बरेली: लॉटरी के बिना भूखंड का किया आवंटन, बीडीए को लौटाने होंगे 1.44 लाख रुपये
जिला उपभोक्ता आयोग ने बीडीए को लॉटरी के बिना भूखंड आवंटन पर 1.44 लाख रुपये छह फीसदी ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। प्राधिकरण को 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के लिए भी देने होंगे।
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बरेली में लॉटरी के बिना भूखंड आवंटन के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को बकाया राशि (1.44 लाख) का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने का आदेश दिया है। क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय के लिए भी 15 हजार रुपये का भुगतान प्राधिकरण को करना होगा।
अधिवक्ता नवदीप सिंह ग्रेवाल ने आयोग में वाद दायर कर बताया कि उन्होंने आठ जनवरी 2025 को ग्रेटर बरेली आवासीय योजना के सेक्टर-3 स्थित कैलाश एन्क्लेव में 162 वर्गमीटर के भूखंड के लिए 5,75,100 रुपये पंजीकरण राशि बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा की थी। योजना में 200 विकसित भूखंडों का आवंटन लॉटरी के आधार पर किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन लॉटरी नहीं कराई गई। उन्हें ऐसा भूखंड दिया गया, जिसमें पार्क और सड़क की सुविधा नहीं थी।
उन्होंने दूसरा भूखंड मांगा, लेकिन प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की। उनकी जमा राशि में से 25 प्रतिशत यानी 1,43,775 रुपये काटकर 4,31,325 रुपये लौटा दिए। शिकायत में 1,43,775 रुपये 10 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने के साथ ही क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय की मांग की गई थी। नोटिस के बावजूद प्राधिकरण की ओर से कोई पैरवी नहीं की गई।
रिकॉर्ड के आधार पर आयोग ने माना कि लॉटरी की तारीख तय किए जाने के बावजूद भूखंडों का आवंटन लॉटरी के बिना किया गया। आयोग ने जमा धनराशि का केवल 75 प्रतिशत लौटाए जाने को भी उचित नहीं पाया। सुनवाई के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया है।
गैंगस्टर एक्ट के दो दोषियों को तीन-तीन साल की कैद
स्पेशल जज संतोष कुमार यादव ने गैंगस्टर एक्ट के दोषी आंवला थाना क्षेत्र के गांव तुमड़िया निवासी महेंद्र और नंदन को तीन-तीन साल की कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर दोषियों को एक-एक माह अतिरिक्त कैद में रहना होगा।
सिरौली थाने के तत्कालीन प्रभारी गजेंद्र त्यागी ने 31 जुलाई 2017 को महेंद्र और नंदन के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। इनमें स्वतंत्र गवाह भी शामिल रहे। आरोपियों के गैंगचार्ट भी अदालत के समक्ष रखे गए। समाज में भय फैलाकर व अवैध कार्याें के जरिये अर्जित संपत्ति के साक्ष्य भी दिए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए कैद व जुर्माने की सजा सुनाई।