फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   खुद किरायेदार, फिर भी किराये पर उठा रहे फुटपाथ

खुद किरायेदार, फिर भी किराये पर उठा रहे फुटपाथ

Fri, 18 Jan 2019 07:37 PM IST
geetesh jolly geetesh jolly
Updated Fri, 18 Jan 2019 07:37 PM IST
विज्ञापन
खुद किरायेदार, फिर भी किराये पर उठा रहे फुटपाथ
बदायूं। इस शहर का निजाम ही उल्टा है, यहां न तो अधिकारियों को जनता की चिंता है और न ही जनप्रतिनिधियों को, जनता समस्याओं में पिसती है तो पिसती रहे, किसी को क्या। यहां दुकानों में व्यापार कर रहे कई दुकानदार खुद नगर पालिका के किरायेदार हैं लेकिन वे फुटपाथों को भी किराये पर उठा देते हैं मानों यह उनकी अपनी मिल्कियत हो। ये दुकानदार पालिका में अपनी दुकान का मामूली ही किराया जमा करते हैं, लेकिन अपनी दुकान के सामने फुटपाथ पर खड़े ठेले व खोमचों वालों से रोजाना के सौ से दो सौ रुपये वसूलते है। ऐसा नहीं है कि नगर पालिका, प्रशासन इसे नहीं जानते, लेकिन इससे उन्हें क्या।
विज्ञापन

शहर के कई स्थानों पर व्यापारियों ने दुकानों को गोदाम बनाकर खुद फुटपाथ पर बैठकर दुकानदारी शुरू कर दी तो कई अपनी दुकान के सामने ठेले-खोमचे खड़ा कराने के नाम पर उनसे सौ से दो सौ रुपये रोजाना वसूल रहे हैं। ऐसे में शहर में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। शिकायतों के बावजूद अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शहर में नगर पालिका की करीब साढ़े सात सौ दुकानें हैं, जो किराये पर व्यापारियों को दे रखी हैं। इसके एवज में पालिका की ओर से निर्धारित शुल्क मासिक या सालाना लिया जाता है, जो जगह के हिसाब से अलग-अलग है। शुरुआत में व्यापारियों ने अपना व्यापार दुकान के अंदर ही सीमित रखा, लेकिन अपने आप को दूसरे से ज्यादा दिखाने के चक्कर मे वे न जाने कब दुकानें छोड़कर फुटपाथ तक आ गए। पालिका अधिकारियों की लापरवाही के चलते ऐसे दुकानदारों को कभी सचेत नहीं किया गया। इस वजह से व्यापारियों ने वहां पर अस्थायी से लेकर स्थायी अतिक्रमण तक कर लिया। दुकानों के सामने ठेले और खोमचे खड़ा कराने के नाम पर उनसे उगाही शुरू कर दी गई। अब हालात ये हैैं कि शहर में अधिकतर दुकानों के आगे ठेले खड़े रहते हैं। उनसे दुकानदारों को कोई परेेशानी नहीं होती है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपना वाहन खड़ा कर दें, तो दुकानदार उससे लड़ने पर उतारू हो जाते हैं।
विज्ञापन

-----------------
क्या बोले लोग
सुनवाई नहीं: दुकानदारों ने शहर में अतिक्रमण कर रखा है। इस वजह से लोगों का बाजार में निकलना दूभर हो गया है। कई बार शिकायत की, लेकिन कोई समस्या का समाधान नहीं करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-आकाश गुप्ता
---
ठेले मुसीबत बने: फुटपाथ तो पहले ही दुकानदारों ने घेर लिया है। अब दुकानों के आगे ठेले-खोमचे लगवा लिए हैं, जो राहगीरों केे लिए मुसीबत बने हुए हैं।
-सचिन
----
दुकानदार नहीं सुनते: दुकानदार अपनी मनमानी पर उतारू हैं, जो किसी की सुनने को तैयार नहीं है। ऐसे लोगों के खिलाफ पालिका एक्शन नहीं ले रही है, जो अपने आप में सवाल खड़ा कर रहा है।

- कैलाश
----
हो जाते हैं लड़ाई पर आमादा: दुकानदार ठेले वालों को खड़ा करवा सकते हैं, लेकिन दुकान के सामने थोड़ी देर के लिए अगर कोई अपनी बाइक खड़ी कर दे, तो वे लड़ाई पर आमादा हो जाते हैं।
- रमन पाठक
--------------------------------------
पालिका के पास मैन पावर कम है। इस समय आवारा पशु पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद अतिक्रमण की समस्या का निदान किया जाएगा।
-संजय तिवारी, ईओ, नगर पालिका
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed