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Budaun News: आरटीई के तहत दूसरे चरण के आवेदन शुरू
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बदायूं। जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत दूसरे चरण के आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत 21 फरवरी से 9 मार्च तक अभिभावक अपने बच्चों के निशुल्क प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। अब तक 109 लोगों ने आवेदन किया।
जिले में दूसरे चरण में अब तक 109 अभिभावकों ने आवेदन किया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में आवेदन की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो। अभिभावकों को आवेदन के दौरान आय प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, बच्चे की आयु से संबंधित दस्तावेज और पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करना अनिवार्य है।
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दस्तावेजों में त्रुटि पाए जाने पर आवेदन निरस्त भी किया जा सकता है। पहले चरण में जिन अभिभावकों के बच्चों का चयन नहीं हो सका था, उनके लिए दूसरा चरण एक और मौका लेकर आया है। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि आवेदन अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते पूरा कर लें। अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बता दें कि आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं, जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।
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जिले में दूसरे चरण में अब तक 109 अभिभावकों ने आवेदन किया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में आवेदन की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो। अभिभावकों को आवेदन के दौरान आय प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, बच्चे की आयु से संबंधित दस्तावेज और पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करना अनिवार्य है।
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दस्तावेजों में त्रुटि पाए जाने पर आवेदन निरस्त भी किया जा सकता है। पहले चरण में जिन अभिभावकों के बच्चों का चयन नहीं हो सका था, उनके लिए दूसरा चरण एक और मौका लेकर आया है। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि आवेदन अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते पूरा कर लें। अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बता दें कि आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं, जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।