Budaun: प्रथम श्रेणी में चार नंबरों से चूकी तो लगा ली फांसी, घरवालों ने कहा था- दोबारा चेक करा देंगे कॉपी
परिवार वालों के मुताबिक हर समय उसका पढ़ाई में ध्यान रहता था। इससे परिवार वाले उस पर भरोसा करते थे कि वह आगे चलकर कुछ कर सकती है। 18 जून को जब उसका रिजल्ट आया तो वह परेशान हो गई।
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फैजगंज बेहटा इलाके में फंदे से लटककर जान देने वाली छात्रा के केवल चार नंबर कम आए थे, जिससे उसकी प्रथम श्रेणी नहीं आ सकी। वह अपने गांव में सबसे होशियार थी। एक निजी स्कूल में पढ़ाती थी और कुछ बच्चों को ट्यूशन भी देती थी। परिवार वालों ने उसे आश्वासन दिया था कि उसकी कॉपी दोबारा चेक कराएंगे पर उसका अवसाद कम नहीं हुआ।
करीब 19 वर्षीय छात्रा के चार भाई और पांच बहनें हैं। छात्रा अपने भाइयों से छोटी और बहनों से बड़ी थी। उसके माता-पिता चंडीगढ़ में रहकर मजदूरी करते हैं जबकि तीन भाई दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं। इसके बावजूद परिवार वाले छात्रा को पढ़ा रहे थे। छात्रा के हाईस्कूल में 86 प्रतिशत नंबर आए थे।
परिवार वालों के मुताबिक हर समय उसका पढ़ाई में ध्यान रहता था। इससे परिवार वाले उस पर भरोसा करते थे कि वह आगे चलकर कुछ कर सकती है। 18 जून को जब उसका रिजल्ट आया तो वह परेशान हो गई। हिंदी में उसके 54 नंबर थे, गणित में 54, अंग्रेजी में 68, फिजिक्स में 58 और कैमिस्ट्री में 62 नंबर आए थे। कुल 296 नंबर आने से फर्स्ट डिवीजन में उसके केवल चार नंबर कम रह गए थे। इतनी पढ़ाई के बावजूद नंबर कम आने पर उसको काफी दुख पहुंचा था। परिवार वालों ने उसकी हालत देखकर यह आश्वासन भी दिया था कि उसकी कॉपी उसकी कॉपी दोबारा चेक कराएंगे, अंतत: उसने फंदा लगाकर जान दे दी।
प्यार करता था परिवार, इसलिए नहीं कराया पोस्टमार्टम
परिवार वाले छात्रा से बहुत प्यार करते थे। छात्रा सबका ध्यान रखती थी। घरेलू काम के बाद वह केवल पढ़ाई करती थी। इससे परिवार वालों को उससे कोई शिकायत नहीं थी। परिजन के अनुसार उसकी मौत के बाद वे पोस्टमार्टम से उसकी शरीर की दुर्गति नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने पोस्टमार्टम नहीं कराया और न ही पुलिस को इसकी सूचना दी।
कोरोना के कारण भी मानसिक बीमारियां बढ़ीं
बीते दो सालों में कोरोना काल के चलते मानसिक बीमारियों का प्रभाव कई गुना बढ़ गया है। इसका प्रमुख प्रभाव नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों पर हुआ है। स्कूल बंद होने के कारण उनकी पढ़ाई वैसे ही नहीं सुचारु रूप से नहीं चल पाई ऐसे में वे अभिभावकों के डर, साथियों के दबाव और भविष्य की अनिश्चितता के कारण अवसाद का शिकार हो गए। इसके साथ ही कम नंबर आने पर कई बच्चों के
आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचती है। उस पर भी यदि घर में अनुकूल वातावरण न हो तो और ज्यादा मुश्किल हो जाती है। इस घटना में भी संभवत: यही बात है। चार नंबर कम आने के कारण अवसाद में आकर छात्रा ने ऐसा कदम उठाया होगा।
- डॉ. नरवीर यादव, वरिष्ठ मनोचिकित्सक