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कैसे हो जांच, नियुक्ति पत्रावली कर दी गायब!
बदायूं।
Updated Sat, 27 Dec 2014 12:28 AM IST
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बेसिक विभाग में मृतक आश्रित के पद पर गलत चयन किए जाने के आरोप की बाबू पर चल रही जांच में भी घालमेल किए जाने के आरोप लगना शुरू हो गए हैं। विभागीय जानकारों की माने तो जांच को लटकाने के लिए नियुक्ति पत्रावली को ही गायब कर दिया गया है। इतना ही नहीं जांच अधिकारी को कागजात तक मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा अटकलें लगाने में लेखा विभाग का नाम आगे आ रहा है। हालांकि जांच अधिकारी जल्द ही इसमें आख्या बीएसए के समक्ष पेश करने का दावा भी कर रहे हैं।
बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग में एक व्यक्ति ने बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के पद पर गलत तरीके से चयन कर नौकरी देने का आरोप लगाया था। आरोप था कि कनिष्ठ लिपिक के पिता डायट में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे। जबकि उसकी माता प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका थीं। माता की मृत्यु के बाद बेटे को धोखाधड़ी कर लिपिक पद पर नौकरी दे दी गई। इसे देखते हुए बीएसए ने भी बीईओ सोमनाथ विश्वकर्मा को जांच अधिकारी नियुक्त कर इसमें जांच के आदेश दे दिए थे। आज इस प्रकरण को तीन महीने गुजरने को है, लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी। जानकार बताते हैं कि जांच को गुमराह करने के लिए इसमें घालमेल किया गया है। जांच अधिकारी को नियुक्ति पत्रावली ही मुहैया नहीं कराई गई हैं। आरोप है कि जांच अटकाने में सबसे ज्यादा रोल लेखा विभाग ने निभाया है। हालांकि जांच अधिकारी जल्द ही इसमें अपनी जांच आख्या सौंपने का दावा कर रहे हैं।
क्या बोले जांच अधिकारी
जांच अधिकारी बीईओ सोमनाथ विश्वकर्मा ने बताते हैं कि जांच को लेखा विभाग ने लटकाने में रोल निभाया है। कई बार दस्तावेज मांगने पर पूरे उपलब्ध नहीं कराए गए। कई पहलुओं को छुपाने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा नियुक्ति पत्रावली में शामिल सभी कागजात भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। स्पष्टीकरण भी कई सवाल खडे़ कर रहे हैं। बताया कि इसमें उनकी जांच अंतिम दौर की तरफ है, वह जल्द ही इसकी आख्या बीएसए के समक्ष सौंपेंगे।
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बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग में एक व्यक्ति ने बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के पद पर गलत तरीके से चयन कर नौकरी देने का आरोप लगाया था। आरोप था कि कनिष्ठ लिपिक के पिता डायट में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे। जबकि उसकी माता प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका थीं। माता की मृत्यु के बाद बेटे को धोखाधड़ी कर लिपिक पद पर नौकरी दे दी गई। इसे देखते हुए बीएसए ने भी बीईओ सोमनाथ विश्वकर्मा को जांच अधिकारी नियुक्त कर इसमें जांच के आदेश दे दिए थे। आज इस प्रकरण को तीन महीने गुजरने को है, लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी। जानकार बताते हैं कि जांच को गुमराह करने के लिए इसमें घालमेल किया गया है। जांच अधिकारी को नियुक्ति पत्रावली ही मुहैया नहीं कराई गई हैं। आरोप है कि जांच अटकाने में सबसे ज्यादा रोल लेखा विभाग ने निभाया है। हालांकि जांच अधिकारी जल्द ही इसमें अपनी जांच आख्या सौंपने का दावा कर रहे हैं।
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क्या बोले जांच अधिकारी
जांच अधिकारी बीईओ सोमनाथ विश्वकर्मा ने बताते हैं कि जांच को लेखा विभाग ने लटकाने में रोल निभाया है। कई बार दस्तावेज मांगने पर पूरे उपलब्ध नहीं कराए गए। कई पहलुओं को छुपाने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा नियुक्ति पत्रावली में शामिल सभी कागजात भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। स्पष्टीकरण भी कई सवाल खडे़ कर रहे हैं। बताया कि इसमें उनकी जांच अंतिम दौर की तरफ है, वह जल्द ही इसकी आख्या बीएसए के समक्ष सौंपेंगे।
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