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चुनावी दौर के बजट से हर वर्ग को उम्मीदें
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बदायूं। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट और पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच मंगलवार को केंद्र सरकार का सालाना बजट आ रहा है। बजट से लोगों को उम्मीदें हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि बजट में चुनाव के कारण लोक लुभावन घोषणाएं जरूर हो सकती हैं। बजट पर कोरोना का असर साफ दिखेगा। टैक्स स्लैब में बदलाव होने की ज्यादा उम्मीद नहीं है। सरकार महंगाई पर काबू के लिए कुछ कदम जरूर उठा सकती है। बजट को लेकर आम लोगों से बात की गई तो उन्होंने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।
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कोरोना के असर से अभी अर्थ व्यवस्था का उबरना बाकी
अर्थ व्यवस्था से अभी कोरोना का असर दूर नहीं हुआ है। हालांकि, अर्थ व्यवस्था पटरी पर आ रही है। राजस्व के रूप में सरकार को पिछले वर्ष के मुकाबले अब ज्यादा टैक्स मिल रहा है। कोरोना काल में आम आदमी की बैलेंस शीट बिगड़ी हुई है। काफी लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। बजट से ज्यादा उम्मीदें नहीं की जा सकतीं। हालांकि, पांच राज्यों में चुनाव का असर बजट पर दिख सकता है। संकट के इस दौर में विदेश में जैसे प्रोत्साहन पैकेज आ रहे हैं, उसी तरह लोगों को भारत में भी उम्मीदें हैं। संभावनाओं की बात करें, तो महंगाई पर काबू, बेरोजगारी दूर करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
- केबी रस्तोगी, टैक्स कंसलटेंट
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कोरोना वायरस के नए वैरिएंट और बढ़ती महंगाई के बीच अर्थव्यवस्था को सपोर्ट देने के लिए सरकार को बजट 2022 में जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। ऐसे समय में एक संतुलित बजट सरकार के लिए चुनौती से कम नहीं होगा। बजट ऐसे समय में आ रहा है जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस लिए बजट में लोक लुभावन घोषणाओं को नकारा नहीं जा सकता। करकानूनों का सरलीकरण, बैंक ऋण मिलने में सुविधा, निर्माण लागत में कमी, आयकर में छूट जैसी आशाएं बजट से हैं। इसके साथ ही कर का दायरा बढ़ाने और काला धन रोकने के उपाय भी बजट में किए जा सकते हैं।
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-अश्विन गोयल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
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महंगाई से हर वर्ग परेशान है। एक ओर कोरोना संक्रमण और दूरी ओर महंगाई। सरकार को चाहिए कि बजट में महंगाई पर काबू के लिए ठोस कदम उठाए। लोक लुभावनी घोषणाएं तो हर बार होती हैं, लेकिन यह धरातल पर आएं और इसका लाभ लोगों को मिले तो बेहतर होगा। -गुलाब सिंह, सेवानिवृत्त कर्मचारी
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बजट से हर वर्ग को उम्मीद होती है, लेकिन यह उम्मीदें पूरी नहीं होतीं। वरिष्ठ नागरिक हों या नौकरपेशा, मजदूर हो या फिर किसान वर्ग बजट का असर सभी पर पड़ता है। इस समय महंगाई और बेरोजगारी बड़ी समस्या है। कोरोना काल में तमाम लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं।
-डॉ. एए फारूकी, चिकित्सक
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महिलाओं को घर संभालना होता है। महंगाई का असर सबसे ज्यादा महिलाओं पर ही होता है। सरकार घोषणाएं तमाम करती है। यह बात सही है कि कुछ काम भी हो रहे हैं, लेकिन महंगाई पर ठोस काबू के लिए कुछ खास करने की जरूरत है। रसोई गैस सिलिंडर एक हजार का हो गया है।
-अनीता रस्तोगी, गृहिणी
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बेहतर और सस्ती शिक्षा के साथ रोजगार के अवसरों के लिए भी सरकार को कदम उठाने चाहिए। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। युवा वर्ग को अगर रोजगार नहीं मिलेगा तो इससे देश को भी नुकसान है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार के लिए कदम उठाने चाहिए।
-खुशी, छात्रा
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बेरोजगारी पहले से ही थी, कोरोना काल में तमाम लोगों की नौकरी चली जाने के कारण बेरोजगारी और बढ़ गई है। बेरोजगारी के साथ महंगाई भी बढ़ी है। सरकार को महंगाई और बेरोजगारी पर काबू के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बेरोजगारी बढ़ने से अपराध भी बढ़ता है।
- इशांत शर्मा, अधिवक्ता
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महंगाई काफी बढ़ रही है। स्कूल-कॉलेज कोरोना काल में बंद हैं, इसके बाद भी फीस वसूली जा रही है। कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ने के साथ अभिभावकों की आर्थिक स्थिति पर भी असर हुआ है। बजट में सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे कुछ सुधार हो।
-कन्हैया, छात्र
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महंगाई पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। महंगाई का असर हर वर्ग पर होता है। डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस, खाने-पीने की चीजों और खाद्य तेल के दाम आसमान पर हैं। चुनाव के दौरान बजट आ रहा है। इस बार उम्मीद है कि सरकार कुछ अच्छा करे।
-नीतू सचदेवा, गृहिणी
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सरकार को सिर्फ अपने वायदों पर ही अमल कर लेना चाहिए। महंगाई पर नियंत्रण और बेरोजगारी दूर करने का वायदा याद करना चाहिए। बजट में घोषणाएं तो हर बार होती हैं, लेकिन धरातल पर कब आती हैं। कोरोना काल के दौरान बजट से ज्यादा उम्मीद बेमानी है।
-नेहा छाबड़ा, समाजसेवी
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किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा इसी सरकार ने किया था। किसान सम्मान निधि देकर सरकार ने अच्छा किया, लेकिन सम्मान निधि कितने किसानों को मिल रही है। खेती-किसानी करने वाले मजदूरों के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए। गरीबी तभी दूर होगी।
-अनिल सागर, किसान
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किसानों ने एक साल तक मांगों को लेकर आंदोलन किया था। किसानों को सस्ता कर्ज मिले, समय से खाद-बीज और फसल का सही मूल्य मिले तो किसान को कहीं हाथ फैलाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार किसानों के लिए वायदे तो हर बार करती है, लेकिन काम नहीं होता।
- रघुवीर, किसान
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कोरोना काल में व्यापारी वर्ग की कमर टूटी हुई है। इस बीच जीएसटी की पेचीदगियों और बार-बार बढ़ रहे स्टैक स्लैब से और भी परेशानी हो रही है। सरकार को बजट में व्यापारी वर्ग का ध्यान रखते हुए जीएसटी के सरलीकरण और टैक्स की पेचीदगियों को दूर करना चाहिए।
-पूरन प्रसाद साहू, मेंथा व्यापारी
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कोरोना के असर से अभी अर्थ व्यवस्था का उबरना बाकी
अर्थ व्यवस्था से अभी कोरोना का असर दूर नहीं हुआ है। हालांकि, अर्थ व्यवस्था पटरी पर आ रही है। राजस्व के रूप में सरकार को पिछले वर्ष के मुकाबले अब ज्यादा टैक्स मिल रहा है। कोरोना काल में आम आदमी की बैलेंस शीट बिगड़ी हुई है। काफी लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। बजट से ज्यादा उम्मीदें नहीं की जा सकतीं। हालांकि, पांच राज्यों में चुनाव का असर बजट पर दिख सकता है। संकट के इस दौर में विदेश में जैसे प्रोत्साहन पैकेज आ रहे हैं, उसी तरह लोगों को भारत में भी उम्मीदें हैं। संभावनाओं की बात करें, तो महंगाई पर काबू, बेरोजगारी दूर करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
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कोरोना वायरस के नए वैरिएंट और बढ़ती महंगाई के बीच अर्थव्यवस्था को सपोर्ट देने के लिए सरकार को बजट 2022 में जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। ऐसे समय में एक संतुलित बजट सरकार के लिए चुनौती से कम नहीं होगा। बजट ऐसे समय में आ रहा है जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस लिए बजट में लोक लुभावन घोषणाओं को नकारा नहीं जा सकता। करकानूनों का सरलीकरण, बैंक ऋण मिलने में सुविधा, निर्माण लागत में कमी, आयकर में छूट जैसी आशाएं बजट से हैं। इसके साथ ही कर का दायरा बढ़ाने और काला धन रोकने के उपाय भी बजट में किए जा सकते हैं।
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-अश्विन गोयल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
