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Budaun News: समितियों के चुनाव में भाजपा की जड़ें मजबूत, अब सभापति भी होंगे अपने
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- नामांकन के दौरान ही निर्विरोध चुन लिए गए सभी 1188 संचालक, सभापतियों का चुनाव 19 मार्च को होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। साधन सहकारी समिति के संचालक पद के चुनाव में इस बार भाजपा ने अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं। हालांकि कई ब्लॉक केंद्रों पर नोकझोंक से लेकर तमाम आरोप लगे, लेकिन उसका नतीजा कुछ नहीं निकला। सभी समितियों पर 1188 संचालक निर्विरोध चुन लिए गए हैं। यह सभी संचालक भाजपा के हैं। 19 मार्च को होने वाले चुनाव में सभापति और उपसभापति भी भाजपा के होंगे।
साधन सहकारी समिति का चुनाव पांच साल बाद हो रहा है। जनवरी 2018 में जब समितियों का चुनाव हुआ था तब नामांकन कराने के दौरान कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं लगे थे। लोगों ने पर्चा भरने से रोकने का भी आरोप नहीं लगाया था। लोगों ने अपनी इच्छा के अनुसार नामांकन कराया था। जिसके ज्यादा वोट पड़े थे वही निर्वाचित हुआ था। उस चुनाव में भी भाजपा का दावा था कि 90 फीसदी संचालक, सभापति और उपसभापति भाजपा के थे, जबकि दस फीसदी अन्य लोग चुने गए थे। तब यह चुनाव समितियों पर ही हुए थे, लेकिन इस बार समितियों के चुनाव ब्लॉक मुख्यालयों पर कराए गए। जिले में कुल 132 समितियां हैं। सभी समितियों पर नौ-नौ संचालक हैं। मंगलवार को सभी समितियों के 1188 संचालक निर्विरोध चुन लिए गए। हालांकि अभी इसका चुनाव नहीं हुआ है। संचालकों का चुनाव 18 मार्च को है। मंगलवार को केवल नामांकन हुआ था। उसमें ही सभी संचालक चुन लिए गए। सभी संचालक भाजपा के हैं। अब 19 मार्च को इन्हीं में से सभापति और उपसभापति आदि चुने जाएंगे। अब सभी सहकारी समितियों पर भाजपा का कब्जा हो गया है। इसमें कोई संचालक सपा या बसपा का नहीं है।
यह चुनाव नहीं लोकतंत्र की हत्या है : आशीष
सपा जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष यादव ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव नहीं है। चुनाव एक विधिवत तरीके से होता है। भाजपा को लोकतंत्र पर भरोसा नहीं रहा है। पहले समितियों पर चुनाव होता था। अब ब्लॉक पर इकट्ठा कर लिया। पुलिस लगा दी। किसी को घुसने नहीं दिया। पर्चा भरने नहीं दिया। रसीदें नहीं दीं। इस संबंध में उन्होंने डीएम से भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस चुनाव को रद्द करके वोटिंग कराई जाए तो चुनाव होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। साधन सहकारी समिति के संचालक पद के चुनाव में इस बार भाजपा ने अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं। हालांकि कई ब्लॉक केंद्रों पर नोकझोंक से लेकर तमाम आरोप लगे, लेकिन उसका नतीजा कुछ नहीं निकला। सभी समितियों पर 1188 संचालक निर्विरोध चुन लिए गए हैं। यह सभी संचालक भाजपा के हैं। 19 मार्च को होने वाले चुनाव में सभापति और उपसभापति भी भाजपा के होंगे।
साधन सहकारी समिति का चुनाव पांच साल बाद हो रहा है। जनवरी 2018 में जब समितियों का चुनाव हुआ था तब नामांकन कराने के दौरान कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं लगे थे। लोगों ने पर्चा भरने से रोकने का भी आरोप नहीं लगाया था। लोगों ने अपनी इच्छा के अनुसार नामांकन कराया था। जिसके ज्यादा वोट पड़े थे वही निर्वाचित हुआ था। उस चुनाव में भी भाजपा का दावा था कि 90 फीसदी संचालक, सभापति और उपसभापति भाजपा के थे, जबकि दस फीसदी अन्य लोग चुने गए थे। तब यह चुनाव समितियों पर ही हुए थे, लेकिन इस बार समितियों के चुनाव ब्लॉक मुख्यालयों पर कराए गए। जिले में कुल 132 समितियां हैं। सभी समितियों पर नौ-नौ संचालक हैं। मंगलवार को सभी समितियों के 1188 संचालक निर्विरोध चुन लिए गए। हालांकि अभी इसका चुनाव नहीं हुआ है। संचालकों का चुनाव 18 मार्च को है। मंगलवार को केवल नामांकन हुआ था। उसमें ही सभी संचालक चुन लिए गए। सभी संचालक भाजपा के हैं। अब 19 मार्च को इन्हीं में से सभापति और उपसभापति आदि चुने जाएंगे। अब सभी सहकारी समितियों पर भाजपा का कब्जा हो गया है। इसमें कोई संचालक सपा या बसपा का नहीं है।
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यह चुनाव नहीं लोकतंत्र की हत्या है : आशीष
सपा जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष यादव ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव नहीं है। चुनाव एक विधिवत तरीके से होता है। भाजपा को लोकतंत्र पर भरोसा नहीं रहा है। पहले समितियों पर चुनाव होता था। अब ब्लॉक पर इकट्ठा कर लिया। पुलिस लगा दी। किसी को घुसने नहीं दिया। पर्चा भरने नहीं दिया। रसीदें नहीं दीं। इस संबंध में उन्होंने डीएम से भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस चुनाव को रद्द करके वोटिंग कराई जाए तो चुनाव होगा।
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