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आधार कार्ड मामला : सीएम के हस्तक्षेप पर आरती को मिला दाखिला
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बदायूं में प्रभारी प्रधानाध्यापिका के पास बेटी का दाखिला कराने पहुंची मधु। संवाद
- फोटो : BADAUN
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लखनऊ/बदायूं। बदायूं जिले के बिल्सी क्षेत्र की बच्ची आरती को आखिरकार प्राथमिक स्कूल में दाखिला मिल ही गया। मीडिया में आई खबरों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप पर ऐसा संभव हो सका। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अब दावा कर रहे हैं कि नामांकन दो अप्रैल को कर लिया था, वजीफा व अन्य सहूलियत के लिहाज से अपडेट आधार कार्ड मांगा गया था।
सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही विभिन्न अखबारों ने भी खबर प्रकाशित की थी। इसमें जिक्र था कि बिल्सी तहसील के रायपुर गांव निवासी दिनेश व उनकी पत्नी मधु अपनी बेटी आरती का दाखिला कराने प्राथमिक विद्यालय रायपुर गए थे। आरोप था कि वहां सहायक अध्यापिका एकता वार्ष्णेय ने आरती को प्रवेश देने से इनकार कर दिया। बताया गया कि हरियाणा प्रांत में बनवाए गए बच्ची के आधार कार्ड पर नाम की जगह ‘मधु का पांचवा बच्चा’ लिखा था। शासन की ओर से की गई पड़ताल में भी यही बात सामने आई। शिक्षिका ने दिनेश को आरती का आधार कार्ड दुरुस्त करने को कहा था। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने पर उन्होंने तुरंत विभाग को आरती को स्कूल में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए। सीएम के निर्देश के बाद आरती को स्कूल में पहली कक्षा में प्रवेश मिल गया।
मंगलवार को मधु अपनी बेटी आरती का दाखिला कराने स्कूल पहुंचीं। वहां प्रधानाध्यापिका सीमा रानी व सहायक अध्यापिका एकता वार्ष्णेय ने उन्हें सम्मानपूर्वक बैठाया और हरसंभव सहूलियत देने की बात कही। यहां मीडियाकर्मी पहुंचे तो सीमा रानी ने स्कूल का रजिस्टर दिखाकर सफाई दी कि उन्होंने दो अप्रैल को ही नामांकन कर लिया था। हालांकि आरती को छात्रवृत्ति व अन्य सहूलियतें बिना आधारकार्ड के नहीं मिल सकती थीं, इसलिए उसे सही कराने को कह दिया था।
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हमने प्रधानाध्यापिका सीमा रानी व सहायक अध्यापक एकता वार्ष्णेय से मामले की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बच्ची का दाखिला तभी ले लिया गया था। आधार कार्ड में गड़बड़ थी, उसके संशोधन की बात कही थी। संबंधित विद्यालय में अब तक पांच नए नामांकन किए जा चुुके हैं। किसी प्रमाण पत्र या कागजात के न होने के कारण किसी छात्र या छात्रा को प्रवेश के लिए मना नहीं किया जा सकता।
- डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
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सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही विभिन्न अखबारों ने भी खबर प्रकाशित की थी। इसमें जिक्र था कि बिल्सी तहसील के रायपुर गांव निवासी दिनेश व उनकी पत्नी मधु अपनी बेटी आरती का दाखिला कराने प्राथमिक विद्यालय रायपुर गए थे। आरोप था कि वहां सहायक अध्यापिका एकता वार्ष्णेय ने आरती को प्रवेश देने से इनकार कर दिया। बताया गया कि हरियाणा प्रांत में बनवाए गए बच्ची के आधार कार्ड पर नाम की जगह ‘मधु का पांचवा बच्चा’ लिखा था। शासन की ओर से की गई पड़ताल में भी यही बात सामने आई। शिक्षिका ने दिनेश को आरती का आधार कार्ड दुरुस्त करने को कहा था। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने पर उन्होंने तुरंत विभाग को आरती को स्कूल में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए। सीएम के निर्देश के बाद आरती को स्कूल में पहली कक्षा में प्रवेश मिल गया।
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मंगलवार को मधु अपनी बेटी आरती का दाखिला कराने स्कूल पहुंचीं। वहां प्रधानाध्यापिका सीमा रानी व सहायक अध्यापिका एकता वार्ष्णेय ने उन्हें सम्मानपूर्वक बैठाया और हरसंभव सहूलियत देने की बात कही। यहां मीडियाकर्मी पहुंचे तो सीमा रानी ने स्कूल का रजिस्टर दिखाकर सफाई दी कि उन्होंने दो अप्रैल को ही नामांकन कर लिया था। हालांकि आरती को छात्रवृत्ति व अन्य सहूलियतें बिना आधारकार्ड के नहीं मिल सकती थीं, इसलिए उसे सही कराने को कह दिया था।
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हमने प्रधानाध्यापिका सीमा रानी व सहायक अध्यापक एकता वार्ष्णेय से मामले की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बच्ची का दाखिला तभी ले लिया गया था। आधार कार्ड में गड़बड़ थी, उसके संशोधन की बात कही थी। संबंधित विद्यालय में अब तक पांच नए नामांकन किए जा चुुके हैं। किसी प्रमाण पत्र या कागजात के न होने के कारण किसी छात्र या छात्रा को प्रवेश के लिए मना नहीं किया जा सकता।
- डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए