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चंचल उपाध्याय ने स्कूल और बच्चों को स्पेशल
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बदायूं। बिसौली के कोट प्राइमरी स्कूल की प्रधानाध्यापिका चंचल उपाध्याय ने कठिन परिश्रम से अपने स्कूल को बेहतर बनाने का काम किया है। उन्होंने स्कूल का माहौल और परिवेश सुधारा तो बच्चों के शैक्षिक व मानसिक स्तर को मजबूत किया। इसी वजह से चंचल को कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
चंचल उपाध्याय ने सहायक अध्यापिका पद से प्रमोशन के बाद 2015 में प्राथमिक विद्यालय कोट में कार्यभार ग्रहण किया। तब कक्षाएं पेड़ के नीचे लगती थीं। विद्यालय को देखकर लगा कि वह यहां काफी चीजें बेहतर कर सकती हैं। उन्होंने टूटी खिड़की और कमरों की मरम्मत कराई। दफ्तर को खुलवाकर साफ कराया। स्कूल के मुख्यद्वार पर बड़ा सा गेट लगवाया। कई अन्य सहूलियत भी उनकी वजह से स्कूल में कराई गईं।
अब बच्चों को खेल खेल में शिक्षण गतिविधियां कराई जा रही हैं। स्कूल में हैंडवाश सिस्टम, कमरों में टायल, विद्यालय प्रांगण में इंटरलॉकिंग की सुविधा जनप्रतिनिधियों के सहयोग से चंचल ने कराई है। लॉकडाउन के समय बच्चों को मोबाइल पर शिक्षा देने का काम किया। मोहल्ला पाठशाला भी चलाई। अब स्कूल का परिवेश से लेकर बच्चों का शिक्षा स्तर बेहतर हो चुका है। ग्रामीण भी इसके लिए चंचल उपाध्याय के सकारात्मक प्रयासों की सराहना करते हैं।
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चंचल उपाध्याय ने सहायक अध्यापिका पद से प्रमोशन के बाद 2015 में प्राथमिक विद्यालय कोट में कार्यभार ग्रहण किया। तब कक्षाएं पेड़ के नीचे लगती थीं। विद्यालय को देखकर लगा कि वह यहां काफी चीजें बेहतर कर सकती हैं। उन्होंने टूटी खिड़की और कमरों की मरम्मत कराई। दफ्तर को खुलवाकर साफ कराया। स्कूल के मुख्यद्वार पर बड़ा सा गेट लगवाया। कई अन्य सहूलियत भी उनकी वजह से स्कूल में कराई गईं।
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अब बच्चों को खेल खेल में शिक्षण गतिविधियां कराई जा रही हैं। स्कूल में हैंडवाश सिस्टम, कमरों में टायल, विद्यालय प्रांगण में इंटरलॉकिंग की सुविधा जनप्रतिनिधियों के सहयोग से चंचल ने कराई है। लॉकडाउन के समय बच्चों को मोबाइल पर शिक्षा देने का काम किया। मोहल्ला पाठशाला भी चलाई। अब स्कूल का परिवेश से लेकर बच्चों का शिक्षा स्तर बेहतर हो चुका है। ग्रामीण भी इसके लिए चंचल उपाध्याय के सकारात्मक प्रयासों की सराहना करते हैं।
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