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Budaun News: गेट से लेकर प्लांट के पूरे परिसर में 40 सीसी कैमरे, हत्या वाले स्थान पर एक भी नहीं

Sat, 14 Mar 2026 01:49 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 01:49 AM IST
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40 CCTV cameras cover the entire plant premises, from the gate to the farthest corners yet not a single one is located at the scene of the murder.
दातागंज। सैजनी में एचपीसीएल के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट में गेट से लेकर पूरे परिसर में 40 सीसी कैमरे लगे हुए हैं, मगर हत्या वाले स्थान पर एक भी नहीं था। इस वजह से अफसरों पर गोलियां चलाने की घटना के फुटेज अभी सामने नहीं आ सके हैं।
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पुलिस टीम ने हत्या के बाद परिसर में लगे सीसी कैमरों के फुटेज खंगाले तो सामने आया कि गेट पर गाड़ी आई और सीधे अंदर चली गई। करीब 20 मिनट के बाद गाड़ी फिर से तेजी से निकलती हुई दिखाई दी है। घटनास्थल से कुछ दूरी पर काम कर रहे कर्मचारी इधर-उधर भागते दिख रहे हैं, लेकिन गोली मारते हुए या गोली चलाते हुए कोई कैमरे में कैद नहीं हो सका है। इसका कारण है कि कार्यालय के आसपास सीसी कैमरा नहीं लगा था।
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चालक ही चलाकर प्लांट के अंदर ले गया था गाड़ी
गाड़ी में अजय प्रताप के बैठने के बाद चालक धर्मेंद्र ही उसे चलाकर प्लांट के अंदर ले गया था। गेट से करीब एक किमी दूर बने दफ्तर के पास गाड़ी रुकवाने के बाद चालक बाहर नहीं आया, जबकि आरोपी उतरकर सीधे बैठक कक्ष में घुस गया। जाते ही उसने सबसे पहले सुधीर गुप्ता को गोली मारी, जिससे वह गिर गए। इसी दौरान बैठक में शामिल होने मुंबई से आए अधिकारी राजीव कुमार सिंह, महिला अधिकारी किरन कोशारी और नवीन तैनाती के लिए पहुंचे लोकेश कुमार कमरे से भाग निकले। इसी दौरान आरोपी ने सुधीर को दूसरी गोली बिल्कुल नजदीक से सीने में मार दी। इसी दौरान हर्षित मिश्रा जान बचाकर भागे तो उसने उन भी गोली दाग दी। गोली लगने के बाद वह भागते हुए कमरे के बाहर जाकर गिरे। आरोपी ने दूसरी गोली भी चलाई, लेकिन वह उन्हें नहीं लग सकी। चार फायर करने के बाद आरोपी गाड़ी में बैठकर भाग निकला। इस दौरान किसी ने उसको रोकने की कोशिश नहीं की।
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आरोपी के दो सगे व एक चचेरा भाई कंपनी में हैं कार्यरत
एक कर्मचारी ने बताया कि आरोपी अजय प्रताप के दो सगे भाई व एक चचेरा भाई इस समय कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। इनमें दो गार्ड तो एक हैडरा चलाने का काम करता है। आरोपी खुद भी पहले ऑपरेटर के पद पर रह चुका है। कंपनी के कर्मचारियों व अन्य लोगों से अवैध वसूली पर उसे प्लांट से निकाल दिया गया था। इसके बाद उसने एक मेसर्स लक्ष्य पावरटेक कंपनी में ठेका कर्मचारी के रूप में काम करना शुरू कर दिया। जब यह बात अधिकारियों को पता लगी तो उन्होंने पराली लाने वाली इस कंपनी को भी ब्लैक लिस्ट कर दिया और पूरनपुर की कंपनी को पराली लाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई।



133 करोड़ की लागत से 50 एकड़ जमीन पर कराया था प्लांट का निर्माण

गांव सैजनी से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर प्लांट का निर्माण कराया गया था। इसके निर्माण में 133 करोड़ की लागत आई थी। करीब 50 एकड़ जमीन पर प्लांट बनकर तैयार हुआ तो 27 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ इसका भव्य उद्घाटन किया था। संचालन शुरू होने के बाद से ही प्लांट विवादों के घेरे में रहा।
प्लांट में वर्चस्व की ऐसी जंग छिड़ी कि दो अधिकारियोंं को अपनी जान गंवानी पड़ गई। इस प्लांट में करीब 125 कर्मचारी काम करते हैं। दोनों अधिकारियों के साथ ही जीशान, जिसने रिपोर्ट दर्ज कराई है, वह कंपनी के अधिकारी थे। बाकी सभी अधिकारी व कर्मचारी आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी करते हैं।


अजय प्रताप सिंह का कंपनी में चलता था सिक्का
संवाद न्यूज एजेंसी ने स्थानीय लोगों से बात की तो बताया कि अजय प्रताप सिंह का प्लांट में सिक्का चलता था। वह कर्मचारियों से वसूली भी करता था। नौकरी लगवाने से लेकर निकलवाने तक की ताकत रखता था। लेकिन इन दोनों अधिकारियों से जब से रार शुरू हुई उसका प्लांट में घुसना भी बंद कर दिया गया था। इसके बाद भी आरोपी ने कंपनी के अंदर फिल्मी स्टाइल में घुसकर दोनों अधिकारियों को मौत के घाट उतर दिया।



अधिकारियों व आरोपी के बीच चल रहा था समझौते का प्रयास
आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद दोनों अधिकारियों को उससे डर लगा हुआ था। यही वजह थी कि अधिकारी कभी-कभी ही प्लांट आते थे। इस वजह से दोनों जिले से जाना भी चाह रहे थे। इस बीच किसी ने अधिकारियों और आरोपी के बीच समझौते का प्रस्ताव रख दिया, जिसके बाद अधिकारियों ने भी समझौता करने के लिए हामी भर ली थी। इसी भ्रम से सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की चिंता कुछ कम हो गई थी। अब नजरअंदाजी में दोनों की जान चली गई।
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