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गर्मियां शुरू होने से पहले ही अरिल सूखी, सिमट गई रामगंगा
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बदायूं/ दातागंज। अभी गर्मियों का सीजन ठीक से शुरू नहीं हुआ, उससे पहले ही जल संकट गहराने लगा है। तहसील क्षेत्र में ज्यादातर तालाब सूख गए हैं। अरिल नदी में कहीं-कहीं पर ही पानी दिख रहा है। रामगंगा भी सिमटकर रह गई है। इससे तेजी से भू जलस्तर घट रहा है।
दातागंज तहसील से होकर रामगंगा और अरिल नदी गुजरती है। अरिल नदी भी रामगंगा का ही हिस्सा है। बरेली से यह नदी रामगंगा से निकलती है और करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय कर दातागंज होते हुए हजरतपुर के गांव रम्पुरा के पास रामगंगा में फिर से मिल जाती है। करीब 30 किलोमीटर का बराह नाला भी है। यह नाला रोहरी, लाखन नगला, चनाखेड़ा, कुड़रा, बेला, नेता झुकसा आदि गांवों से होकर निकलता है। इसके अलावा सैकड़ों बड़े तालाब भी यहां हैं। यूं तो अरिल नदी में हमेशा जलधारा बहती थी, लेकिन इस बार अभी से धारा थम गई है। अरिल सूख रही है, नदी में कुछ ही स्थानों पर गड्डों में पानी बचा है। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव पापड़ के पास स्थित ब्रह्मदेव मंदिर के पास कभी पानी नहीं सूखता था। इस बार वहां भी धारा थमी हुई है।
इधर, रामगंगा का जलस्तर काफी कम हो गया है। रामगंगा काफी सिमट गई है। कुछ गहराई वाले स्थानों की बात छोड़ दें तो बमुश्किल तीन से चार फीट जलस्तर ही बचा है। तालाबों की स्थिति भी खराब है। इससे न केवल वन्य जीवों के सामने पीने के पानी का संकट पैदा होने लगा है बल्कि खेती-किसानी भी मुश्किल हो रही है। भूजल स्तर भी तेजी से गिर रहा है। तहसील क्षेत्र के तालाबों की भी कमोबेश यही दशा है। ज्यादातर तालाब सूख गए हैं। काफी तालाबों पर कब्जे हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर मार्च में नदियों और तालाबों की यह स्थिति है तो मई-जून में तालाब काफी बदतर हो जाएंगे।
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मैरी बजर मैरी और कमल वाला तालाब भी सूखा
करीब 150 एकड़ में फैला कमल वाला तालाब भी सूख गया है। अनदेखी के कारण तालाब की काफी भूमि पर तो फसल हो रही है। यही स्थिति मैरी बजर मैरी तालाब की भी है। यह तालाब करीब 200 एकड़ में है। इसमें भी पानी नहीं है। समरेर से भुड़ेली तक फैले समरेर तालाब में कुछ पानी बचा है, लेकिन यहां तालाब की काफी भूमि पर कब्जा हो गया है। इस तालाब का मछली पालन के लिए पट्टा तो होता है, लेकिन तालाब की भूमि से कब्जा हटवाने की ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। कमल वाला तालाब और मैरी बजर मैरी तालाब में काफी तादाद में जलीय जीव भी रहा करते थे। इनमें मछलियों के साथ कछुए भी थे। तालाब सूखने से यह जलीय जीव भी विलुप्त हो गए हैं।
शहर से होकर गुजर रही सोत की हालत भी खस्ता
बदायूं। केवल दातागंज ही नहीं शहर से होकर गुजर रही सोत की हालत भी खस्ता हो चुकी है। यहां जगह-जगह कब्जे हो चुके हैं। कई इमारतें भी इसके किनारे पर बनवाकर कब्जे किए गए थे। पूर्व डीएम दिनेश कुमार सिंह के समय में यहां पर कब्जों को धराशायी कर दिया गया था, लेकिन उसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उनके बाद पूर्व डीएम कुमार प्रशांत ने भी सोत के पुनर्जीवन के लिए प्रयास किए लेकिन वह भी फलीभूत नहीं हो पाए। अब सोत यहां पर एक नाले के जैसी ही दिखाई देती है।
