फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Chicory Farming get double benefits to farmers

चकोरी चमका रही किसानों की किस्मत: इस फसल में कम मेहनत-लागत, मुनाफा अधिक; पशु भी नहीं पहुंचाते नुकसान

Tue, 06 Jun 2023 04:23 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 06 Jun 2023 04:23 AM IST
सार

बदायूं के बेहटा, डवरनगर, असरासी, सिवाया, निजामाबाद, सिसैया, बिचौला, बादुल्लागंज आदि गांवों में चकोरी की खेती हो रही है। इसकी खेती में लागत और मेहनत कम लगती है, मुनाफा अधिक होता है। 

विज्ञापन
Chicory Farming get double benefits to farmers
खेत में पड़ी चकोरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदायूं जनपद में किसान परंपरागत खेती से हटकर अब चकोरी की खेती करने की ओर बढ़ रहे हैं। इसे उगाकर किसान अपेक्षाकृत आलू, गन्ना, लहसुन की फसलों से कम लागत व मेहनत में बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। खास यह है कि चकोरी की खेती को जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। बुआई अक्तूबर-नवंबर में होती है और अप्रैल-मई तक फसल तैयार हो जाती है। इसकी खेती में बीज खरीदने से लेकर खोदाई तक प्रति बीघा करीब आठ हजार रुपये आता है। एक बीघा में करीब 35 से 40 क्विंटल पैदावार होती है।

विज्ञापन


मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन की वजह से किसानों को आए दिन फसलों में नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन चकोरी की खेती में ऐसा बिल्कुल नहीं है। किसानों ने बताया कि बेहटा, डवरनगर, असरासी, सिवाया, निजामाबाद, सिसैया, बिचौला, बादुल्लागंज आदि गांवों में चकोरी की खेती हो रही है। 
विज्ञापन


इनसे सीखें पर्यावरण संरक्षण: बिना पेड़ काटे बना दिया तीन मंजिला मकान, देखें शानदार 'ट्री हाउस' की तस्वीरें
विज्ञापन
विज्ञापन


2018-19 में इसकी शुरुआत हुई थी। तब 200 बीघा में यह खेती हुआ करती थी, जो 2023 में बढ़कर 1000 बीघा हो गई है। किसानों का संबंध हिंदुस्तान लीवर, नेस्ले, जेपी कंपनी से है। वह ही किसानों को बीज देते हैं और उसी समय उनके फसल का भाव तय कर दिया जाता है। हालांकि इस समय 680 से 700 क्विंटल के हिसाब कंपनी पेमेंट कर रही है।

ये होता है चकोरी का इस्तेमाल 

कृषि वैज्ञानिक संजय कुमार ने बताया कि इसका उपयोग हरे चारे के अलावा औषधीय रूप में कैंसर जैसी बीमारी में भी किया जाता है। आमतौर पर कॉफी के विकल्प के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसमें कैफीन नहीं होता है और इसका स्वाद चॉकलेट की तरह होता है। यदि इसे कॉफी के साथ प्रयोग किया जाए तो यह कैफीन के प्रभावों को भी रोकता है।

एक बीघा में लगता है सिर्फ 100 ग्राम बीज

चकोरी फसल की बुआई अक्तूबर-नवंबर में होती है। एक बीघा चकोरी के लिए 100 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। इसकी पैदावार 35 से 50 क्विंटल बीघा तक हो जाती है। बुआई के समय इसमें केवल डीएपी का प्रयोग होता है, यूरिया नहीं लगाई जाती है। इसमें नराई की जाती है, साथ ही पूरी फसल के दौरान चार से पांच बार पानी लगाना होता है। किसानों ने बताया कि इसके पत्तों को हरे चारे के रूप में भी प्रयोग करते हैं, इससे दुधारू पशुओं में दूध की मात्रा बढ़ती है।

14,500 प्रति बीघा होता है शुद्ध लाभ

इसकी खेती में बीज खरीदने से लेकर खोदाई तक प्रति बीघा करीब खर्च आठ हजार रुपये आता है। एक बीघा में करीब 35 क्विंटल पैदावार होती है। 700 रुपये प्रति क्विंटल से 24,500 रुपये बीघा की फसल बैठती हैं। 10 हजार रुपये खर्च निकालने पर 14,500 हजार रुपये प्रति बीघा की बचत हो जाती है, जबकि एक बीघा में गेहूं चार क्विंटल निकलते हैं, इसकी कीमत 2100 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में 8400 रुपये का होता है। साथ ही 2000 रुपये का भूसा बिकता है। कुल मिलाकर 10,400 रुपये मिलता है, जबकि 2500 रुपये खर्च आता है। ऐसे में 7900 रुपये ही बचते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed