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‘बिन पइसा कइसे बवंगे बीज’
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2016 11:17 PM IST
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इसे गरीब किसान की नादानी कहें या मजबूरी, लेकिन शासन की ओर से कृषि बीज खरीद के तहत मिलने वाली सब्सिडी उन लोगों से दूर होती जा रही है। किसान राजकीय बीज केंद्रों से बीज न खरीदकर हुए निजी कृषि बीज भंडारों से बीज खरीद रहे हैं। किसानों को मालूम है कि निजी दुकानों से उन लोगों को सब्सिडी नहीं मिलेगी, लेकिन फिर भी उन्हीं दुकानों से धान, मक्का, उर्द, मूंग के बीज खरीद रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि निजी दुकानों से उन लोगों को न तो पूरे रुपये नगद देने होते हैं और राजकीय केंद्रों की तुलना में बीज भी सस्ता मिल जाता है। निजी कृषि बीज केंद्रों पर विभिन्न प्रकार के बीजों की वैरायटी मिल जाती हैं और सब्सिडी के लिए शासन की वाट नहीं जोहनी पड़ती है। इस संबंध में किसानों से बात की ता उन लोगों ने अपना दर्द बयां किया।
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फोटो-08
खेत मालिक के बैंक खाते में जाती सब्सिडी
उझानी क्षेत्र के किसान सत्यवीर सिंह ने बताया कि गांव में तमाम किसान ऐसे होते हैं, जिनके नाम पर खेत नहीं होता है। वे लोग बटाई और उगाही पर खेती करते हैं। ऐसे में बीज तो वे लोग खरीदते हैं, लेकिन सब्सिडी खेत मालिक के बैंक खाते में जाती है। साथ ही धनराशि पहले जमा करनी पड़ती है। निजी केंद्रों पर उधार भी मिल जाता है। साथ ही सस्ता भी मिल जाता है।
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फोटो-09
विभिन्न वैरायटी का मिलता सस्ता बीज
उझानी क्षेत्र के ग्रामीण किसान संतराम सिंह यादव ने कहा कि राजकीय बीज केंद्रों पर सीमित वैरायटी के बीज मिलते हैं। उन्नतशील और बेहतर उत्पादन के लिए निजी दुकानों और कुछ एजेंटों से बीज खरीद लेते हैं। इससे न तो बीज पर मिलने वाली सब्सिडी का झंझट रहता है और वहां की तुलना में बीज भी सस्ता मिल जाता है। इसके बाद भी चार छह रुपये किलो का अंतर आता है तो उसे मजबूरी में सहना पड़ता है।
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जमकर बिक रहा सरवती धान
शहर के लॉवेला चौक पर एग्रो एजेंसी के मालिक मोहित गर्ग का कहना है कि तमाम ग्राहक उनके बहुत पुराने हैं, जो बीज ले जाते हैं। उन लोगों को काफी उधार भी देना पड़ता है, जो फसल कटने पर मिल जाता है। राजकीय बीज केंद्रों पर केवल हाईब्रिड बीज मिलता है, जबकि उनके यहां सरवती सहित धान में तमाम प्रकार के बीज हैं। वहीं मक्का में भी तमाम वैरायटी के बीज उपलब्ध हैं, लेकिन सबसे अधिक धान सरवती बीज बिक रहा है।
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खेत मालिक के बैंक खाते में जाती सब्सिडी
उझानी क्षेत्र के किसान सत्यवीर सिंह ने बताया कि गांव में तमाम किसान ऐसे होते हैं, जिनके नाम पर खेत नहीं होता है। वे लोग बटाई और उगाही पर खेती करते हैं। ऐसे में बीज तो वे लोग खरीदते हैं, लेकिन सब्सिडी खेत मालिक के बैंक खाते में जाती है। साथ ही धनराशि पहले जमा करनी पड़ती है। निजी केंद्रों पर उधार भी मिल जाता है। साथ ही सस्ता भी मिल जाता है।
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विभिन्न वैरायटी का मिलता सस्ता बीज
उझानी क्षेत्र के ग्रामीण किसान संतराम सिंह यादव ने कहा कि राजकीय बीज केंद्रों पर सीमित वैरायटी के बीज मिलते हैं। उन्नतशील और बेहतर उत्पादन के लिए निजी दुकानों और कुछ एजेंटों से बीज खरीद लेते हैं। इससे न तो बीज पर मिलने वाली सब्सिडी का झंझट रहता है और वहां की तुलना में बीज भी सस्ता मिल जाता है। इसके बाद भी चार छह रुपये किलो का अंतर आता है तो उसे मजबूरी में सहना पड़ता है।
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जमकर बिक रहा सरवती धान
शहर के लॉवेला चौक पर एग्रो एजेंसी के मालिक मोहित गर्ग का कहना है कि तमाम ग्राहक उनके बहुत पुराने हैं, जो बीज ले जाते हैं। उन लोगों को काफी उधार भी देना पड़ता है, जो फसल कटने पर मिल जाता है। राजकीय बीज केंद्रों पर केवल हाईब्रिड बीज मिलता है, जबकि उनके यहां सरवती सहित धान में तमाम प्रकार के बीज हैं। वहीं मक्का में भी तमाम वैरायटी के बीज उपलब्ध हैं, लेकिन सबसे अधिक धान सरवती बीज बिक रहा है।