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Budaun News: डीलरशिप का झांसा देकर 8.80 लाख रुपये की ठगी
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बदायूं। सोलर सिस्टम की डीलरशिप देने का झांसा देकर एक युवक से जालसाजों ने ऑनलाइन 8.80 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने चार किश्तों ने जालसाजों के बताए गए बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर किए। पीड़ित की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। साइबर थाना पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही हैं।
सदर कोतवाली क्षेत्र के श्रीरामनगर कॉलोनी निवासी अपूर्व कुमार ने साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह पीएम सूर्या घर योजना का वेंडर है। उसने टाटा पॉवर सोलर सिस्टम लिमिटेड की डीलरशिप के लिए आवेदन किया था। इस संबंध में उसके पास 28 फरवरी 2025 को फोन आया। उन्हें टाटा की डीलरशिप ऑफर की गई थी। उन्होंने सात मार्च 2025 को एक ई-मेल पर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरा।
इस बीच ढाई हजार रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा कराया गया। 28 मार्च 2025 को कंपनी की तरफ से एक समझौतानामा पर हस्ताक्षर कराया गया। उसके बाद 45,200 रुपये पंजाब नेशनल बैंक से कंपनी के खाते में ट्रांसफर कराया गया। फिर सामान की सप्लाई के लिए छह लाख रुपये बैंक में ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद फिर से सर्विस टैक्स के रूप में 2,33,200 रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कराए गए। उसके बाद कंपनी से अधिकारियों ने कहा कि जब सेल्स आएगा, तब उन्हें रिफंडेबल चेक दिया जाएगा।
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सात दिन के अंदर भुगतान करा देना। इसके बाद सामान भी भिजवा दिया जाएगा, लेकिन काफी दिन बीतने के बावजूद सामान नहीं आया। इस पर उन्होंने धोखाधड़ी का अहसास हुआ। साइबर थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के श्रीरामनगर कॉलोनी निवासी अपूर्व कुमार ने साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह पीएम सूर्या घर योजना का वेंडर है। उसने टाटा पॉवर सोलर सिस्टम लिमिटेड की डीलरशिप के लिए आवेदन किया था। इस संबंध में उसके पास 28 फरवरी 2025 को फोन आया। उन्हें टाटा की डीलरशिप ऑफर की गई थी। उन्होंने सात मार्च 2025 को एक ई-मेल पर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरा।
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इस बीच ढाई हजार रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा कराया गया। 28 मार्च 2025 को कंपनी की तरफ से एक समझौतानामा पर हस्ताक्षर कराया गया। उसके बाद 45,200 रुपये पंजाब नेशनल बैंक से कंपनी के खाते में ट्रांसफर कराया गया। फिर सामान की सप्लाई के लिए छह लाख रुपये बैंक में ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद फिर से सर्विस टैक्स के रूप में 2,33,200 रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कराए गए। उसके बाद कंपनी से अधिकारियों ने कहा कि जब सेल्स आएगा, तब उन्हें रिफंडेबल चेक दिया जाएगा।
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सात दिन के अंदर भुगतान करा देना। इसके बाद सामान भी भिजवा दिया जाएगा, लेकिन काफी दिन बीतने के बावजूद सामान नहीं आया। इस पर उन्होंने धोखाधड़ी का अहसास हुआ। साइबर थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है।