अगर तालाबों पर कहीं कब्जा है तो हटवाया जाएगा। कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। वन्य जीवों को पानी उपलब्ध रहे, इसके लिए सर्वे कराने के बाद तालाबों को भरवाया जाएगा। जल संरक्षण के प्रति सभी को जागरूक होने की जरूरत है।
- पारसनाथ मौर्य, एसडीएम, दातागंज
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दातागंज तहसील से होकर रामगंगा और अरिल नदी गुजरती है। अरिल नदी भी रामगंगा का ही हिस्सा है। बरेली से यह नदी रामगंगा से निकलती है और करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय कर दातागंज होते हुए हजरतपुर के गांव रम्पुरा के पास रामगंगा में फिर से मिल जाती है। करीब 30 किलोमीटर का बराह नाला भी है। यह नाला रोहरी, लाखन नगला, चनाखेड़ा, कुड़रा, बेला, नेता झुकसा आदि गांवों से होकर निकलता है। इसके अलावा सैकड़ों बड़े तालाब भी यहां हैं। यूं तो अरिल नदी में हमेशा जलधारा बहती थी, लेकिन इस बार अभी से धारा थम गई है। अरिल सूख रही है, नदी में कुछ ही स्थानों पर गड्डों में पानी बचा है। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव पापड़ के पास स्थित ब्रह्मदेव मंदिर के पास कभी पानी नहीं सूखता था। इस बार वहां भी धारा थमी हुई है।
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इधर, रामगंगा का जलस्तर काफी कम हो गया है। रामगंगा काफी सिमट गई है। कुछ गहराई वाले स्थानों की बात छोड़ दें तो बमुश्किल तीन से चार फीट जलस्तर ही बचा है। तालाबों की स्थिति भी खराब है। इससे न केवल वन्य जीवों के सामने पीने के पानी का संकट पैदा होने लगा है बल्कि खेती-किसानी भी मुश्किल हो रही है। भूजल स्तर भी तेजी से गिर रहा है। तहसील क्षेत्र के तालाबों की भी कमोबेश यही दशा है। ज्यादातर तालाब सूख गए हैं। काफी तालाबों पर कब्जे हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर मार्च में नदियों और तालाबों की यह स्थिति है तो मई-जून में तालाब काफी बदतर हो जाएंगे।
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मैरी बजर मैरी और कमल वाला तालाब भी सूखा
करीब 150 एकड़ में फैला कमल वाला तालाब भी सूख गया है। अनदेखी के कारण तालाब की काफी भूमि पर तो फसल हो रही है। यही स्थिति मैरी बजर मैरी तालाब की भी है। यह तालाब करीब 200 एकड़ में है। इसमें भी पानी नहीं है। समरेर से भुड़ेली तक फैले समरेर तालाब में कुछ पानी बचा है, लेकिन यहां तालाब की काफी भूमि पर कब्जा हो गया है। इस तालाब का मछली पालन के लिए पट्टा तो होता है, लेकिन तालाब की भूमि से कब्जा हटवाने की ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। कमल वाला तालाब और मैरी बजर मैरी तालाब में काफी तादाद में जलीय जीव भी रहा करते थे। इनमें मछलियों के साथ कछुए भी थे। तालाब सूखने से यह जलीय जीव भी विलुप्त हो गए हैं।
शहर से होकर गुजर रही सोत की हालत भी खस्ता
बदायूं। केवल दातागंज ही नहीं शहर से होकर गुजर रही सोत की हालत भी खस्ता हो चुकी है। यहां जगह-जगह कब्जे हो चुके हैं। कई इमारतें भी इसके किनारे पर बनवाकर कब्जे किए गए थे। पूर्व डीएम दिनेश कुमार सिंह के समय में यहां पर कब्जों को धराशायी कर दिया गया था, लेकिन उसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उनके बाद पूर्व डीएम कुमार प्रशांत ने भी सोत के पुनर्जीवन के लिए प्रयास किए लेकिन वह भी फलीभूत नहीं हो पाए। अब सोत यहां पर एक नाले के जैसी ही दिखाई देती है।
अगर तालाबों पर कहीं कब्जा है तो हटवाया जाएगा। कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। वन्य जीवों को पानी उपलब्ध रहे, इसके लिए सर्वे कराने के बाद तालाबों को भरवाया जाएगा। जल संरक्षण के प्रति सभी को जागरूक होने की जरूरत है।
- पारसनाथ मौर्य, एसडीएम, दातागंज