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नायब तहसीलदार-किरायेदार में नोकझोंक, समिति का गोदाम नहीं हो पाया कब्जामुक्त
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उझानी (बदायूं)। सहकारी क्रय-विक्रय समिति के गोदाम पर कब्जे का मामला बृहस्पतिवार को भी नहीं सुलझ पाया। डीएम के आदेश पर पूर्वाह्न में नायब तहसीलदार जीतेश वर्मा राजस्व कर्मियों और समिति के सचिव के साथ मौके पर पहुंचे तो दूसरे पक्ष ने खुद को किरायेदार बताते हुए अभिलेख पेश करने के लिए समय की मांग रख दी। इसे लेकर नायब तहसीलदार और किरायेदार में नोकझोंक भी हो गई। इसके चलते गोदाम कब्जामुक्त नहीं हो पाया।
समिति के गोदाम को खाली कराने के लिए सचिव रामेंद्र शर्मा ने पिछले दिनों डीएम कुमार प्रशांत को पत्र सौंपा था। पत्र सौंपने से पहले समिति ने गोदाम पर नोटिस भी चस्पा किया था लेकिन निर्धारित समय में जब कब्जा बेदखल नहीं हुआ तो डीएम के आदेश पर बृहस्पतिवार नायब तहसीलदार जीतेश वर्मा राजस्व कर्मियों की टीम लेकर मौके पर पहुंच गए। उनके साथ समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा और सचिव भी थे। दूसरे पक्ष से राधाकृष्ण यादव ने खुद को किरायेदार बताते हुए अफसरों के सामने अपना पक्ष रखा। इसी दौरान नायब तहसीलदार और किरायेदार के बीच हल्की नोकझोंक भी हो गई। राधाकृष्ण ने अफसरों को बताया कि उनके पास किराये से जुड़े अभिलेख है जो अधिवक्ता के पास रखे हैं। जबकि सचिव ने अभिलेखों को फर्जी करार दिया। बताया कि गोदाम सरस्वती ज्ञान मंदिर के लिए किराये पर दिया गया था लेकिन उसकी शिक्षा समिति ने किराये की शर्तों को पूरा नहीं किया। इधर, नायब तहसीलदार का कहना है कि दूसरे पक्ष को किराये से जुड़े अभिलेख पेश करने की मोहलत दी गई है। अभिलेख देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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समिति के गोदाम को खाली कराने के लिए सचिव रामेंद्र शर्मा ने पिछले दिनों डीएम कुमार प्रशांत को पत्र सौंपा था। पत्र सौंपने से पहले समिति ने गोदाम पर नोटिस भी चस्पा किया था लेकिन निर्धारित समय में जब कब्जा बेदखल नहीं हुआ तो डीएम के आदेश पर बृहस्पतिवार नायब तहसीलदार जीतेश वर्मा राजस्व कर्मियों की टीम लेकर मौके पर पहुंच गए। उनके साथ समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा और सचिव भी थे। दूसरे पक्ष से राधाकृष्ण यादव ने खुद को किरायेदार बताते हुए अफसरों के सामने अपना पक्ष रखा। इसी दौरान नायब तहसीलदार और किरायेदार के बीच हल्की नोकझोंक भी हो गई। राधाकृष्ण ने अफसरों को बताया कि उनके पास किराये से जुड़े अभिलेख है जो अधिवक्ता के पास रखे हैं। जबकि सचिव ने अभिलेखों को फर्जी करार दिया। बताया कि गोदाम सरस्वती ज्ञान मंदिर के लिए किराये पर दिया गया था लेकिन उसकी शिक्षा समिति ने किराये की शर्तों को पूरा नहीं किया। इधर, नायब तहसीलदार का कहना है कि दूसरे पक्ष को किराये से जुड़े अभिलेख पेश करने की मोहलत दी गई है। अभिलेख देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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