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महंगाई से हर वर्ग परेशान है। एक ओर कोरोना संक्रमण और दूरी ओर महंगाई। सरकार को चाहिए कि बजट में महंगाई पर काबू के लिए ठोस कदम उठाए। लोक लुभावनी घोषणाएं तो हर बार होती हैं, लेकिन यह धरातल पर आएं और इसका लाभ लोगों को मिले तो बेहतर होगा। -गुलाब सिंह, सेवानिवृत्त कर्मचारी
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बजट से हर वर्ग को उम्मीद होती है, लेकिन यह उम्मीदें पूरी नहीं होतीं। वरिष्ठ नागरिक हों या नौकरपेशा, मजदूर हो या फिर किसान वर्ग बजट का असर सभी पर पड़ता है। इस समय महंगाई और बेरोजगारी बड़ी समस्या है। कोरोना काल में तमाम लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं।
-डॉ. एए फारूकी, चिकित्सक
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महिलाओं को घर संभालना होता है। महंगाई का असर सबसे ज्यादा महिलाओं पर ही होता है। सरकार घोषणाएं तमाम करती है। यह बात सही है कि कुछ काम भी हो रहे हैं, लेकिन महंगाई पर ठोस काबू के लिए कुछ खास करने की जरूरत है। रसोई गैस सिलिंडर एक हजार का हो गया है।
-अनीता रस्तोगी, गृहिणी
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बेहतर और सस्ती शिक्षा के साथ रोजगार के अवसरों के लिए भी सरकार को कदम उठाने चाहिए। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। युवा वर्ग को अगर रोजगार नहीं मिलेगा तो इससे देश को भी नुकसान है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार के लिए कदम उठाने चाहिए।
-खुशी, छात्रा
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बेरोजगारी पहले से ही थी, कोरोना काल में तमाम लोगों की नौकरी चली जाने के कारण बेरोजगारी और बढ़ गई है। बेरोजगारी के साथ महंगाई भी बढ़ी है। सरकार को महंगाई और बेरोजगारी पर काबू के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बेरोजगारी बढ़ने से अपराध भी बढ़ता है।
- इशांत शर्मा, अधिवक्ता
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महंगाई काफी बढ़ रही है। स्कूल-कॉलेज कोरोना काल में बंद हैं, इसके बाद भी फीस वसूली जा रही है। कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ने के साथ अभिभावकों की आर्थिक स्थिति पर भी असर हुआ है। बजट में सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे कुछ सुधार हो।
-कन्हैया, छात्र
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महंगाई पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। महंगाई का असर हर वर्ग पर होता है। डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस, खाने-पीने की चीजों और खाद्य तेल के दाम आसमान पर हैं। चुनाव के दौरान बजट आ रहा है। इस बार उम्मीद है कि सरकार कुछ अच्छा करे।
-नीतू सचदेवा, गृहिणी
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सरकार को सिर्फ अपने वायदों पर ही अमल कर लेना चाहिए। महंगाई पर नियंत्रण और बेरोजगारी दूर करने का वायदा याद करना चाहिए। बजट में घोषणाएं तो हर बार होती हैं, लेकिन धरातल पर कब आती हैं। कोरोना काल के दौरान बजट से ज्यादा उम्मीद बेमानी है।
-नेहा छाबड़ा, समाजसेवी
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किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा इसी सरकार ने किया था। किसान सम्मान निधि देकर सरकार ने अच्छा किया, लेकिन सम्मान निधि कितने किसानों को मिल रही है। खेती-किसानी करने वाले मजदूरों के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए। गरीबी तभी दूर होगी।
-अनिल सागर, किसान
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किसानों ने एक साल तक मांगों को लेकर आंदोलन किया था। किसानों को सस्ता कर्ज मिले, समय से खाद-बीज और फसल का सही मूल्य मिले तो किसान को कहीं हाथ फैलाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार किसानों के लिए वायदे तो हर बार करती है, लेकिन काम नहीं होता।
- रघुवीर, किसान
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कोरोना काल में व्यापारी वर्ग की कमर टूटी हुई है। इस बीच जीएसटी की पेचीदगियों और बार-बार बढ़ रहे स्टैक स्लैब से और भी परेशानी हो रही है। सरकार को बजट में व्यापारी वर्ग का ध्यान रखते हुए जीएसटी के सरलीकरण और टैक्स की पेचीदगियों को दूर करना चाहिए।
-पूरन प्रसाद साहू, मेंथा व्यापारी