का पानी गिरने से भूगर्भ में जल दूषित हो गया है। हैंडपंपों से मटमैला पानी निकलता है। मटमैला पीने से कई बच्चे और महिलाएं से ग्रसित हो चुकी हैं। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने गुस्से का इजहार किया। शाम तक बच्चे के शव का अंतिम संस्कार नहीं किया।
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क्रमिक अनशन पर बैठे हैं ग्रामीण, नहीं हुई सुनवाई
नरऊ के तालाब से पहले ही पालिका के नाले का पानी रोके जाने की मांग को लेकर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह ग्रामीणों के साथ क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। 13 दिन पहले शुरू क्रमिक अनशन के दौरान हर दिन ग्रामीणों के साथ महिलाएं भी शामिल होती हैं, लेकिन अभी तक अफसरों ने सुनवाई नहीं की है। ग्रामीण शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गांव के पिंटू, मुन्नालाल और हरीबाबू के चार पशु दो दिन में मर गए हैं।
तालाब के पानी से हर साल तबाह होती हैं फसलें
- नरऊ के तालाब को लेकर इलाके के किसानों को दिक्कत ढाई दशक से है। तालाब का रकबा करीब 45 बीघा है, लेकिन आसपास के करीब एक सौ बीघा खेतों में तालाब का पानी भरता है। कभी बोआई का मौका मिल जाता है तो फसलें डूब जाने से कटाई नहीं हो पाती।

नवीन उर्फ लप्पू। फाइल फोटो- फोटो : संवाद