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छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म में पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को उम्रकैद

Sun, 31 Oct 2021 11:54 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 31 Oct 2021 11:54 PM IST
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बदायूं में पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को कोर्ट से जेल ले जाती पुलिस। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूूं। छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के 13 साल पहले के मामले में स्पेशल जज एमपी एमएलए कोर्ट अखिलेश कुमार ने भाजपा विधायक कुशाग्र सागर के पिता बसपा के पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में शामिल दो आरोपियों को पहले ही सन 2014 में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
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बिल्सी कस्बे के एक व्यक्ति ने 23 अप्रैल 2008 को थाना पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी बेटी नगर के एक डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह अपनी सहेली के घर नोट्स लेने गई थी। तब से उसका कुछ पता नहीं चल रहा है। थाना पुलिस ने न तो छात्रा को तलाश किया था और न ही उसकी गुमशुदगी दर्ज की। इस पर पिता ने एक मई 2008 को दोबारा पत्र दिया। इस पर पुलिस ने छात्रा की गुमशुदगी दर्ज की। चार मई को यह मामला अपहरण में तरमीम किया गया। 17 मई को पुलिस ने छात्रा को मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन से बरामद करना बताया। जब परिवार वाले छात्रा से मिले तो उन्हें पता चला कि उसका अपहरण नीरज शर्मा उर्फ मीनू, तेजेंद्र सागर ने दो अज्ञात लोगों के साथ मिलकर किया था। उसे नशा सुंघाकर लखनऊ में तत्कालीन बिल्सी के विधायक योगेंद्र सागर के आवास पर ले जाया गया। जहां कई दिन तक उसे नशा देकर रखा गया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था।
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इस मामले में छात्रा ने बयान दिया था कि नीरज उर्फ मीनू शर्मा, तेजेंद्र सागर और पूर्व विधायक योगेंद्र सागर (तब बसपा विधायक) ने भी दुष्कर्म किया। 16 जुलाई 2014 को न्यायालय ने नीरज और तेजेंद्र सागर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी क्रम में शनिवार को न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मदनलाल राजपूत, वकील अरविंद शर्मा और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को मुजरिम ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का आदेश दिया है।
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पूर्व विधायक को उम्रकैद : न्यायाधीश ने यह की टिप्पणी
बदायूं। न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक केस का उदाहरण देते हुए जिक्र किया कि यदि अपराध समाज के विरुद्ध या किसी पीड़ित पक्ष के विरुद्ध हैं तो ऐसे मामले में कोर्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि कोर्ट परिस्थितियों के अनुकूल उचित दंड दे। यदि उचित दंड नहीं दिया जाता है तो न्यायालय अपने पथ से भटक जाएगा। समाज व जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। यदि न्यायालय पीड़ित पक्ष का संरक्षण नहीं करेगा तो ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति स्वयं बदला लेने के मार्ग अपनाएगा और ऐसे मामलों में एक असहाय पीड़ित लड़की से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि वह राजनीतिक पहुंच वाले लोगों के इस कृत्य का विरोध कर पाएगी। क्योंकि वह सामान्यता विरोध करने की स्थिति में नहीं हो सकती। उन्हें लगता है कि अदालत के निर्णय से पीड़ित को न्याय मिला है। संवाद

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पीड़ित पक्ष बोला : न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था
बदायूं। पीड़ित छात्रा के भाई ने कहा न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था। योगेंद्र सागर ने अत्याचार किया था उसकी उनको सजा मिली है। हालांकि, न्याय के लिए हमारे परिवार को 13 साल की लंबी न्यायिक लड़ाई लड़नी पड़ी है। अत्याचारी को सजा मिलने से मानसिक सुकून मिला है। कोर्ट के इस फैसले से लोगों का न्याय पालिका पर भरोसा बढ़ेगा। संवाद
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