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नलकूप की हौदिया में डूबकर बालक की मौत
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मृतक विजय। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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कुंवरगांव (बदायूं)। हसनपुर गांव में चार साल के बालक विजय की नलकूप की हौदिया में डूबकर मौत हो गई। विजय के पिता टिंकू उसे नलकूप की चार फुट गहरी हौदिया की मुंडेर पर बैठाकर खेत में शौच के लिए चले गए थे। लौटकर आए तो वह वहां नहीं था। बाद में तलाश करने पर वह हौदिया में गिरा मिला। उसे डॉक्टर के यहां ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
हादसा कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव हसनपुर का है। गांव निवासी खेमपाल उर्फ टिंकू हरियाणा में परिवार के साथ रहकर मजदूरी करते हैं। टिंकू होली पर गांव आए थे। सोमवार सुबह वह अपने चार वर्षीय पुत्र विजय के साथ खेत पर शौच के लिए गए थे। जहां उन्होंने अपने बेटे को निजी नलकूप की हौदिया की मुंडेर पर बैठा दिया। वह खेत में शौच के लिए चले गए। कुछ देर बाद जब वह लौटे तो उन्हें बेटा नजर नहीं आया। बाद में तलाश करने पर वह हौदिया में गिरा मिला। परिवार वालों ने उसे निकाला और कस्बे के निजी डॉक्टर के यहां ले गए। जहां से उसे बदायूं भेज दिया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिवार वालों ने उसके शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया।
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गरीब है खेमपाल का परिवार
टिंकू की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। उनके तीन बेटे हैं, जिनमें विजय सबसे छोटा है। बड़ा बेटा योगेश (10) और मझला बेटा अनिल (7) है। उनके नाम खेतीबाड़ी नहीं है। वह हरियाणा में मजदूरी करके परिवार का गुजारा कर रहे हैं। वह सोमवार को ही वापस जाने की तैयारी कर रहे थे। इससे पहले यह हादसा हो गया।
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घर में शौचालय होता तो बच जाती मासूम की जान
दो साल पहले जिले को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है। शासन से हर गरीब को घर में इज्जतघर बनाने को धनराशि मिल चुकी है लेकिन आज भी खेमपाल इस योजना का लाभ नहीं ले पाए हैं। इससे उनके घर में शौचालय नहीं बना है। अगर शौचालय होता तो शायद विजय का परिवार खेतों में नहीं जाता और उसकी मौत नहीं होती। संवाद
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हादसा कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव हसनपुर का है। गांव निवासी खेमपाल उर्फ टिंकू हरियाणा में परिवार के साथ रहकर मजदूरी करते हैं। टिंकू होली पर गांव आए थे। सोमवार सुबह वह अपने चार वर्षीय पुत्र विजय के साथ खेत पर शौच के लिए गए थे। जहां उन्होंने अपने बेटे को निजी नलकूप की हौदिया की मुंडेर पर बैठा दिया। वह खेत में शौच के लिए चले गए। कुछ देर बाद जब वह लौटे तो उन्हें बेटा नजर नहीं आया। बाद में तलाश करने पर वह हौदिया में गिरा मिला। परिवार वालों ने उसे निकाला और कस्बे के निजी डॉक्टर के यहां ले गए। जहां से उसे बदायूं भेज दिया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिवार वालों ने उसके शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया।
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गरीब है खेमपाल का परिवार
टिंकू की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। उनके तीन बेटे हैं, जिनमें विजय सबसे छोटा है। बड़ा बेटा योगेश (10) और मझला बेटा अनिल (7) है। उनके नाम खेतीबाड़ी नहीं है। वह हरियाणा में मजदूरी करके परिवार का गुजारा कर रहे हैं। वह सोमवार को ही वापस जाने की तैयारी कर रहे थे। इससे पहले यह हादसा हो गया।
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घर में शौचालय होता तो बच जाती मासूम की जान
दो साल पहले जिले को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है। शासन से हर गरीब को घर में इज्जतघर बनाने को धनराशि मिल चुकी है लेकिन आज भी खेमपाल इस योजना का लाभ नहीं ले पाए हैं। इससे उनके घर में शौचालय नहीं बना है। अगर शौचालय होता तो शायद विजय का परिवार खेतों में नहीं जाता और उसकी मौत नहीं होती। संवाद