फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   badaun 145 vidhan sabha 2022, bisauli 142 vidhan sabha 2022, sahaswan 143 vidhan sabha 2022, bilsi 144 vidhan sabha 2022, shekhupur 146 vidhan sabha 2022, dataganj 147 vidhan sabha 2022

गढ़ में नहीं दिया साथ तो हारे दिग्गज...कमजोर पड़ता देख पलट गए खास वोटर

Sun, 13 Mar 2022 11:36 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2022 11:36 PM IST
विज्ञापन
badaun 145 vidhan sabha 2022, bisauli 142 vidhan sabha 2022, sahaswan 143 vidhan sabha 2022, bilsi 144 vidhan sabha 2022, shekhupur 146 vidhan sabha 2022, dataganj 147 vidhan sabha 2022
अमित सक्सेना
विज्ञापन

बदायूं। भितरघात, अपनों की बेरुखी और मजबूती को लेकर वोटरों के मन में पनपे संशय ने चुनाव जीतने जा रहे दिग्गजों की बाजी पलट दी। सहसवान और शेखूपुर के भाजपा प्रत्याशी अपने गढ़ों में साथ न मिलने से चुनाव हार गए। शेखूपुर के बसपा प्रत्याशी को भी उनके घर ककराला में उन वोटरों का साथ नहीं मिला जिन्होंने उनकी पत्नी को वहां पालिका का अध्यक्ष बना रखा है। मुस्लिम की हार के साथ ही भाजपा प्रत्याशी की हार भी जुड़ गई। हार के चर्चित मामलों को लेकर कहां क्या समीकरण रहे, आप भी जानिए।
-
उघैती-इस्लामनगर से बढ़त ली, सहसवान-दहगवां में हारे डीके
भाजपा को सहसवान विधानसभा में पहली बार ऐतिहासिक 66166 मत मिले पर आखिरी दौर में प्रत्याशी डीके भारद्वाज पिछड़कर तीसरे नंबर पर आ गए। डीके को जब टिकट मिला तो उन्हें कमजोर प्रत्याशी के तौर पर आंका जा रहा था। खुद डीके ने बिल्सी सीट से टिकट मांगा था पर वहां हरीश शाक्य को टिकट मिल गया। आरके शर्मा जिले में एक ब्राह्मण चेहरा देने की वजह से उन्हें सहसवान से टिकट थमा दिया गया। डीके ने यहां मेहनत की जिसके नतीजे कुछ ही दिनों में दिखने लगे। चुनाव से सप्ताह भर पहले डीके इस कदर मजबूत हो चुके थे कि उनकी जीत को लेकर शर्तें लगने लगीं। मतगणना में भी दोपहर बाद तक डीके नंबर एक पर रहे और फिर पिछड़ते चले गए। पता लगा कि वह सहसवान विधानसभा के तीन मंडलों में बुरी तरह पिछड़ गए। डीके का चुनाव लड़ा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं शरद कुमार गुप्ता, प्रवीण गुप्ता, ब्रजेश सिंह व विष्णु पाठक आदि ने समीक्षा में पाया कि इस्लामनगर व उघैती मंडल में डीके को 38500 वोट मिले और वह तेजी से आगे निकल गए। इसके बाद जब सहसवान नगर, सहसवान देहात व दहगवां मंडल के वोट खुले तो सपा और बसपा हावी हो गईं। डीके समर्थक इस मामले में पार्टी के ही एक कद्दावर नेता व कुछ रणनीतिकारों पर आरोप लगा रहे हैं। कहते हैं कि भाजपा का उन तीनों मंडलों में जबर्दस्त वोट है पर जानबूझकर सपा को हर बार वोट डलवाया जाता है। 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष भोला को भी इस्लामनगर व उघैती मंडल में 22000 वोट मिले थे पर बाकी तीन मंडल में 2115 वोट ही मिल सके।
विज्ञापन

-
ककराला के गढ़ में ठिठका हाथी तो मुस्लिम के संग पप्पू भी फेल
भाजपा की शेखूपुर सीट से प्रत्याशी धर्मेंद्र शाक्य उर्फ पप्पू करीब एक लाख वोट मिलने के बाद भी सपा प्रत्याशी हिमांशु यादव से हार गए। दरअसल पप्पू की जीत बसपा प्रत्याशी हाजी मुस्लिम खां की मजबूती पर निर्भर कर रही थी। इसी क्षेत्र (उसहैत विधानसभा) से बसपा के विधायक रह चुके मुस्लिम खां चुनाव से दो दिन पहले मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण से बेहद कमजोर पड़ गए और 35 हजार का आंकड़ा भी न छू सके। मुस्लिम खां ककराला के निवासी हैं। नगर पालिका ककराला की चेयरमैन उनकी पत्नी परवीन मुस्लिम हैं। मुस्लिम परिवार का अल्पसंख्यक बाहुल्य ककराला में बड़ा जनाधार है पर जब मुस्लिम वोटरों ने उन्हें भाजपा को हराने लायक नहीं माना तो सपा के हिमांशु को वोट कर दिया। ककराला में मुस्लिम को करीब तीन हजार और भाजपा प्रत्याशी को ढाई हजार वोट मिल सके। जबकि सपा के हिमांशु बारह हजार से ज्यादा वोट ले गए। चर्चा है कि ककराला से मिली लीड ने ही हिमांशु को हारी बाजी जीतने में मदद दी। इधर, वारहे नाम से मशहूर यादव बाहुल्य बारह गांवों में पिछले चुनाव में भाजपा को वोट मिला था जो इस बार नहीं मिला। धर्मेंद्र शाक्य को सजातीय शाक्य वोट भी पूरा नहीं मिला और महान दल के गठबंधन की वजह से सपा की ओर चला गया। यही कारण रहा कि भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
फोटो- 32
साइकिल टांगकर कुशाग्र के विरोधियों ने की थी पूजा
बिसौली विधानसभा से एक लाख से ज्यादा वोट पाकर भी मौजूदा विधायक कुशाग्र सागर महज पंद्रह सौ वोटों से हार गए। यह स्थिति भी अनायास नहीं बनी। आसफपुर और दबतोरी क्षेत्र के कई गांवों में भाजपा से जुड़े सवर्ण वोटर भी उनसे नाराज चल रहे थे। ठाकुरों में नाराजगी थी कि कुशाग्र के कार्यकाल में एससी एक्ट के सर्वाधिक मामले उन लोगों पर दर्ज हुए। कुछ गांवों के लोग अपने यहां विकास न होने का मुद्दा बनाए बैठे थे। चौंकाने वाला घटनाक्रम भी मतदान से पहले हुआ था। कुछ ग्रामीणों ने आसफपुर रेलवे स्टेशन के पास एक धार्मिक स्थल पर सपा प्रत्याशी आशुतोष मौर्या की जीत के लिए हवन पूजन और भंडारे का आयोजन किया था। कई दिन चले पूजन के दौरान उन्होंने 50 फुट लंबे लोहे के पाइप के ऊपर साइकिल को टांग दिया था और नीचे हवन किया था। खुद आशुतोष मौर्या भी समर्थकों की इस दीवानगी से हैरत में थे। जीत के बाद उन्होंने कहा भी कि समर्थकों का अटूट प्यार और आस्था उन्हें जिता ले गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed