फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   A promise made on martyrdom Forgot the honorable

शहादत पर किए गए वायदे भी भूल गए माननीय

Tue, 30 Jun 2015 08:25 PM IST
badaun
badaun Updated Tue, 30 Jun 2015 08:25 PM IST
विज्ञापन

कारगिल के युद्ध में एक जुलाई 1999 को दुश्मनों से मोर्चा लेते हुए 9 पैरा रेजीमेंट के लांस नायक हरिओम सिंह देश की रक्षा की खातिर शहीद हो गये थे । कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले लांस नायक हरि ओमसिंह की बुधवार को 16वीं पुण्यतिथि है। शहादत के समय शासन-प्रशासन ने तमाम वायदे किए थे, लेकिन उनके गांव की हालत बदतर है। जिला प्रशासन ही नहीं जनप्रतिनिधियों ने उनके गांव के प्रति संवेदनहीनता और उदासीनता दिखाई है। उस समय किए गए वायदे भी माननीय भूल चुके हैं।

विज्ञापन

बिसौली तहसील के बगरैन कस्बे के नजदीक गांव इटउआ निवासी महिपाल सिंह के पुत्र हरिओम सिंह कारगिल युद्ध में पाक सैनिकों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गये थे। देश की खातिर जान गंवाने वाले इस रणबांकुरे की अब जनप्रतिनिधियों को याद तक नहीं आती है। उनका समाधि स्थल उपेक्षित पड़ा है। उसकी बाउंड्री तक नहीं कराई गई है। बैठने को बेंच तक नहीं है। इटउआ को शहीद हरिओम सिंह का नाम तो दिया गया, लेकिन डेढ़ दशक से गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं कराया गया है ।
विज्ञापन

गांव आने को सैदपुर-करेंगी मार्ग से मुडिया-इटउआ मार्ग में गहरे गड्ढे हैं। अब जर्जर मार्ग आवागमन लायक भी नहीं रहा है। शहीद के समाधि स्थल पर तत्कालीन बिनावर विधानसभा के विधायक रामसेवक सिंह की अध्यक्षता में प्रदेश के नेताओं, मंत्रियों द्वारा शिलान्यास के नाम पर रखे गए पत्थर लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

बता दें कि उनकी प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन श्रम राज्यमंत्री धर्मपाल सिंह ने 28 अगस्त 2000 में किया था। समाधि स्थल के उद्यान की सुरक्षा दीवार व मुडिया से इट्उआ तक हरिओम सिंह नगर मार्ग का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने 24 नवंबर 2001 में किया था। पूर्व शिक्षा मंत्री डा. नैपाल सिंह ने शहीद के परिजनों द्वारा दी गई भूमि पर इंटर कॉलेज की आधारशिला रखी थी। इंटर कॉलेज तो खुला नहीं, लेकिन वर्ष 2003 में पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरूर खोल दिया गया। विद्यालय की चहारदीवारी भी टूटी है। शौचालय टूटे पडे़ हैं। गांव में विकास कार्य ठप हैं। शहीद के परिवार को नौकरी देने, अस्पताल, इंटर कॉलेज खुलवाने के वादे भुला दिए गए हैं। इस उपेक्षा से परिजन व क्षेत्रवासी आहत हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed