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Budaun News: 20 लाख की आबादी... एक वेंटिलेटर के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं
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जिला अस्पताल के बंद वार्ड में रखे वेंटिलेटर पर जमी धूल। संवाद
- फोटो : संवाद
बदायूं। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं एक वेंटिलेटर के सहारे चल रही हैं। जिला और महिला अस्पताल को मिले वेंटिलेटर कमरे में बंद कर दिए गए हैं। उसका उपयोग नहीं किया गया और वह धूल फांक रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक वेंटिलेटर लगा है, उस पर ही 20 लाख की आबादी को सेवा देने का भार है। वहीं कोरोना काल में जिले को मिले चार वेंटिलेटर बरेली भेज दिए गए थे।
जिला और महिला अस्पताल व सीएचसी में वेंटिलेटर न होने के कारण प्रतिदिन 20 से 25 गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इसलिए सिर में गंभीर चोट, हार्ट अटैक सहित अन्य गंभीर रोगों के मरीज निजी अस्पतालों में जाने को विवश हैं। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि जिला अस्पताल और सीएचसी के लिए कोरोना काल में खरीदे गए करीब 60 लाख रुपये के 16 वेंटिलेटर कमरे में कैद कर दिए गए हैं। इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। केवल राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक वेंटिलेटर चल रहा है।
जिला और महिला अस्पताल में रखे वेंटिलेटर को चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं। इसे चलवाने के लिए अस्पताल की ओर से पहल भी नहीं की गई है। अगर यह चल रहे होते तो आम आदमी को बड़ी राहत मिलती। निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर का खर्च बहुत महंगा है। वहां का खर्च आम आदमी नहीं उठा पाता, इसलिए कई मरीज बिना इलाज के ही दम तोड़ दे रहे हैं। अब दिल्ली में कोरोना का मरीज मिलने पर जिला अलर्ड मोड में आ गया है। सीएमओ ने सभी डॉक्टरों को सतर्क कर दिया है। लेकिन वेंटिलेटर ही नहीं है तो यह कैसे कोरोना से लड़ पाएंगे।
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वार्ड आईसीयू, वेंटिलेटर है ही नहीं
जिला अस्पताल में चार वेंटिलेटर कमरे में रखे गए हैं। आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर नहीं लगाया गया है। इस वार्ड में सिलिंडर से ही ऑक्सीजन मरीज को दी जा रही है।
कोरोना कॉल में खरीदे गए थे वेंटिलेटर
कोरोना काल में तीन बार में 16 वेंटिलेटर खरीदे गए थे। इनमें नार्मल, फेस मास्क और मैकेनिकल वेंटिलेटर शामिल हैं। नार्मल श्रेणी के वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ से सवा दो लाख रुपये, फेस मास्क श्रेणी की 5.70 लाख रुपये व मैकेनिकल वेंटिलेटर की कीमत छह लाख रुपये से अधिक है। इमसें 14 वेंटिलेटर सीएचसी, एक जिला अस्पताल और एक मेडिकल कॉलेज में लगवाए गए थे। मेडिकल कालेज को छोड़कर अन्य सभी बंद है। सीएचसी में काम न होने ने कारण चार वेंटिलेटर बरेली को दे दिया गया था।
इन मरीजों को पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत
- सिर और सीने में गंभीर चोट, हार्ट अटैक, लकवा, लीवर और किडनी के मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। ऑपरेशन करने के बाद कुछ मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है।
वर्जन
- मेरे कार्यकाल से पहले वेंटिलेटर लगाए गए थे। सीएचसी में लगाए गए 14 वेंटिलेटर उपयोग न होने की वजह से हटवा दिए गए थे। उनको जिला अस्पताल व महिला अस्पताल को दे दिया गया था। अगर उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है तो जांच कराई जाएगी। बंद कमरे वेंटिलेटर रखे होने की जानकारी नहीं है। - डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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जिला और महिला अस्पताल व सीएचसी में वेंटिलेटर न होने के कारण प्रतिदिन 20 से 25 गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इसलिए सिर में गंभीर चोट, हार्ट अटैक सहित अन्य गंभीर रोगों के मरीज निजी अस्पतालों में जाने को विवश हैं। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि जिला अस्पताल और सीएचसी के लिए कोरोना काल में खरीदे गए करीब 60 लाख रुपये के 16 वेंटिलेटर कमरे में कैद कर दिए गए हैं। इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। केवल राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक वेंटिलेटर चल रहा है।
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जिला और महिला अस्पताल में रखे वेंटिलेटर को चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं। इसे चलवाने के लिए अस्पताल की ओर से पहल भी नहीं की गई है। अगर यह चल रहे होते तो आम आदमी को बड़ी राहत मिलती। निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर का खर्च बहुत महंगा है। वहां का खर्च आम आदमी नहीं उठा पाता, इसलिए कई मरीज बिना इलाज के ही दम तोड़ दे रहे हैं। अब दिल्ली में कोरोना का मरीज मिलने पर जिला अलर्ड मोड में आ गया है। सीएमओ ने सभी डॉक्टरों को सतर्क कर दिया है। लेकिन वेंटिलेटर ही नहीं है तो यह कैसे कोरोना से लड़ पाएंगे।
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वार्ड आईसीयू, वेंटिलेटर है ही नहीं
जिला अस्पताल में चार वेंटिलेटर कमरे में रखे गए हैं। आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर नहीं लगाया गया है। इस वार्ड में सिलिंडर से ही ऑक्सीजन मरीज को दी जा रही है।
कोरोना कॉल में खरीदे गए थे वेंटिलेटर
कोरोना काल में तीन बार में 16 वेंटिलेटर खरीदे गए थे। इनमें नार्मल, फेस मास्क और मैकेनिकल वेंटिलेटर शामिल हैं। नार्मल श्रेणी के वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ से सवा दो लाख रुपये, फेस मास्क श्रेणी की 5.70 लाख रुपये व मैकेनिकल वेंटिलेटर की कीमत छह लाख रुपये से अधिक है। इमसें 14 वेंटिलेटर सीएचसी, एक जिला अस्पताल और एक मेडिकल कॉलेज में लगवाए गए थे। मेडिकल कालेज को छोड़कर अन्य सभी बंद है। सीएचसी में काम न होने ने कारण चार वेंटिलेटर बरेली को दे दिया गया था।
इन मरीजों को पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत
- सिर और सीने में गंभीर चोट, हार्ट अटैक, लकवा, लीवर और किडनी के मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। ऑपरेशन करने के बाद कुछ मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है।
वर्जन
- मेरे कार्यकाल से पहले वेंटिलेटर लगाए गए थे। सीएचसी में लगाए गए 14 वेंटिलेटर उपयोग न होने की वजह से हटवा दिए गए थे। उनको जिला अस्पताल व महिला अस्पताल को दे दिया गया था। अगर उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है तो जांच कराई जाएगी। बंद कमरे वेंटिलेटर रखे होने की जानकारी नहीं है। - डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ

जिला अस्पताल के बंद वार्ड में रखे वेंटिलेटर पर जमी धूल। संवाद- फोटो : संवाद