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Budaun News: जिला अस्पताल में बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब, जांच प्रभावित...लौटाए जा रहे मरीज
Wed, 03 Jul 2024 04:59 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Wed, 03 Jul 2024 04:59 AM IST
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जिला अस्पताल में जांच के इंतजार में बैठे लोग। संवाद
बदायूं। जिला अस्पताल की पैथोलाॅजी में लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन करीब एक माह से खराब है। इसकी वजह से थायराइड फंक्शन टेस्ट (टीएफटी) और लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) समेत कई जांचें प्रभावित हो रही हैं। वहीं, बड़ी तो यह है कि लैब टेक्नीशियन ने इंजीनियर व सीएमएस को मशीन खराब होने तक की सूचना नहीं दी है। मरीज पहले तो कतार में खड़े होकर जांच के लिए पंजीकरण कराते हैं पर जब जांच के काउंटर पर पहुंचते हैं तो मशीन खराब होने की जानकारी देकर उन्हें लौटना पड़ता है।
मरीजों की लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), कोलेस्ट्रॉल जांच (लिपिड प्रोफाइल), शुगर व शरीर में इंफेक्शन (ईएसआर) आदि जांचें होती हैं। मशीन में आई खराबी के कारण यह जांचें नहीं हो रही हैं। सबसे अधिक दिक्कत हेपेटाइटिस पीड़ित मरीजों को हो रही है। एलएफटी और टीएफटी जांच के बिना तो इनका इलाज भी शुरू नहीं हो पाता है। अगर अस्पताल से बाहर जांच कराएं तो 700 रुपये खर्च होंगे। जिनकी जेब में रुपये नहीं हैं वे जांच नहीं कराते और इलाज में देरी हो जाती है। इसका असर उनकी सेहत पर पड़ता है।
जिला अस्पताल में इस मशीन से रोजाना करीब 150 से 200 जांचें होती हैं, लेकिन मशीन खराब होने से मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। लैब टेक्नीशियन आमिर निहाल ने न ही इंजीनियर को बुलाने की जहमत उठाई और न ही सीएमएस को मशीन खराब होने की जानकारी दी है। दूसरी ओर मरीजों का कहना था कि अगर जांचें नहीं हो रही हैं तो पंजीकरण की कतार में न लगवाएं। अगर कोई सूचना चस्पा करते तो वे कम से कम भटकने से तो बच जाते।
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हेपेटाइटिस सी के अंदेशे में जिला अस्पताल के नौ नंबर कमरे में बैठे डॉक्टर एसएम कमल को दिखाया। उन्होंने जांच लिख दी। पहले तो पंजीकरण की कतार में लगे और जब जांच काउंटर पर आए तो मशीन खराब होने की बात बताई है। अब कहीं प्राइवेट में जाकर ही जांच करानी होगी। सोनू सागर, लधेड़ा बिसौली।
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किडनी और लिवर फंक्शन की जांच करानी थी लेकिन जिला अस्पताल में एक माह से चक्कर लगा रहे हैं और जांच नहीं हो पा रही है। मशीन खराब बताई गई है। कब तक इंतजार किया जाए, प्राइवेट में जांच कराना मजबूरी है। रफत अली, जतकी सहसवान।
पैथोलाॅजी में लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब होने की जानकारी कर्मचारियों द्वारा नहीं दी गई है। अगर एक माह से मशीन खराब है तो उसको ठीक करा दिया गया होता। किसी मरीज ने भी कार्यालय आकर इस तरह की शिकायत नहीं की है। अगर जांच नहीं हो रहीं हैं तो इसको जानकारी करता हूं। यह भी जानकारी लेंगे सूचना क्यों नहीं दी गई। डॉ. कप्तान सिंह, जिला अस्पताल, सीएमएस
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मरीजों की लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), कोलेस्ट्रॉल जांच (लिपिड प्रोफाइल), शुगर व शरीर में इंफेक्शन (ईएसआर) आदि जांचें होती हैं। मशीन में आई खराबी के कारण यह जांचें नहीं हो रही हैं। सबसे अधिक दिक्कत हेपेटाइटिस पीड़ित मरीजों को हो रही है। एलएफटी और टीएफटी जांच के बिना तो इनका इलाज भी शुरू नहीं हो पाता है। अगर अस्पताल से बाहर जांच कराएं तो 700 रुपये खर्च होंगे। जिनकी जेब में रुपये नहीं हैं वे जांच नहीं कराते और इलाज में देरी हो जाती है। इसका असर उनकी सेहत पर पड़ता है।
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जिला अस्पताल में इस मशीन से रोजाना करीब 150 से 200 जांचें होती हैं, लेकिन मशीन खराब होने से मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। लैब टेक्नीशियन आमिर निहाल ने न ही इंजीनियर को बुलाने की जहमत उठाई और न ही सीएमएस को मशीन खराब होने की जानकारी दी है। दूसरी ओर मरीजों का कहना था कि अगर जांचें नहीं हो रही हैं तो पंजीकरण की कतार में न लगवाएं। अगर कोई सूचना चस्पा करते तो वे कम से कम भटकने से तो बच जाते।
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हेपेटाइटिस सी के अंदेशे में जिला अस्पताल के नौ नंबर कमरे में बैठे डॉक्टर एसएम कमल को दिखाया। उन्होंने जांच लिख दी। पहले तो पंजीकरण की कतार में लगे और जब जांच काउंटर पर आए तो मशीन खराब होने की बात बताई है। अब कहीं प्राइवेट में जाकर ही जांच करानी होगी। सोनू सागर, लधेड़ा बिसौली।
किडनी और लिवर फंक्शन की जांच करानी थी लेकिन जिला अस्पताल में एक माह से चक्कर लगा रहे हैं और जांच नहीं हो पा रही है। मशीन खराब बताई गई है। कब तक इंतजार किया जाए, प्राइवेट में जांच कराना मजबूरी है। रफत अली, जतकी सहसवान।
पैथोलाॅजी में लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब होने की जानकारी कर्मचारियों द्वारा नहीं दी गई है। अगर एक माह से मशीन खराब है तो उसको ठीक करा दिया गया होता। किसी मरीज ने भी कार्यालय आकर इस तरह की शिकायत नहीं की है। अगर जांच नहीं हो रहीं हैं तो इसको जानकारी करता हूं। यह भी जानकारी लेंगे सूचना क्यों नहीं दी गई। डॉ. कप्तान सिंह, जिला अस्पताल, सीएमएस