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Budaun News: फॉगिंग की 90 मशीन खराब, डंक मार रहे मलेरिया व डेंगू के मच्छर
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गांव हसनपुर में जलभराव। संवाद
बदायूं। मलेरिया विभाग भले ही गांव-गांव लोगों को संक्रमण के प्रति जागरूक कर रहा हो, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर इसको लेकर गंभीरता नहीं है। कोविड के समय करीब 27 लाख रुपये की लागत से ग्राम प्रधानों को 90 फॉगिंग मशीनें दी गई थी। प्रधानों की लापरवाही से वह मशीनें कबाड़ हो चुकी हैं। प्रधानों ने इसका ठीक से प्रयोग नहीं किया और गांव- गांव मच्छर डंक मार रहे हैं।
जिले में डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गांव में जलभराव न होने दिया जाए और समय-समय पर फॉगिंग कराई जानी है। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार साल में ग्राम पंचायत स्तर पर एक भी फॉगिंग नहीं कराई गई। इसलिए जिले में डेंगू और मलेरिया ने पिछले साल कहर बरपाया था। ग्राम पंचायतों में आधी अधूरी तैयारियां देख लोगों को इस बार भी बीमारी बढ़ने की आशंका है। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग की ओर से 22 हजार 664 स्लाइड तैयार कराई गईं थीं, इनमें से 256 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी और मलेरिया के 3610 मरीज मिले थे।
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तीन साल में मिले मलेरिया और डेंगू के मरीज
वर्ष मलेरिया के मरीज डेंगू के मरीज
2022 1373 579
2023 3224 729
2024 3610 256
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दो सौ संवेदनशील तो 150 अतिसंवेदनशील गांव
जिले में करीब 200 गांव संवेदनशील व 150 अतिसंवेदनशील है। चार साल पहले हर ब्लॉक स्तर की बड़ी ग्राम पंचायतों में फॉगिंग मशीन खरीदी गई थी। कुल 90 मशीनें दी गई थी। प्रधानों ने उनका सदुपयोग नहीं किया और वह कबाड़ हो गई हैं। यही वजह है कि गांव में फॉगिंग नहीं हो पा रही है।
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कोट,
- कोविड के समय बड़ी ग्राम पंचायतों के लिए फॉगिंग मशीनें खरीदी गईं थी। उसके बाद से कोई मशीन नहीं खरीदी गई है। फॉगिंग कराने का काम मलेरिया विभाग का है। उन्हीं के द्वारा कराई जा रही है। पंचायत स्तर पर फॉगिंग की व्यवस्था नहीं है। - यावर अब्बास, जिला पंचायत राज अधिकारी
कोट,
- ग्राम प्रधानों को गांव की सफाई कराने और जलभराव न होने देने के लिए कहा गया है। आशा भी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। पंचायत स्तर पर फॉगिंग मशीन होनी चाहिए, जिससे वहां दवा का छिड़काव कराया जा सके। - डा. योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
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जिले में डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गांव में जलभराव न होने दिया जाए और समय-समय पर फॉगिंग कराई जानी है। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार साल में ग्राम पंचायत स्तर पर एक भी फॉगिंग नहीं कराई गई। इसलिए जिले में डेंगू और मलेरिया ने पिछले साल कहर बरपाया था। ग्राम पंचायतों में आधी अधूरी तैयारियां देख लोगों को इस बार भी बीमारी बढ़ने की आशंका है। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग की ओर से 22 हजार 664 स्लाइड तैयार कराई गईं थीं, इनमें से 256 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी और मलेरिया के 3610 मरीज मिले थे।
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तीन साल में मिले मलेरिया और डेंगू के मरीज
वर्ष मलेरिया के मरीज डेंगू के मरीज
2022 1373 579
2023 3224 729
2024 3610 256
दो सौ संवेदनशील तो 150 अतिसंवेदनशील गांव
जिले में करीब 200 गांव संवेदनशील व 150 अतिसंवेदनशील है। चार साल पहले हर ब्लॉक स्तर की बड़ी ग्राम पंचायतों में फॉगिंग मशीन खरीदी गई थी। कुल 90 मशीनें दी गई थी। प्रधानों ने उनका सदुपयोग नहीं किया और वह कबाड़ हो गई हैं। यही वजह है कि गांव में फॉगिंग नहीं हो पा रही है।
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कोट,
- कोविड के समय बड़ी ग्राम पंचायतों के लिए फॉगिंग मशीनें खरीदी गईं थी। उसके बाद से कोई मशीन नहीं खरीदी गई है। फॉगिंग कराने का काम मलेरिया विभाग का है। उन्हीं के द्वारा कराई जा रही है। पंचायत स्तर पर फॉगिंग की व्यवस्था नहीं है। - यावर अब्बास, जिला पंचायत राज अधिकारी
कोट,
- ग्राम प्रधानों को गांव की सफाई कराने और जलभराव न होने देने के लिए कहा गया है। आशा भी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। पंचायत स्तर पर फॉगिंग मशीन होनी चाहिए, जिससे वहां दवा का छिड़काव कराया जा सके। - डा. योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी

गांव हसनपुर में जलभराव। संवाद