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चातुर्मास हो रहे प्रारंभ, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम : आचार्य राजेश
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आचार्य राजेश कुमार शर्मा।
बदायूं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक रहेगा। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक के चार माह को चातुर्मास माना जाता है। चातुर्मास के पहले दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं। इस कारण शुभ कार्य बंद हो जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि पांच जुलाई शनिवार को सायं 7:01 बजे से रविवार को रात 9:17 बजे तक है। उदयातिथि के आधार पर आषाढ़ शुक्ल एकादशी छह जुलाई को है, इसलिए इस वर्ष चातुर्मास छह जुलाई से शुरू होगा। चातुर्मास का पहला दिन देवशयनी एकादशी है। उस दिन चार शुभ योग बनेंगे।
चातुर्मास के पहले दिन साध्य योग, शुभ योग, रवि योग और त्रिपुष्कर योग बनेंगे। उस दिन विशाखा और अनुराधा नक्षत्र रहेंगे। भद्रा भले ही सुबह होगी, लेकिन उसका वास पाताल और स्वर्ग लोक होगा। देवशयनी एकादशी पर लोग व्रत रखेंगे और भगवान विष्णु की पूजा करेंगे। उस दिन से सभी देवता पूरे चातुर्मास के लिए सो जाएंगे। एक नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन चातुर्मास समाप्त हो जाएगा। उस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से बाहर आ जाएंगे और सभी देवता जाग जाएंगे। उसके बाद शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे।
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ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि पांच जुलाई शनिवार को सायं 7:01 बजे से रविवार को रात 9:17 बजे तक है। उदयातिथि के आधार पर आषाढ़ शुक्ल एकादशी छह जुलाई को है, इसलिए इस वर्ष चातुर्मास छह जुलाई से शुरू होगा। चातुर्मास का पहला दिन देवशयनी एकादशी है। उस दिन चार शुभ योग बनेंगे।
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चातुर्मास के पहले दिन साध्य योग, शुभ योग, रवि योग और त्रिपुष्कर योग बनेंगे। उस दिन विशाखा और अनुराधा नक्षत्र रहेंगे। भद्रा भले ही सुबह होगी, लेकिन उसका वास पाताल और स्वर्ग लोक होगा। देवशयनी एकादशी पर लोग व्रत रखेंगे और भगवान विष्णु की पूजा करेंगे। उस दिन से सभी देवता पूरे चातुर्मास के लिए सो जाएंगे। एक नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन चातुर्मास समाप्त हो जाएगा। उस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से बाहर आ जाएंगे और सभी देवता जाग जाएंगे। उसके बाद शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे।
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