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Budaun News: समस्याओं के निदान के लिए आशा कर्मियों ने किया प्रदर्शन
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डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में धरने पर बैठी आशाएं वर्कर। संवाद
- फोटो : doda news
बदायूं। उप्र आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन के बैनर तले आशाओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में धरना प्रदर्शन किया। इसमें जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी केंद्रों पर आशा कर्मियों ने कामकाज ठप रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगी।
जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने कहा कि सरकार आशा कर्मियों की जायज मांगों पर चुप्पी साधे बैठी है। चार माह से प्रोत्साहन राशि और अन्य पारिश्रमिक बकाया है। पिछले एक दशक में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि गायब हो गई है, जिस पर सरकार और एनएचएम चुप हैं।
आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की आयुष्मान भारत योजना के तहत 225.2 करोड़ रुपये की अदायगी लंबित है। वहीं, पिछले 25 वर्षों में महंगाई के अनुरूप प्रोत्साहन राशि में कोई पुनरीक्षण नहीं किया गया और न ही न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआई या ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। जिला सचिव मुनीषा ने कहा कि दो लाख रुपये का जीवन बीमा अनुमन्य है, फिर भी अब तक किसी आशा कर्मी को बीमा लाभ नहीं मिला। प्रतिवर्ष काम पर आते-जाते दर्जनों आशा कर्मियों की मृत्यु हो जाती है।
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कहा कि छह अक्तूबर को आशा कर्मी लखनऊ में एकत्र होकर सरकार से त्रिपक्षीय वार्ता की मांग कर चुके हैं। लेकिन सरकार ने अनसुनी कर दी, जिसके विरोध में यह एक दिवसीय हड़ताल रखी गई। अगर अब भी वार्ता नहीं हुई तो यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को विवश होगी। इस मौके पर चंद्रकांता, रितेश, भूदेवी, नन्नी देवी, रजनी, नजमी, रेखा रानी, पुष्पा देवी, कमलेश, अलका रानी, साजिदा बेगम आदि मौजूद रही।
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जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने कहा कि सरकार आशा कर्मियों की जायज मांगों पर चुप्पी साधे बैठी है। चार माह से प्रोत्साहन राशि और अन्य पारिश्रमिक बकाया है। पिछले एक दशक में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि गायब हो गई है, जिस पर सरकार और एनएचएम चुप हैं।
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आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की आयुष्मान भारत योजना के तहत 225.2 करोड़ रुपये की अदायगी लंबित है। वहीं, पिछले 25 वर्षों में महंगाई के अनुरूप प्रोत्साहन राशि में कोई पुनरीक्षण नहीं किया गया और न ही न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआई या ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। जिला सचिव मुनीषा ने कहा कि दो लाख रुपये का जीवन बीमा अनुमन्य है, फिर भी अब तक किसी आशा कर्मी को बीमा लाभ नहीं मिला। प्रतिवर्ष काम पर आते-जाते दर्जनों आशा कर्मियों की मृत्यु हो जाती है।
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कहा कि छह अक्तूबर को आशा कर्मी लखनऊ में एकत्र होकर सरकार से त्रिपक्षीय वार्ता की मांग कर चुके हैं। लेकिन सरकार ने अनसुनी कर दी, जिसके विरोध में यह एक दिवसीय हड़ताल रखी गई। अगर अब भी वार्ता नहीं हुई तो यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को विवश होगी। इस मौके पर चंद्रकांता, रितेश, भूदेवी, नन्नी देवी, रजनी, नजमी, रेखा रानी, पुष्पा देवी, कमलेश, अलका रानी, साजिदा बेगम आदि मौजूद रही।